Masik Shivratri 2026 : मई में कब है मासिक शिवरात्रि? जानें सही तारीख, बन रहे 3 शुभ योग, जानिए व्रत-पूजा का सही समय

इस बार निशिता काल पूजा का शुभ समय रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। मान्यता है कि इस दौरान भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

May 9, 2026 - 18:21
Masik Shivratri 2026 : मई में कब है मासिक शिवरात्रि? जानें सही तारीख, बन रहे 3 शुभ योग, जानिए व्रत-पूजा का सही समय

NEWS DESK : मई 2026 की मासिक शिवरात्रि इस बार बेहद खास मानी जा रही है। ज्येष्ठ मास में पड़ने वाली इस शिवरात्रि पर कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जिससे भगवान शिव की पूजा और व्रत का महत्व और बढ़ गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शिव आराधना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 मई 2026 को सुबह 8 बजकर 31 मिनट से शुरू होगी और 16 मई को सुबह 5 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। निशिता काल को ध्यान में रखते हुए मासिक शिवरात्रि का व्रत और पूजा 15 मई, शुक्रवार को की जाएगी।

इस बार निशिता काल पूजा का शुभ समय रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। मान्यता है कि इस दौरान भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:07 बजे से 4:49 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2:33 बजे से 3:28 बजे तक रहेगा।

इस मासिक शिवरात्रि पर तीन विशेष शुभ योग भी बन रहे हैं। सुबह से आयुष्मान योग प्रभावी रहेगा, जो दोपहर 2:21 बजे तक रहेगा। इसके बाद सौभाग्य योग शुरू होगा। वहीं सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 5:30 बजे से रात 8:14 बजे तक रहेगा। ज्योतिष मान्यताओं के मुताबिक इन योगों में भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेक और मंत्र जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

भद्रा का प्रभाव भी इस दिन रहेगा। भद्रा सुबह 8:31 बजे से शुरू होकर शाम 6:54 बजे तक रहेगी। हालांकि धार्मिक मान्यताओं में शिव पूजा के दौरान भद्रा और राहुकाल को बाधक नहीं माना गया है। इस दिन राहुकाल सुबह 10:36 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक रहेगा।

मासिक शिवरात्रि के दिन भक्त शिवलिंग पर गंगाजल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन Mahamrityunjaya Mantra का जाप करने और रुद्राभिषेक कराने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

डिस्क्लेमर : यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है।

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