अल्पवृष्टि से निपटने को झारखण्ड तैयार, खरीफ कर्मशाला में बनी 10 साल की रणनीति, किसानों के लिए एक्शन मोड में कृषि विभाग

कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को समय पर बीज उपलब्ध हो इसको लेकर भी विभाग गंभीर है. उन्होंने कहा कि सभी जिलों और प्रखंड स्तर पर भी किसानों के साथ बैठक और खरीफ मेला का आयोजन होगा

May 12, 2026 - 17:20
अल्पवृष्टि से निपटने को झारखण्ड तैयार, खरीफ कर्मशाला में बनी 10 साल की रणनीति, किसानों के लिए एक्शन मोड में कृषि विभाग

RANCHI : कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की ओर से बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय खरीफ कर्मशाला का मंगलवार को समापन हो गया. इस खरीफ कर्मशाला में इस वर्ष संभावित अल्पवृष्टि की स्थिति से निपटने की रणनीति बनाई गई. 

इस मौके पर कृषि मंत्री ने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए विभाग पूरी तरह तैयार है. खरीफ कर्मशाला के समापन समारोह में मौजूद सूबे की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि अलीनो इफेक्ट की वजह से इस वर्ष कम बारिश का अनुमान है. उन्होंने कहा कि आने वाला मौसम काफी चुनौतीपूर्ण है और राज्य के सीमांत किसान भी इससे प्रभावित होंगे.

कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को समय पर बीज उपलब्ध हो इसको लेकर भी विभाग गंभीर है. उन्होंने कहा कि सभी जिलों और प्रखंड स्तर पर भी किसानों के साथ बैठक और खरीफ मेला का आयोजन होगा ताकि इस कर्मशाला में आए विचारों से किसानों को अवगत कराया जा सके.

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में कर्मशाला के पहले दिन जिला कृषि पदाधिकारियों ने खरीफ को लेकर तैयारी का ब्योरा दिया जबकि आज आखिरी दिन पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन और वृत्तचित्र के जरिए किसानों को अलग-अलग भूमि के लिए उपयोगी फसल की किस्म और कम बारिश में अच्छी पैदावार के लिए टिप्स दिए गए. कुछ अधिकारियों की अनुपस्थिति पर मंत्री ने नाराजगी भी जाहिर की.

खरीफ कर्मशाला में मौजूद बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति एस.सी दूबे ने कहा कि इस दो दिनों की कर्मशाला में अल्पवृष्टि की स्थिति से किसानों को कैसे निपटना है, उसकी पूरी रुपरेखा तैयार हो गई है. उन्होंने कहा कि यह कार्य योजना अगले 10 वर्षो के लिए है. समय और परिस्थिति के अनुसार थोड़ी बहुत फेरबदल करने की जरुरत है.

कार्यक्रम के दौरान खरीफ कर्मशाला की पुस्तिका का विमोचन भी किया गया. उम्मीद जतायी जा रही है कि राज्य के कृषि विभाग से जुड़े पदाधिकारियों से लेकर जानकार क़ृषि वैज्ञानिकों का एक मंच पर आकर दो दिनों तक चला यह मंथन अलीनो इफेक्ट से राज्य की कृषि और किसानों पर प्रभाव को काफी हद तक कम करेगा और खरीफ फसल के मौसम मे किसान निराश नहीं होंगे.

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