झारखंड विधानसभा चुनाव : भाजपा के लिए तीसरे चरण की दस सीटें बचाने की होगी चुनौती.

रांची। झारखंड विधान सभा चुनाव के तीसरे चरण की अधिसूचना जारी की जा चुकी है। भाजपा को इस चरण की 17 सीटों में से 10 को बचाने की बड़ी चुनौती है। इनमें सात सीटें पिछले चुनाव में उसकी जीती हुई हैं और तीन दल-बदल के उपहार में हासिल हुई हैं। यह 17 सीटें राज्य के आठ जिलों में स्थित हैं। वहां नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसमें रांची की पांच, हजारीबाग की चार, रामगढ़, बोकारो की दो-दो, और सरायकेला-खरसावां एवं कोडरमा की एक-एक सीट शामिल है। मतदान 12 दिसंबर को होगा। नामांकन की अंतिम तिथि 25 नवंबर है। 26 को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 28 नवंबर तक नाम वापसी हो सकेगी। तीसरे चरण की 17 विधानसभा सीटों पर 55,01,239 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। इसमें 28,98,601 पुरुष और 24,60,740 महिलाएं हैं। इस चरण में एक विधानसभा में औसतन 3,23,602 मतदाता हैं। प्रति विधानसभा पुरुष वोटर का औसत 1,70,506 है, तो महिलाओं का 1,44,749 है। इस चरण में पुरुष मतदाताओं की तुलना में महिला मतदाताओं की संख्या (4,37,861) कम हैं। हटिया विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा 4,31,411 वोटर हैं, जिसमें 2,25,058 पुरुष और 2,06,353 महिला हैं। जबकि सबसे कम 1,99,275 मतदाता सिल्ली विधानसभा क्षेत्र में हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में सात पर भाजपा जीती थी। 3-3 सीटें झामुमो और झाविमो, 2-2 सीटें कांग्रेस और आजसू के हिस्से में आई थी। बाद में झाविमो के 3 तीन विधायक भाजपा में शामिल हो गये थे। इस चरण में सबसे ज्यादा पांच विधानसभा क्षेत्र रांची जिले में हैं। सिल्ली, खिजरी (एसटी), कांके (एससी), रांची और हटिया। जबकि चार सीटें बरकट्ठा, बरही, मांडू और हजारीबाग, हजारीबाग जिले में हैं। चतरा जिले में एक सीट सिमरिया (एससी), रामगढ़ जिले में की दो सीटें बड़कागांव और रामगढ़, गिरिडीह में धनवार, बोकारो जिला में गोमिया और बेरमो और सरायकेला-खरसावां की इचागढ़ विधानसभा सीट शामिल है। भाजपा की चुनावी तैयारियों पर गौर करें तो पता चलता है कि झारखंड में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर तैयारियां बेहतर है,लेकिन चुनाव के दौरान तरह-तरह की हवाएं चलती हैं, जो असर डालती हैं। उनको अनुकूल बनाए रखने में भाजपा कितना सफल होती है, उसकी सफलता इसी बात पर निर्भर करेगी। राजनेताओं के पाला बदल के खेल का भी प्रतिकूल असर भाजपा पर हो सकता है। बहरहाल, भाजपा के रणनीतिकार किला फतह करने के लिए चुनावी कुरुक्षेत्र में कौन सी रणनीति अख्तियार करते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।

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