रांची निवासी मानस दीप्त झा व उनकी टीम 'ऐरावत' की मेहनत रंग लाई : नासा में लहराया भारत का परचम
मानव-चालित-नियंत्रित मून-रोवर का सफल निर्माण टीम ऐरावत की अनोखी उपलब्धि है, जिसे 10 से 12 अप्रैल, 2026 के बीच आयोजित अंतरराष्ट्रीय-स्तर की चंद चुनिंदा टीमों के साथ 'नासा' में प्रायोगिक-प्रदर्शन-हेतु बुलाया गया।
राजधानी रांची के रातु रोड स्थित काजू बागान कॉलोनी निवासी मानस दीप्त झा व बिट्स ,पिलानी (गोवा कैम्पस) की टीम 'ऐरावत' (कुल-10 सदस्य) के इंजीनियरिंग के छात्रों का चयन 'नासा ह्यूमन एक्सप्लोरेशन रोवर चैलेंज (एचईआरसी), 2026 के लिए हुआ। विदित हो कि मानव-चालित-नियंत्रित मून-रोवर का सफल निर्माण टीम ऐरावत की अनोखी उपलब्धि है, जिसे 10 से 12 अप्रैल, 2026 के बीच आयोजित अंतरराष्ट्रीय-स्तर की चंद चुनिंदा टीमों के साथ 'नासा' में प्रायोगिक-प्रदर्शन-हेतु बुलाया गया। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य (भू-राजनीतिक अस्थिरता) के इस दौर में 'मून-रोवर' को साथ लेकर सीमित समय में 'नासा' पहुंचना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, जो अंततः सफल हुआ। 'ऐरावत'-टीम ने इतिहास रचा और 'नासा' में तिरंगा लहराकर भारतीय अस्मिता को अक्षुण्ण रखा। 'मानस-दीप्त और उसकी ऐरावत-टीम' की यह उपलब्धि सभी भारतवासियों के लिए गर्व की बात है। ग़ौरतलब है कि मानस की मां 'सुषमा झा' डीएवी स्कूल, रांची में अध्यापिका और कवयित्री हैं। पिता मनोज कुमार झा भारतीय जीवन बीमा निगम में विकास अधिकारी और कवि व लेखक हैं। मानस व उनकी टीम की इस उपलब्धि पर उनके परिजनों, रिश्तेदारों व शुभचिंतकों ने बधाई दी है। उक्त जानकारी काजू बागान कॉलोनी (वेस्ट एंड पार्क) निवासी सेवानिवृत्त बैंककर्मी कृष्ण मुरारी गिरि ने दी।
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