विकसित राज्य बनाने की दिशा में एक श्रेष्यकर बजट
( झारखंड सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट पर त्वरित टिप्पणी)
झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार के दूसरे टर्म का दूसरा बजट वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने प्रस्तुत किया है। हेमंत सोरेन सरकार ने इस बजट को इस प्रांत के गरीबों, किसानों,मजदूरों और छोटे बड़े सभी व्यवसायियों के लिए एक श्रेष्यकर बजट बताया है। यह अबुआ और रोजगार सृजन करने वाला बजट है। वहीं वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि यह बजट गरीबों के आंसू पोछने और आम जनता के चेहरे पर मुस्कान लाने वाला साबित होगा। प्रस्तुत बजट पिछले हेमंत सोरेन सरकार के बजट की तुलना में बहुत ही भारी भरकम है। इस अबुआ बजट में ग्रामीण विकास, किसानों के सर्वांगीण विकास के कृषि कार्य में रत महिलाओं विशेष रूप से प्राथमिकता दी गई है । जब 2020-21 में हेमंत सोरेन सरकार ने अपना पहला बजट प्रस्तुत किया था, तब यह बजट मात्र 86, 370 करोड रुपए का था । आज छ: वर्षों के बाद 2026 - 27 के लिए जब यह बजट प्रस्तुत किया गया है, अब उसका आकार बढ़ कर 1 लाख 58 हजार 400 करोड रुपए का हो गया है। बजट की बढ़ती राशि यह बताती है कि झारखंड राजस्व प्राप्ति की दिशा में काफी तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। इससे प्रतीत होता है कि आने वाले दिनों में झारखंड के विकास योजनाओं की लड़ी लग जाएगी। वहीं बजट के प्रावधानों के अध्ययन से प्रतीत होता है कि राज्य सरकार राजकोषीय घाटा को काम भी करना चाहती है। चूंकि राज्य की आमदनी का एक बड़ा हिस्सा ब्याज के भुगतान में चला जाता है। जिससे कई विकास योजनाएं प्रभावित होती रही हैं। इस बजट में इस बात का पूरा ध्यान दिया गया है।
वहीं सरकार को अनुमान है कि साल 2029 तक राज्य की अर्थव्यवस्था 10 ट्रिलियन बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है । पंचायती राज विभाग के लिए 2283 करोड रुपए का प्रावधान किया गया है । महिला बाल कल्याण सामाजिक सुरक्षा विभाग के लिए 22,995 करोड़ प्रावधान किया गया है । प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए 16251 करोड रुपए का प्रावधान किया गया है । तकनीकी शिक्षा के लिए 2564 करोड रुपए का प्रावधान किया गया है। खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता विभाग के लिए 2087 करोड रुपए का प्रावधान किया गया है । पेयजल स्वच्छता विभाग के लिए 5194 करोड रुपए का प्रावधान किया गया है। स्वास्थ्य विभाग का बजट 7990 करोड रुपए प्रस्तावित किया गया है। श्रम नियोजन प्रशिक्षण एवं कौशल विकास के लिए 1168 करोड रुपए प्रस्तावित किया गया है। एससी - एसटी अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के लिए 3568 करोड़ रुपए प्रस्तावित किया गया है । ऊर्जा विभाग के लिए 11197 को रुपए प्रस्तावित किया गया है । ग्रामीण कार्य विभाग के लिए 5081 करोड़ रुपए प्रस्तावित किया गया है । पथ निर्माण विभाग के लिए 6601 करोड रुपए प्रस्तावित किया गया है । भवन निर्माण विभाग के लिए 894 करोड रुपए प्रस्तावित किया गया है । नगर विकास एवं आवास विभाग के लिए 3919 करोड रुपए प्रस्तावित किया गया है। पर्यटन विभाग के लिए 361 करोड़ 67 लख रुपए प्रस्तावित किया गया है । सूचना एवं प्रौद्योगिकी के लिए 368 करोड रुपए का प्रस्तावित किया गया है। वहीं कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के लिए 200 करोड रुपए का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है । यह कैंसर रोगियों के लिए एक वरदान साबित होगा। झारखंड में नए लॉ यूनिवर्सिटी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। ट्राइबल यूनिवर्सिटी खोले जाने का प्रस्ताव पारित किया गया है। झारखंड अनुसूचित जाति परामर्शदात्री आयोग गठन करने निर्णय लिया गया है।
