पद्मश्री भरत सिंह भारती के साथ ' नोनउर परगना ' को भी मिला सर्वोच्च सम्मान 

May 26, 2026 - 18:21
पद्मश्री भरत सिंह भारती के साथ ' नोनउर परगना ' को भी मिला सर्वोच्च सम्मान 

BHOJPUR : वर्ष 2026 के पद्मश्री पुरस्कार ग्राम नोनउर, प्रखंड अगिआंव, जिला भोजपुर बिहार के प्रसिद्ध भोजपुरी लोक गायक भरत सिंह भारती को मिलने से बिहार, भोजपुर, भोजपुरी, लोक गायिकी को तो सम्मान मिला ही लेकिन स्थानीय परगना संस्कृति को भी साथ-साथ सम्मान मिला है और इससे भोजपुर का पूरा ' नोनउर परगना ' गौरवान्वित हुआ है। 

कला क्षेत्र के इस पद्मश्री सम्मान से प्राचीन  परगना संस्कृति और व्यवस्था को इस इलाके के लोगों को याद करने का अवसर भी हासिल हुआ है। ये बातें पद्मश्री भरत सिंह भारती के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए साहित्यकार और अधिवक्ता राजेंद्र पाठक ने कहीं हैं और इस सम्मान से पूरे 'नोनउर परगना ' के लोगों का क्षेत्रीय सम्मान राष्ट्रीय स्तर पर हासिल होने पर हर्ष जताया है। 

राजेन्द्र पाठक ने जब पद्मश्री भरत सिंह भारती को मंगवार को फोन पर बधाई तो उन्होंने परगना इतिहास में अब घराना संस्कृति को जोड़ने की भी याद दिलाई और कहा कि " मुझे संगीत नोनउर घराना " के चलन को ऐतिहासिक बनाना है जो नोनउर परगना का और बड़ा सम्मान होगा।  

राजेंद्र पाठक ने याद कराया कि शाहाबाद का ' नोनउर परगना ' पुराना है और यह न सिर्फ एक भौगोलिक इलाका भर है बल्कि बोली और रहन-सहन, उत्पादन, भोजन, भजन और गायन का अगल एक विशेष क्षेत्र भी है जो इस परगने की संस्कृति है। यहां भोजपुरिया-सोनतिरिया मिश्रित बोली और संस्कृति है जो मुख्यतः सोन नद के समीपता के साथ है। 

राजेन्द्र पाठक ने बताया कि परगना शब्द फारसी मूल का है जो  एक राजस्व इकाई के रूप में स्थापित था. एक परगना में कई मौज़ा होते रहे हैं, जो एक या अधिक गाँवों और आसपास के ग्रामीण इलाकों से मिलकर सबसे छोटी राजस्व इकाइयाँ होती थीं। नोनउर परगना का पच्छिमि क्षेत्र दनवार परगना है यह पुराना गांव रोहतास जिले में है। 

'नोनउर परगना' मुख्य रूप से मुग़ल काल में स्थापित एक प्रशासनिक इकाई थी जो तहसील या ज़िले के समकक्ष थी । मसलन ऐतिहासिक रूप से बंगाल के उत्तर व दक्षिण 24 परगना और झारखंड का संथाल परगना जैसे क्षेत्र। इन परगनों की इलाकाई संस्कृति स्थानीय और क्षेत्रीय लोक परंपराओं का एक अद्भुत मिश्रण होता है | परगना व्यवस्था राजकाज में जहां कर या राजस्व संग्रह से जुडी थी वहीं संस्कृति के प्रमुख पहलुओं  लोक कला और संगीत और भाषा रहन सहन उसकी पहचान थी।

पद्मश्री भरत सिंह भारती का नोनउर परगना अब संगीत संस्कृति में नोनउर घराना बनकर एक महती सम्मान हासिल करेगा यह आज की तारीख में साबित होता दिख रहा है। राजेंद्र पाठक ने बताया कि इस बड़ी खुशखबरी से पूरे शाहबाद संस्कृति के लोग हर्षोल्लास में हैं और भोजपुर जिले का नोनउर परगना और नोनउर घराना की इस नई-पुरानी ताजी जुगलबंदी भोजपुर की संस्कृति का सम्मान-शिखर बन गया है।

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