पालिटिक्स से ज्यादा बड़ा गेम कोई है ही नहीं

गेम बनाम गेम ( यह एक व्यंग्य है )

Apr 28, 2024 - 13:15
पालिटिक्स से ज्यादा बड़ा गेम कोई है ही नहीं

आलोक पुराणिक


हाल में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के कुछ ऐसे नौजवानों से मुलाकात की,जिन्होने कई सारे गेम्स डेवलप किये हैं। यह देखकर स्मार्ट विश्वविद्यालय ने गेम्स पर एक निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया। इस प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त निबंध इस प्रकार है-
गेम्स का हमारी लाइफ में घणा महत्व है। हम लोग दरअसल गेम्स ही कर रहे होते हैं। बास कर्मचारियों के साथ गेम्स करता है। कर्मचारी बास के साथ गेम्स कर रहे होते हैं। पति पत्नी के साथ गेम्स करता है। पत्नी पति के साथ गेम्स करती है। टीवी पर दिखाये जानेवाले धारावाहिक भी गेम्स ही हैं, बेकार के ही। गेम्स में पालिटिक्स का गहरा महत्व है। इतना महत्व है कि गेम्स के लिए जो संस्थाएं बनायी जाती हैं, उनमें टाप पोजीशन पर नेता ही बैठे होते हैं। यानी पालिटिक्स के बगैर कोई गेम पूरा ना होता या यूं भी कह सकते हैं कि पालिटिक्स से ज्यादा बड़ा गेंम कोई है ही नहीं।
गेम्स को समझना बहुत जरुरी है। हर दफ्तर में तरह तरह के गेम्स होते हैं। जो सीधे सादे बंदे गेम्स ना समझ पाते, उनके साथ गेम हो जाता है। बालीवुड में कोई मरता है, तो मुंबईया भाषा में इसे कहते हैं कि उसका गेम बजा दिया गया। यानी गेम का गहरा महत्व है, राजनीति से लेकर पालिटिक्स तक।
गेम्स कई तरह के होते हैं। गेम्स सबसे ज्यादा पालिटिक्स में होते हैं। तरह तरह के गेम्स होते हैं। इन दिनों तरह तरह के गेम्स चल रहे हैं। घर वापसी-रिटर्न टू होम यह एक गेम का नाम हो सकता है। इस गेम में यह होगा कि नितीश कुमार जैसा एक कैरेक्टर दौड़ता दिखायी देगा, एक घर से निकल कर दूसरे घर में जायेगा। फिर वहां से लौट कर फिर पुराने घऱ में आयेगा। गेम यह है कि दो प्लेयर खेलेंगे दो मिनट का वक्त रहेगा, जिसके गेम में ज्यादा बार घर वापसी हो जायेगी, उसे जीता हुआ माना जायेगा।
एक और गेम होगा-खींच के लाओ-इसमें दो प्लेयर खेलेंगे। सामने बहुत भीड़ लगी है, प्लेयर का चैलेंज यह है कि उसे भीड़ में से बंदे खींचकर लाने हैं और उन्हे अपने बाक्स में डालना है। जो प्लेयर दो मिनट में ज्यादा से ज्यादा प्लेयर खींचकर अपने बाक्स में डाल लेगा, वह विजेता होगा। ।

चित्र आर के लक्ष्मण साहब का है
शब्द मशहूर व्यंग्यकार श्रीमान आलोक पुराणिक जी के

डेंटिस्ट मरीज से-
बस आप नेताओं के बड़े बड़े झूठ याद कीजिए फिर आप मेरे इस झूठ को बहुत छोटा समझेंगे कि बिलकुल दर्द नहीं होगा।

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