Chaitra Navratri 2026 : चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन आज, मां 'ब्रह्मचारिणी' की हो रही पूजा, इन मंत्रों का करें जाप

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से धैर्य, ज्ञान और मानसिक संतुलन की प्राप्ति होती है। भक्त मानते हैं कि उनकी पूजा से मन की एकाग्रता बढ़ती है, बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में ईमानदारी आती है। वह सुख, स्वास्थ्य और शांति का आशीर्वाद भी देती हैं।

Mar 20, 2026 - 11:42
Chaitra Navratri 2026 : चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन आज, मां 'ब्रह्मचारिणी' की हो रही पूजा, इन मंत्रों का करें जाप

 Chaitra Navratri 2026 : चैत्र नवरात्रि का आज दूसरा दिन है लिहाजा आज मां के दूसरे स्वरुप 'ब्रह्मचारिणी' की पूजा-अर्चना होती है। शास्त्रों में मां का वर्णन ऐसी देवी के रूप में किया गया है, जो साधना और तपस्या की प्रेरणा देने वाली हैं। मान्यता है कि ब्रह्मचारिणी माता की सच्चे मन से पूजा  करने से मनचाहा वरदान मिलता है। ऐसे में नवरात्रि के दूसरे दिन भक्त श्रृद्धा के साथ मां का पूजन करते हैं।

 चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन आज

 कथा के मुताबिक मां ब्रह्मचारिणी का जन्म पर्वतराज हिमालय के घर हुआ था। बचपन से ही उनका मन भगवान शिव को पाने के लिए समर्पित था। एक दिन नारद जी ने उन्हें शिव जी को पति रूप में पाने का मार्ग बताया, जिसके बाद देवी ने कठोर तपस्या करने का निश्चय किया। मां ब्रह्मचारिणी ने हजारों वर्षों तक बहुत कठिन तप किया। शुरुआत में उन्होंने केवल फल और फूल खाकर जीवन बिताया। फिर उन्होंने सौ वर्षों तक सिर्फ जमीन पर रहकर सादा भोजन किया। इसके बाद उन्होंने गर्मी, सर्दी और बारिश की परवाह किए बिना तपस्या जारी रखी।

 कहा जाता है कि कई हजार सालों तक उन्होंने केवल बिल्वपत्र खाए और भगवान शिव की भक्ति करती रहीं। बाद में उन्होंने पत्ते खाना भी छोड़ दिया और बिना भोजन और पानी के तप करने लगीं। इस कठिन तपस्या के कारण उनका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उनका तप देखकर सभी देवता, ऋषि-मुनि अत्यंत प्रभावित हुए और उन्होंने देवी को भगवान शिव को पति स्वरूप में प्राप्त करने का वरदान दिया मां की इसी कठिन तपस्या के कारण उनका नाम 'ब्रह्मचारिणी' पड़ा था।

 पूजा का महत्व

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से धैर्य, ज्ञान और मानसिक संतुलन की प्राप्ति होती है। भक्त मानते हैं कि उनकी पूजा से मन की एकाग्रता बढ़ती है, बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में ईमानदारी आती है। वह सुख, स्वास्थ्य और शांति का आशीर्वाद भी देती हैं।

इन मंत्रों से करें जाप

 ओम देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः

दधाना करपद्माभ्यामक्ष माला कमंडलु देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा

इन मंत्रों का श्रद्धा से जाप करने से शांति, संतुलन और नकारात्मकता से सुरक्षा मिलती है। इस दिन का शुभ रंग सफेद होता है, जो पवित्रता और शांति का प्रतीक है। भक्त सफेद कपड़े पहनते हैं और सफेद फूल, मिठाई और चावल अर्पित करते हैं। मां ब्रह्मचारिणी हमें अनुशासन, धैर्य और सहनशीलता का महत्व सिखाती हैं। वह याद दिलाती हैं कि असली शक्ति भीतर की शांति और भक्ति में होती है।

 

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