असम विधानसभा में UCC पास, समान नागरिक संहिता अपनाने वाला बना तीसरा राज्य
NEWS DESK : असम विधानसभा ने बुधवार को समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026 को पारित कर दिया। इसके साथ ही असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद UCC अपनाने वाला देश का तीसरा राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि यह बीजेपी के चुनावी वादों में शामिल था और सरकार ने पहले ही विधानसभा सत्र में इसे पूरा कर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब इस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उन्होंने दावा किया कि समान नागरिक संहिता संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना पर आधारित है और इसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानून सुनिश्चित करना है।
‘समान नागरिक संहिता, असम, 2026 विधेयक’ पर चर्चा के दौरान सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित कानून विपक्ष के बीजेपी या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा पर नहीं बल्कि संविधान के अनुच्छेद 44 की नींव पर आधारित है। हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि समान नागरिक संहिता का लंबा इतिहास है। इसकी मांग सबसे पहले कांग्रेस ने 1925 में की थी। 1937 में जवाहरलाल नेहरू ने भी इसका सुझाव दिया था। वहीं, कांग्रेस आज इसका विरोध कुरान और शरीयत के नजरिए से कर रही है, न कि हिंदू, ईसाई या आदिवासी दृष्टिकोण से।
असम विधानसभा में बुधवार को विपक्षी सदस्यों ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर लाए गए विधेयक को बीजेपी का राजनीतिक एजेंडा बताया। विपक्ष ने प्रस्तावित कानून को पारित करने से पहले सभी हितधारकों से व्यापक परामर्श की मांग की। चर्चा के दौरान विपक्षी विधायकों ने कहा कि यह समाज के एक विशेष वर्ग के अधिकारों को नुकसान पहुंचा सकता है।
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