जलाशयों में महाझींगा पालन आदिम जनजातियों  की समृद्धि में सहायक : अमरेन्द्र कुमार 

मत्स्य निदेशालय की पहल : महा झींगा बीज संचयन कार्यक्रम आयोजित 

Mar 28, 2026 - 18:43
जलाशयों में महाझींगा पालन आदिम जनजातियों  की समृद्धि में सहायक : अमरेन्द्र कुमार 

झारखंड के जलाशयों में महा झींगा पालन से आदिवासी समुदाय, खासकर आदिम जनजातियों की आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार हो रहा है। महा झींगा पालन आदिम जनजातियों के लिए रोजगार सृजन में भी सहायक है। उक्त बातें झारखंड सरकार के मत्स्य निदेशालय के निदेशक अमरेन्द्र कुमार ने कही। 


 उन्होंने कहा  कि वर्तमान में झारखंड के तीन छोटे जलाशयों में महाझींगा पालन किया जा रहा है। हजारीबाग के घाघरा  जलाशय, सिमडेगा के केलाघाघ जलाशय और गुमला के मसारिया जलाशय में महाझींगा पालन से आदिवासी समुदाय, खासकर आदिम जनजातियों की आजीविका में अपेक्षित सुधार हो रहा है। 
गौरतलब है कि झारखंड सरकार के कृषि,पशुपालन,सहकारिता व मत्स्य विभाग की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के निर्देशानुसार उनके मार्गदर्शन में  राज्य के जलाशयों में झींगा पालन के माध्यम से आदिम जनजातियों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में मत्स्य निदेशालय द्वारा उल्लेखनीय कार्य किया जा रहे हैं। झारखंड में इस योजना को आईसीएआर,सीआईएफआरआई, बैरकपुर (कोलकाता) द्वारा प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एके दास की देखरेख में संचालित किया जा रहा है।


 इस संबंध में निदेशक अमरेंद्र कुमार ने बताया कि जलाशयों में महाझींगा पालन से  आदिवासियों की आर्थिक समृद्धि बढ़ रही है। इससे उनकी जीवन शैली में भी सुधार हुआ है। झींगा पालन आदिम जनजातियों की जीविका का एक सशक्त साधन बन रहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार के मत्स्य निदेशालय की यह योजना अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण बन गया है। छोटे-छोटे जलाशयों में महाझींगा पालन से मत्स्य कृषक अपने जीवनस्तर में सुधार ला सकते हैं। 
राज्य के तीन जलाशयों में महाझींगा पालन के बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए सभी जिलों के डीएफओ (जिला मत्स्य पदाधिकारी) ने   भी विभाग से  अन्य छोटे-छोटे जलाशयों में महाझींगा पालन करने में अभिरुचि दिखाई है। 
 राज्य के अन्य छह नए जलाशयों बचरा, लातेहार, करंजी, नौरंगा जलाशय, (रांची),नंदनी (लोहरदगा), धनसिंह जलाशय (गुमला) और बांकीबेरा जलाशय (दुमका) में महाझींगा पालन का कार्य किया जा रहा है।

महा झींगा बीज संचयन 

निदेशक (मत्स्य) के मुताबिक घाघरा जलाशय में 22 मार्च 2026 को 2,25,750, 23 मार्च को केलाघाघ सिमडेगा में 4,23,400, 24 मार्च को बचरा जलाशय लातेहार में 2,14,400, 25 मार्च को नौरंगा जलाशय में 2,52,000 तथा करंजी जलाशय, रांची में 2,23,200, 26 मार्च को नंदनी जलाशय लोहरदगा में 2,40500, 27 मार्च को मसरिया जलाशय गुमला में 2,44,180, 28 मार्च को धनसिंह जलाशय गुमला 2,53,725 पीस महाझींगा बीज का संचयन किया गया है।
 वहीं,30 मार्च 2026 को बांकीबेरा जलाशय (दुमका) में दो लाख महाझींगा बीज का संचयन होना है।
 इसके साथ ही विभाग द्वारा जलाशयों के किसानों के लिए महाझींगा पालन हेतु महाझींगा आहार ,मिनरल और जियोलाइट भी उपलब्ध कराया जाता है।
  महाझींगा बीज संचयन में सिफरी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एके दास, सहायक मत्स्य निदेशक गीतांजलि कुमारी, जिला मत्स्य पदाधिकारी रांची,जिला मत्स्य पदाधिकारी लातेहार,मत्स्य प्रसार पदाधिकारी प्रवीण किस्पोट्टा हजारीबाग, मत्स्य प्रसार पदाधिकारी पारस नाथ महतो तथा जलाशय समिति के कृषक  उपस्थित रहे।
 उक्त जानकारी मत्स्य निदेशालय के मुख्य अनुदेशक प्रशांत कुमार दीपक ने दी।

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