तेलंगाना में कमजोर पड़ा माओवादी नेटवर्क, 2 साल में 820 नक्सलियों ने किया सरेंडर, डीजीपी ने की समीक्षा
HYDERABAD : तेलंगाना के डीजीपी सीवी आनंद ने राज्य में माओवादी स्थिति की समीक्षा की और सुरक्षा चिंताओं से निपटने के लिए एसआईबी (विशेष खुफिया शाखा) के चलाए जा रहे उग्रवाद-विरोधी अभियानों तथा खुफिया उपायों का आकलन किया।
पुलिस मुख्यालय ने एक बयान जारी कर बताया कि डीजीपी आनंद ने विशेष खुफिया शाखा (एसआईबी) के हैदराबाद स्थित मुख्यालय का दौरा किया और अतिरिक्त डीजीपी (खुफिया) विजय कुमार तथा आईजीपी इंटेलिजेंस एवं एसआईबी कार्तिकेय सहित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बातचीत की।
इस दौरान डीजीपी ने वामपंथी उग्रवाद का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने और भूमिगत भाकपा (माओवादी) कैडरों के बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण को सुगम बनाने में इसके अधिकारियों और कर्मचारियों के निरंतर प्रयासों की सराहना की।
अतिरिक्त डीजीपी (खुफिया) विजय कुमार ने जानकारी दी कि 2024 और 2026 के बीच कुल 820 माओवादियों ने तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया, जिनमें चार केंद्रीय समिति सदस्य और 22 राज्य समिति सदस्य शामिल हैं। इन आत्मसमर्पण करने वाले भाकपा (माओवादी) कैडरों ने 334 आग्नेयास्त्र भी पुलिस को सौंपे, जिनमें 58 एके-47 राइफल, 48 इंसास राइफल, 50 एसएलआर, 6 एलएमजी और अन्य अत्याधुनिक हथियार जमा किए।
डीजीपी ने निरंतर खुफिया-आधारित अभियानों, विश्वास बहाली के उपायों और पुनर्वास पहलों के माध्यम से तेलंगाना में सशस्त्र माओवादी आंदोलन को प्रभावी ढंग से कमजोर करने में एसआईबी प्रमुख सीनियर आईपीएस अधिकारी विजय कुमार के उल्लेखनीय योगदान की भी सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से भूमिगत माओवादी कैडरों को हिंसा छोड़ने और मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रेरित करने में एसआईबी की सक्रिय भूमिका की प्रशंसा की। पिछले महीने ही तेलंगाना को नक्सली मुक्त प्रदेश घोषित किया गया था।
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