ध्यान से सकारात्मक ऊर्जा की वृद्धि होती है - के.सी.मेहरोत्रा
'विश्व ध्यान दिवस' पर ध्यान की महता पर विचार गोष्ठी संपन्न
विश्व ध्यान दिवस पर सागर भक्ति संगम के तत्वाधान में स्थानीय स्वर्ण जयंती पार्क में 'ध्यान की महता' विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश वंदना और गुरु वंदना से हुआ। संगम के सदस्यों ने विश्व शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना किया। गोष्ठी की अध्यक्षता शिक्षाविद के.सी.मेहरोत्रा एवं संचालन संजय खत्री ने किया।
अध्यक्षता करते हुए के.सी.मेहरोत्रा ने कहा कि आज की बदली परिस्थिति में हर व्यक्ति को ध्यान साधना से जुड़ना चाहिए। ध्यान से सकारात्मक ऊर्जा की वृद्धि होती है। नकारात्मकता होता है। व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ रहकर अपने सभी कार्यों को संपन्न करता है।
विजय केसरी ने कहा कि ध्यान व्यक्ति को सहज और सरल बनाता है। निष्काम कर्म की ओर प्रेरित करता है। ध्यान से व्यक्ति का स्वभाव सदैव प्रसन्न रहता है । विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य से कम लेता है।
शिक्षाविद ब्रजनंदन प्रसाद ने कहा कि विश्व के जितने भी महापुरुष हुएं, सभी ने ध्यान साधना को आत्मसात किया। ध्यान से व्यक्ति में एक आंतरिक ऊर्जा संग्रहित होती है, जो कई शारीरिक व्याधियों से दूर रखती है।
समाजसेवी संजय खत्री ने कहा कि विश्व ध्यान दिवस यह बताता है कि आज की बदली परिस्थिति में ध्यान सभी के लिए आवश्यक है। भागम भाग जिंदगी लोगों की हो गई है। ऐसे में ध्यान ही उसे सहज और सरल बना सकता है।
समाजसेवी अखिलेश सिंह ने कहा कि ध्यान की महता आदिकाल से रही है। ईसा पूर्व पांच हजार वर्ष पहले भी ध्यान किया जाता था। ध्यान व्यक्ति को दीर्घायु बनाता है। ध्यानी व्यक्ति अन्य व्यक्तियों की तुलना में काफी प्रसन्नता अपने सभी कार्यों को करते हैं।
आयोजित कार्यक्रम में उषा सहाय, गोपी कृष्ण सहाय, मिथुन राणा, अजीत प्रसाद, प्रदीप प्रसाद, सुरेश मिस्त्री शंभू शरण सिन्हा, अशोक प्रसाद, सतीश होर्रा, इंद्र सोनी, सुरेंद्र कुमार गुप्ता पप्पू, डॉ. वीणा अखौरी आदि सम्मिलित हुए। धन्यवाद ज्ञापन ब्रजनंदन प्रसाद ने किया।