अंतर्मुखी स्वभाव आंतरिक गुणों को विकसित करने का सशक्त माध्यम  है

(2 जनवरी, 'विश्व अंतर्मुखी दिवस' पर विशेष)

अंतर्मुखी स्वभाव आंतरिक गुणों को विकसित करने का सशक्त माध्यम  है

मनुष्य के स्वभाव पर शोध करने वाले विश्व भर के मनोचिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष दिया है कि मनुष्य दो तरह के स्वभाव वाले होते हैं।  पहला अंतर्मुखी दूसरा बहिर्मुखी। अंतर्मुखी का तात्पर्य यह है कि इस स्वभाव वाले व्यक्ति ज्यादा बोलते नहीं हैं। वे अधिकांश मामलों में मन की बातें मन में ही रख लेते हैं।  जब बहुत जरूरी होता है, तभी वे अपनी बातों को कम से कम शब्दों में रखते हैं। हमारा समाज ऐसे व्यक्तियों को एक अलग ही नजरिए से देखने लगते हैं।  बहुत सारे लोग ऐसे अंतर्मुखी व्यक्तियों को पागल तक का डालते हैं, जो बिल्कुल ही उचित नहीं है।मनोचिकित्सकों का मानना है कि अंतर्मुखी व्यक्ति बहिर्मुखी व्यक्तियों की तुलना में ज्यादा मानसिक रूप से ऊर्जावान होते हैं। यह मनुष्य का स्वभाव है। उसे उसी रूप में देखने की जरूरत है।  और उसी आधार पर उसका मूल्यांकन करना चाहिए। बहिर्मुखी स्वभाव वाले व्यक्ति ज्यादा बोलने वाले होते हैं। वे अपनी बातों को मन में नहीं रखते हैं बल्कि बोलकर स्वयं को हल्का कर लेते हैं। यह बहिर्मुखी व्यक्तियों का स्वभाव होता है। इस बहिर्मुखी स्वभाव वाले व्यक्ति को भी अलग नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि इस स्वभाव वाले व्यक्ति का यह  स्वाभाविक स्वभाव है। अंतर्मुखी और बहिर्मुखी स्वभाव ईश्वर प्रदत्त है।  उसे उसी रूप में देखा जाना चाहिए।
  अंतर्मुखी स्वभाव वाले व्यक्तियों के प्रति जो सामाजिक नजरिया है, उसे दुरुस्त करने के लिए हर साल 2 जनवरी विश्व अंतर्मुखी दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। इसलिए हर साल 2 जनवरी को विश्व अंतर्मुखी दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर विश्व भर में सरकारी और गैर-सरकारी विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा यह जागरूकता फैलाई जाती है कि अंतर्मुखी स्वभाव वाले व्यक्ति भी मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ होते हैं। उनका कम बोलना किसी भी स्थिति में मानसिक दुर्बलता नहीं है बल्कि यह अंतर्मुखी वाले व्यक्तियों का स्वाभाविक स्वभाव है।  उसे उसी उसी नजरिए से देखा जाना चाहिए । इस अवसर पर होने वाले कार्यक्रमों के माध्यम से यह जानकारी दी जाती है कि अंतर्मुखी  लोगों को समझें, उनका सम्मान करें और उन्हें आवश्यक एकांत व स्थान दें । ऐसे व्यक्तियों के चुप रहने पर अनावश्यक टीका टिप्पणी न करें। हम सबों को यह जानना चाहिए कि विश्व भर में जितने भी वैज्ञानिक शोध हुए हैं, जिसमें अधिकांश वैज्ञानिक शांत रहकर ही अपने अपने शोधों को पूरा किए हैं।‌ अगर वे बहिर्मुखी होते तब शायद अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाते। बहिर्मुखी स्वभाव व्यक्ति भी शोध, लेखन अथवा पाठन के समय एकांत में ही रहना पसंद करते हैं।  अगर बहर्मुखी व्यक्ति शोध, लेखन अथवा अध्ययन से जुड़े हैं, तो उन्हें शांत रहना ही होगा।  तभी वे अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं।
   मनोचिकित्सकों का निष्कर्ष यह है कि व्यक्ति अंतर्मुखी होकर अपनी आंतरिक ऊर्जा को  विकसित कर सकता है। हम सबों को यह जानना चाहिए कि बोलने से मन हल्का जरूर होता है, लेकिन बोलने के क्रम में ऊर्जा भी खर्च होती है।  बोलना अच्छी बात है।  बोलकर मन को हल्का कर देना, अच्छी बात है, लेकिन अकारण बोलना, बहुत बोलना यह किसी भी सूरत में अच्छी बात नहीं है। किसी भी व्यक्ति को संतुलित और धीमा बोलना। यह अच्छी बात है। इसके साथ ही हर व्यक्ति को संतुलित और सीमित बोलना चाहिए।  अकारण बोलने से कभी-कभी कुछ ऐसी बातें  जुबान से निकल जाती है, जिससे तकरार होने तक की नौबत आ जाती है। इसलिए हर व्यक्ति को बहुत बोलने से बचना चाहिए। हम सब बोलने की ऊर्जा को शांत रहकर पठन-पाठन में लगा देते हैं, तब यह ऊर्जा परिणाम देने लगता है।
