उफ्फ, आलसी पीढ़ी !

पहले नकलची मेहनती होते थे, अब इतने आलसी हो लिये हैं कि सीधे गूगल सर्च से नकल कर रहे है।

Jul 31, 2020 - 12:16
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उफ्फ, आलसी पीढ़ी !

आलोक पुराणिक

बीए का इम्तिहान था। छात्र एक्जामिनेशन हाल में डेस्क में मोबाइल पर गूगल सर्च खोले बैठा था, पेपर के एक सवाल का जवाब गूगल सर्च पर सर्च कर रहा था। नकल में गूगल का योगदान ले रहा था।मुझे बहुतै गुस्सा आया। नकल में भी आलस्य, मतलब पहले नकल की क्या मेहनतशील परंपराएं थी। बालक औऱ बालिकाएं बहुत महीन अक्षरों में कागज या हाथ पर या सलवार या पैंट नीचे कुशलता पूर्वक लिखकर लाते थे। कई नकलची बालक इतनी कलाकारी, इतने कौशल के साथ बीस पेज के मैटिरियल को एक पेज पर उतार देते थे कि यह महीन पच्चीकारी सा लगने लग जाता था। नकल का मैटिरियल कलाकृति का दर्जा हासिल कर लेता था। इन कलाकृतियों के कलाकारों को छोड देने का मन करता था। पहले नकलची मेहनती होते थे, अब इतने आलसी हो लिये हैं कि सीधे गूगल सर्च से नकल कर रहे है। मैंने उस गूगलबाज छात्र को डांटा-उसे नकल की मेहनतोन्मुख और गौरवशाली परंपराओँ के बारे में बताया। छात्र बोला-गुरुजी प्रोग्रेस हुई है, टेकनोलोजी में सब तरफ। अब पुरानी टाइप की मेहनत नहीं करनी पड़ती है। टेक्नोलोजी बहुत काम आसान कर देती है।नयी पीढ़ी के तमाम कामों को टेकनोलोजी ने बहुत आसान बना दिया है। नयी नयी चीजों से काम आसान हो गये हैं। हाल में एक अख़बार में छपा कि नयी पीढ़ी के आलसी डाकुओं ने पिज्जा की होम डिलीवरी का आर्डर दिया। डिलीवरी बाय पिज्जा की डिलीवरी करने के लिए घर पर गया, तो उसे चाकू दिखाकर घर पर लूट लिया। पिज्जा ले लिया, पर पिज्जा के पैसे नहीं दिये। डकैती तक में होम डिलीवरी। नयी पीढ़ी बहुत आलसी हो गयी। पहले डकैत दूर दूर जाते थे डकैती डालने। पहले चिठ्ठी लिखकर बताते थे कि फलां तारीख को डकैती डालेंगे। फिर उस तारीख को चाहे जितनी आंधी पानी बरसात हो, अपना वचन निभाते थे और डकैती के लिए निकलते थे। अब के आलसी डाकू कह उठें कि भईया क्यों कष्ट में डाल रहा है, आनलाइन हमारे खाते में इतनी रकम ट्रांसफर कर दे। हमारी धमकी भी आनलाइन ही ले ले। कितनी गौरवशाली परंपराएं थी पहले की पीढ़ी में, कितनी मेहनत से काम करते थे।एक दो पीढ़ी पहले के प्रेमी बता सकते हैं कि यार की एक झलक के लिए पूरे दिन उसकी गली में खड़े रहते थे। शाम को जरा सी झलक दिखती थी। पिटाई का खतरा उठाते थे, एक झलक के लिए। पूरे दिन इंतजार करते थे, एक झलक के लिए। अब की तरह नहीं कि फेसबुक पर माशूका ने नये फोटू अपलोड कर दिये हैं, देखे जाओ दनादन, बगैर रिस्क के। पहले कितनी मशक्कत होती थी प्रेमिका को अपना मैसेज देने में, लैटर के जरिये। अब तो दनादन फेसबुक पर प्राइवेट मैसेज भेज दो। इंटरनेट नहीं, तो एसएमएस पर भेज दो। पढ़ने के बाद मैसेज डिलीट हो जायेगा। पुराने प्रेमियों के लैटर पकड़ लिये जाते थे और बतौर सबूत उनके खिलाफ ही यूज होते थे। कितना श्रम करते थे पुराने प्रेमी, अब तो सारे आलसी हो गये हैं जी। नयेवाले बहुत आलसी हो गये हैं।

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