Malmas 2026 : इस दिन से शुरू होगा मलमास, जानें क्या करें और किन शुभ कार्यों से रखें दूरी
इस वर्ष अधिक मास के दौरान खास संयोग भी बन रहे हैं। सामान्यतः एक महीने में एक ही पुष्य नक्षत्र आता है लेकिन इस बार दो गुरु पुष्य योग बन रहे हैं।
Malmas 2026 : हिंदू पंचांग के अनुसार जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश नहीं करते, तब उस विशेष अवधि को मलमास या अधिक मास कहा जाता है। धार्मिक दृष्टि से यह समय अत्यंत पवित्र माना जाता है लेकिन मांगलिक कार्यों के लिए इसे वर्जित रखा गया है।
कब से कब तक रहेगा मलमास
साल 2026 में अधिक मास की शुरुआत 17 मई से होगी और यह 15 जून तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद शुद्ध ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष प्रारंभ होगा, जो 29 जून तक चलेगा। ज्योतिष शास्त्र के जानकारों के अनुसार, ज्येष्ठ मास में अधिक मास का यह संयोग काफी दुर्लभ है और अगली बार ऐसा योग 2037 में देखने को मिलेगा।
विशेष ज्योतिषीय संयोग
इस वर्ष अधिक मास के दौरान खास संयोग भी बन रहे हैं। सामान्यतः एक महीने में एक ही पुष्य नक्षत्र आता है लेकिन इस बार दो गुरु पुष्य योग बन रहे हैं। एक मई के अंत में और दूसरा जून में। ये दोनों योग पूजा-पाठ, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए बेहद शुभ माने जाते हैं।
इन कार्यों से रखें दूरी
मलमास के दौरान कई मांगलिक कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है।
- विवाह जैसे शुभ संस्कार इस अवधि में नहीं किए जाते।
- गृह प्रवेश या नए घर की नींव रखना शुभ नहीं माना जाता।
- जनेऊ (उपनयन) संस्कार भी इस समय टाले जाते हैं।
- नया व्यापार या दुकान शुरू करने से आर्थिक बाधाएं आ सकती हैं।
भगवान विष्णु की पूजा का महत्व
मलमास को भगवान विष्णु की उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है। इस दौरान व्रत, दान और मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” और “विष्णवे नमः” जैसे मंत्रों का नियमित जाप मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और जीवन की परेशानियों से राहत दिलाने वाला माना जाता है।
मलमास 2026 आध्यात्मिक उन्नति और आत्मचिंतन का श्रेष्ठ अवसर है। जहां एक ओर शुभ कार्यों पर विराम लगाने की परंपरा है, वहीं दूसरी ओर भक्ति और साधना के माध्यम से जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का यह विशेष समय माना जाता है।
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