अंतर्मुखी दिवस पर होने वाले कार्यक्रमों के माध्यम से लोग यह जान पाते हैं कि यह दिन अंतर्मुखी लोगों के स्वभाव और उनकी ज़रूरतों के बारे में जागरूकता बढ़ाता है। चूंकि अंतर्मुखी व्यक्ति अकेले रहकर ऊर्जा प्राप्त करते हैं। बहिर्मुखी व्यक्तियों के विपरीत अंतर्मुखी व्यक्तियों का स्वभाव होता है। मैं पूर्व में ही यह जिक्र कर चुका हूं कि अंतर्मुखी स्वभाव वाले व्यक्ति चुप रह कर ही अपने विचारों को गति प्रदान करते हैं।  यह उनका स्वाभाविक स्वभाव है। यह स्वभाव किसी भी मायने में मानसिक दुर्बलता की श्रेणी में नहीं आता है बल्कि अंतर्मुखी वाले व्यक्तियों का यह स्वभाव ही उसकी ताकत  होती है। बहिर्मुखी व्यक्तियों का स्वभाव ज्यादा बोलने वाला होता है। समाज में दोनों तरह के व्यक्ति हैं । विश्व भर के अंतर्मुखी व्यक्तियों  पर हुए शोधों में यह पाया गया कि स्कूल, कॉलेज अथवा अन्य संस्थाओं में पढ़ने वाले अंतर्मुखी छात्रों को दूसरे नजरिए से देखा जाता है, जो पूरी तरह से गलत है ।  इसी  बात को ध्यान में रखकर विश्व भर के मनोवैज्ञानिकों ने अपने शोधों में यह सिद्ध किया कि अंतर्मुखी स्वभाव उसकी स्वाभाविक  अवस्था है । इस श्रेणी में आने वाले व्यक्ति बहिर्मुखी व्यक्तियों की तुलना में किसी भी स्तर पर कमतर नहीं है बल्कि दोनों वर्ग के व्यक्ति समान रूप से अपने-अपने कामों को अंजाम दे सकते हैं। यह दिवस  उन्हें गर्व महसूस कराता है कि उनका शांत स्वभाव कोई कमी नहीं, बल्कि रचनात्मकता और गहराई का स्रोत है।
  मनोचिकित्सकों का यह निष्कर्ष है कि विश्व भर के कई प्रसिद्ध वैज्ञानिक और विचारक ऐसे हुए, जो अंतर्मुखी स्वभाव वाले थे।  अल्बर्ट आइंस्टीन  और जे.के. रोलिंग दोनों ऐसे वैज्ञानिक थे, जो अंतर्मुखी स्वभाव वाले थे। इन दोनों ने विज्ञान के क्षेत्र में जो अनुसंधान किया था, बरसों बाद भी पूरी दुनिया इनके शोधों पर चल रही है। यह इस बात को दर्शाता है कि अंतर्मुखी किसी भी व्यक्ति की ऊर्जा होती है। दुनिया के ऐसे कई नामचीन साहित्यकार हुए, जो चुप रह कर ऐसी साधना किएं, जिसकी गूंज आज भी बरकरार है। अंतर्मुखी व्यक्तियों का स्वभाव शांत जरूर होता है, लेकिन उसका अंतर्मन शांत रहकर भी गतिशील होता है। ऐसी अवस्था में वह जिस निष्कर्ष तक पहुंचाना चाहता है, आसानी से पहुंच पाता है। इसीलिए अंतर्मुखी स्वभाव वाले व्यक्ति ने जो खोज किया, दुनिया उनकी खोजों पर आज भी गर्व करती है। अंतर्मुखी व्यक्ति अक्सर सोच-समझकर काम करते हैं और दुनिया को एक अलग नजरिए से देखते हैं।
 हम सबों को यह समझने की जरूरत है कि अंतर्मुखी लोगों को सामाजिक मेलजोल के बाद शांति और सुकून की ज़रूरत होती है, ताकि वे अपनी ऊर्जा को फिर से भर सकें। अंतर्मुखी व्यक्ति समाज में ही रहकर आगे बढ़ते हैं। इनका स्वभाव शांत प्रिय होता है। इसलिए ऐसे व्यक्तियों को शांति से काम करने देना चाहिए। उनके शांति से बैठने पर किसी भी तरह का तकरार नहीं करनी चाहिए।  अगर हम सब उनके शांत  बैठने पर तकरार करते हैं, तो यह उसके स्वभाव से विपरीत होगा।‌ ऐसे अंतर्मुखी व्यक्ति शांत रहकर अपनी ऊर्जा को रिचार्ज करते हैं।  और समय आने पर सीमित शब्दों में अपनी बात को रख पाते हैं। अंतरराष्ट्रीय अंतर्मुखी दिवस मनाने की परंपरा की शुरुआत 2011 से शुरू हुई थी । इसकी शुरुआत लेखिका फेलिसिटास हेने  द्वारा एक ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से दी गई थी। यह अपने किस्म की बिल्कुल एक नई बात थी। यह मनुष्य के स्वभाव से जुड़ी एक गंभीर बात थी। दुनिया भर के मनोचिकित्सकों ने लेखिका की इस बात को गंभीरता से लिया। तब संयुक्त राष्ट्र संघ का ध्यान इस महत्वपूर्ण विषय की ओर आकृष्ट हुआ। संयुक्त राष्ट्र संघ ने अंतर्मुखी व्यक्तियों के संबंध में जागरूकता बढ़ाने के लिए 2 जनवरी का दिन तय किया  विश्व अंतर्मुखी दिवस मनाने का। तब से हर 2 जनवरी को विश्व अंतर्मुखी  दिवस मनाया जा रहा है। हम सबों को अपने आसपास रहने वाले अंतर्मुखी व्यक्तियों के अंतर्मुखी स्वभाव के प्रति जो नजरिया है, उसे दुरुस्त करने की जरूरत है।