बजट में योजना मद और गैर योजना मद की राशि को समाहित की गई है। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा जारी जन कल्याणकारी योजनाएं और अनुदान पूर्व की तरह ही जारी रहेंगी । झारखंड की जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ न पड़े, इसका भी बजट पर ध्यान दिया गया है। राज्य सरकार ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, मंईया सम्मान योजना और शिक्षा के समुचित विकास के लिए अतिरिक्त धन प्रदान करने बजट में प्रावधान किया गया। ध्यातव्य है कि मंईया सम्मान योजना के कारण ही हेमंत सोरेन सरकार फिर से झारखंड की सत्ता में आ पाई थी । इसलिए हेमंत सोरेन सरकार ने बजट में अनुदान की राशि में किसी भी तरह का कोई कटौती नहीं की है। बल्कि अनुदान की राशि में काफी वृद्धि की गई है। जिस कारण बजट का आकार भी बड़ा हुआ है। इससे प्रतीत होता है कि आने वाले वर्षों में मंईया सम्मान योजना के तहत झारखंड की महिलाओं को सम्मान राशि मिलती रहेगी।
बजट में प्रावधान की गई राशि से झारखंड की अर्थव्यवस्था में तेजी से सुधार होगा । बजट से पूर्व वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने यह संकेत दिया कि बजट के प्रावधानों से झारखंड के सभी वर्ग के लोगों की क्रय शक्ति बढ़ेगी। खासकर जो नीचे तबके के लोग हैं, उनकी क्रय शक्ति बढ़ाने का प्रस्ताव इस बजट में किया गया है । आगे उन्होंने कहा कि यह बजट दलितों, अल्पसंख्यकों, गरीबों और आम वर्ग को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है । वर्ष 2026 -27 में राजस्व व्यय के लिए 1 लाख 40 हजार करोड़ रुपए प्रस्तावित है । वहीं पूंजीगत व्यय के अंतर्गत 60 हजार करोड़ रुपए प्रस्तावित है। प्रस्तुत बजट के अनुसार स्वास्थ्य सेवा, राजस्व व्यय, पूंजीगत व्यय, सामान्य वर्ग एवं सामाजिक क्षेत्र में आशा जनक राशि बढ़ाई गई है। उम्मीद की जा रही है कि स्वास्थ्य विभाग में बढ़ाई गई राशि से समाज के दबे कुचले वर्ग को बहुत ही लाभ होगा। इस बजट में प्रदेश के बेरोजगार युवकों, किसानों और मध्यम वर्ग के हितों का ध्यान रखा गया है। जबकि सच्चाई यह है कि बीते पांच सालों के कार्यकाल में हेमंत सोरेन सरकार में गिनती भर नियुक्तियां ही सरकारी स्तर पर हो पाई हैं । कई सरकारी विभागों में सरकारी कर्मचारियों का घोर अभाव भाव है। जिस कारण सरकारी कार्यालयों में आम आदमियों के जमीन के दाखिल खारिज से संबंधित कार्य अटके पड़े हैं। इसलिए सरकारी स्तर पर नियुक्तियां बहुत जरूरी है। सरकारी विभागों में नियुक्तियों को लेकर भी सरकार को बजट पर कुछ अलग से प्रावधान करना चाहिए।
बजट के प्रावधानों से किसान वर्ग और ग्रामीण विकास को काफी लाभ मिलने की उम्मीद है । आज भी झारखंड प्रांत के वासी 72% गांवों में निवास करते हैं। अगर 72% लोगों के जीवन में खुशहाली आती है, तब निश्चित तौर पर झारखंड की अर्थव्यवस्था पर इसका बहुत ही व्यापक व अनुकूल असर पड़ेगा। अगर बजट में प्रस्तावित राशि शत प्रतिशत खर्च हो जाता तो झारखंड की दशा और दिशा ही अलग होती। यह बजट समाज के सभी वर्ग के लोगों को लुभाने वाला प्रतीत होता है । हेमंत सोरेन सरकार इस बजट के माध्यम से राजनीतिक माइलेज भी लेना चाहती है।
झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार प्रस्तुत बजट के माध्यम से झारखंड की बुनियादी सुविधाओं को पूरी तरह दुरुस्त करना चाहती है । पानी, सड़क,बिजली और स्वास्थ्य पर सरकार का ध्यान आशा जनक है । राज्य सरकार देश के अन्य प्रदेशों की तरह झारखंड में भी सड़क निर्माण, हाई स्पीड कॉरिडोर, टूरिज्म के क्षेत्र में आशातीत सफलता प्राप्ति के लिए बजट में विशेष रूप से प्रावधान किया है। उम्मीद है कि इससे झारखंड की कनेक्टिविटी बढ़ेगी और टूरिज्म के विकास से लोगों की आमदनी बढ़ेगी। 2026 - 27 का प्रस्तुत बजट समाज के हर वर्ग के लोगों के विकास को ध्यान में रखकर बनाया गया है । यह बजट समाज के दबे कुचले लोगों,दलित,अभिवंचितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं और किसानों के कल्याण की दिशा में कारगार हो सकता है।
