कर्त्तव्यपरायणता की प्रतिमूर्ति हैं नाथू सिंह मीणा

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चक्रधरपुर : प्रतिभा परिचय की मोहताज नहीं होती। प्रतिभावान व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में रहें, अपनी कार्यशैली से विशिष्ट पहचान बनाने में सफल होते हैं। अपनी प्रतिभा का परचम लहराते हुए कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश करते हैं। ऐसी ही एक शख्सियत हैं झारखंड के पश्चिम सिंहभूम (चाईबासा) जिलांतर्गत चक्रधरपुर अनुमंडल में पदस्थापित अनुमंडलीय पुलिस पदाधिकारी सह सहायक आरक्षी अधीक्षक नाथू सिंह मीणा। श्री मीणा वर्ष 2017 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वह विगत 20 अक्टूबर 2019 से चक्रधरपुर में बतौर एसडीपीओ सह एएसपी अपने कर्तव्यों का बखूबी निर्वहन कर रहे हैं। काफी कम समय में ही श्री मीणा पुलिस विभाग में अपनी सकारात्मक छवि बनाने में सफल रहे हैं। उनकी कार्यशैली अन्य पुलिसकर्मियों के लिए अनुकरणीय है। मूल रूप से राजस्थान निवासी श्री मीणा की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा गांव में ही हुई। उनके पिता प्रभु दयाल मीणा एक प्रगतिशील किसान हैं, वहीं माता प्रभावती देवी मीणा एक कुशल गृहणी व समाजसेविका भी हैं। राजस्थान के नायला से उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की। तत्पश्चात इंटरमीडिएट से लेकर स्नातकोत्तर तक की शिक्षा उन्होंने जयपुर में हासिल की। वह एक सामान्य व निम्न आयवर्गीय किसान परिवार से हैं। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, इसलिए उन्होंने शिक्षा प्राप्त करने के बाद नौकरी की तलाश शुरू कर दी। इस क्रम में उन्हें पोस्ट ऑफिस में क्लर्क की नौकरी मिली। लगभग एक वर्षों तक उन्होंने पोस्ट ऑफिस में अपनी सेवाएं दी। इसके बाद उन्होंने इंडियन रेलवे ट्रेफिक सर्विस (आईआरटीएस), बड़ोदरा में भी कार्य किया। पढ़ने-लिखने में शुरू से ही अव्वल रहने वाले श्री मीणा अपनी व्यवहारकुशलता, कर्तव्य निष्ठा, लगन व परिश्रम के बलबूते सदैव आगे बढ़ने का जज्बा और जुनून लिए अपने कर्तव्यपथ पर अग्रसर रहे। उनकी दिली तमन्ना थी कि वह आईपीएस बनकर देश व समाज की सेवा करें। इस दिशा में वह सतत प्रयासरत रहा करते थे। जीविकोपार्जन के लिए धनोपार्जन के साथ-साथ इसकी तैयारी भी उन्होंने शुरू कर दी। अंततः इस दिशा में उनका प्रयास रंग लाया। वर्ष 2017 में उन्होंने प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता प्राप्त की और आईपीएस चयनित हुए। प्रशिक्षण काल के दौरान वह लगभग सात माह गिरिडीह में पदस्थापित रहे। इस दौरान उन्होंने पुलिस विभाग के आलाधिकारियों व अपने सहकर्मियों से विभागीय कार्यों के गुर सीखे। आईपीएस बनने के बाद वर्ष 2018 में श्री मीणा परिणय सूत्र में बंधे। वह दो भाई व दो बहन हैं। अपने पारिवारिक उत्तरदायित्वों का बखूबी निर्वहन करते हुए वह विभागीय कार्यों के त्वरित निष्पादन के प्रति भी सजग रहते हैं। पुलिस-पब्लिक के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित कर वह अपराध नियंत्रण और बेहतर विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत रहते हैं। वह कम्युनिटी पुलिसिंग को बढ़ावा देते हुए समाज में पुलिस की सकारात्मक छवि बनाए रखने की दिशा में अग्रसर हैं। शहरी क्षेत्र में अपराध नियंत्रण और विधि व्यवस्था संधारण के अलावा सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों में भी ग्रामीणों के बीच जाकर वह उनकी समस्याओं से रूबरू होते हैं। श्री मीणा का मानना है कि पुलिस जनता की सेवक होती है। जनता के साथ पुलिस को समन्वय स्थापित कर विभागीय कार्यों को गति देने की आवश्यकता है। इससे सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलता है। काफी हद तक यह प्रयास स्वस्थ और स्वच्छ समाज निर्माण में भी सहायक होता है।

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