'मेरे इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं', हार से बौखलाई ममता बनर्जी का बड़ा हमला, EC और BJP पर लगाया 'मैच फिक्सिंग' का आरोप
ममता ने कहा कि यह चुनाव नहीं बल्कि जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों और ईवीएम की खुली लूट थी। उन्होंने तकनीकी धांधली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि वोटिंग के बाद भी ईवीएम में 80-90% चार्ज कैसे रह सकता है? यह नामुमकिन है।
NEWS DESK : पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों में मिली शिकस्त के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में हार की विस्तृत समीक्षा के लिए एक विशेष टीम गठित करने का एलान किया है। चुनाव आयोग पर भगवा पार्टी के पक्ष में काम करने और मतदाता सूची में धांधली का आरोप लगाते हुए ममता ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे अत्याचारी चुनाव था।
ममता बनर्जी ने इस्तीफे के सवाल पर कहा कि मेरे इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं। हम चुनाव हारे नहीं है। यह पूछे जाने पर कि क्या वह लोकभवन जाएंगी। इस पर ममता बनर्जी ने कहा कि हम नैतिक रूप से जीते हैं। मैं लोकभवन जाकर इस्तीफा नहीं दूंगी।
हार के बाद विपक्षी एकजुटता का संदेश देते हुए उन्होंने बताया कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और उद्धव ठाकरे समेत इंडी गठबंधन के तमाम नेताओं ने उन्हें फोन कर अपना समर्थन दिया है। ममता बनर्जी ने कहा कि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव कल छह मई को उनसे मिलने कोलकाता आएंगे, जिसके बाद गठबंधन के अन्य नेता भी बारी-बारी से मुलाकात करेंगे ताकि आगे की साझा रणनीति तैयार की जा सके।
ममता ने कहा कि यह चुनाव नहीं बल्कि जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों और ईवीएम की खुली लूट थी। उन्होंने तकनीकी धांधली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि वोटिंग के बाद भी ईवीएम में 80-90% चार्ज कैसे रह सकता है? यह नामुमकिन है। ममता ने सनसनीखेज दावा किया कि चुनाव से दो दिन पहले उनके कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया, छापेमारी की गई और निष्पक्ष आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को हटाकर भाजपा के पसंदीदा लोगों को तैनात कर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने सीधा वार करते हुए कहा कि भाजपा और चुनाव आयोग के बीच यह मैच फिक्सिंग थी। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर साजिश रचकर 90 लाख नाम वोटर लिस्ट से काटे गए और कोर्ट जाने के बाद केवल 32 लाख ही वापस जुड़े। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पर सीधा हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए ममता ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में ऐसा नीच और घिनौना खेल कभी नहीं देखा।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर हमला बोला है। ममता ने कहा कि छात्र राजनीति के दिनों से लेकर आज तक, ऐसा गंदा और घिनौना चुनाव नहीं देखा। मुख्यमंत्री ने सीधा आरोप लगाया कि यह चुनाव भाजपा के खिलाफ नहीं बल्कि पूरी सरकारी मशीनरी, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के सीधे हस्तक्षेप के खिलाफ था। ममता ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए दावा किया कि साजिश के तहत वोटर लिस्ट से 90 लाख नाम हटा दिए गए थे। जब टीएमसी कोर्ट गई, तब जाकर 32 लाख नाम बहाल हुए, लेकिन खेल यहीं खत्म नहीं हुआ।
उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में चोरी-छिपे 7 लाख अन्य नाम जोड़ दिए गए, जिसके बारे में किसी को कानोकान खबर नहीं होने दी गई। ममता ने कहा कि 2004 में जब वह अकेली थीं, तब भी उन्होंने ऐसी चुनावी डकैती और अत्याचार नहीं देखा था।
पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि हमारी लड़ाई भाजपा से नहीं बल्कि पक्षपाती चुनाव आयोग से थी। उन्होंने भाजपा पर संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी हार को सिरे से नकारते हुए भाजपा पर 'लोकतंत्र की हत्या' और 'वोटों की लूट' का सनसनीखेज आरोप लगाया है। ममता ने दहाड़ते हुए कहा कि हम इलेक्शन नहीं हारे हैं बल्कि भाजपा ने चुनाव आयोग का इस्तेमाल कर जनादेश का अपहरण किया है।
उन्होंने बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया कि वोटर लिस्ट रिवीज़न के नाम पर जानबूझकर उनके समर्थकों के लाखों वोट काट दिए गए और काउंटिंग के दौरान उनके एजेंटों को डराया-धमकाया गया। ममता ने साफ कर दिया कि पूरा इंडिया गठबंधन उनके साथ खड़ा है और वे भाजपा की इस 'वोट डकैती' के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगी बल्कि इस धांधली को अदालत में चुनौती देकर आर-पार की लड़ाई लड़ेंगी।
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