निष्पक्ष होकर योग्य उम्मीदवार के चयन में महती भूमिका अदा करें
(23 फरवरी, नगर निगम व नगर परिषद चुनाव पर विशेष)
23 फरवरी 2026 को झारखंड प्रांत के चौबीसों जिलों के नगर निगम, नगर परिषद व नगर पंचायतों का चुनाव है। इस प्रांत के रहने वाले हम सभी मतदाताओं का नैतिक कर्तव्य है कि निष्पक्ष होकर योग्य उम्मीदवार के चयन में महती का अदा करें। आप सभी जानते हैं कि मतदान का अधिकार भारत के संविधान में मिले सभी अधिकारों में सबसे ऊपर की श्रेणी में आता है। लोकतंत्र में मतदान का अधिकार को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। आपका एक मत किसी एक उम्मीदवार को विजयी बना सकता है। वहीं आपके एक मत नहीं देने से एक दूसरे उम्मीदवार को पराजित भी कर सकता है । इसलिए हर मतदाता को अपने-अपने मत का पूरी निष्ठा के साथ प्रयोग करना चाहिए। बहुत सारे मतदाताओं का यह तर्क है कि मतदान करने से खुद को क्या लाभ है ? अगर आपका यह तर्क है तो इस तर्क पर गंभीरता पूर्वक पुनर्विचार करने की जरूरत है । आप मतदान न सिर्फ अपने लिए करते हैं बल्कि समाज, प्रांत और देश के सर्वांगीण विकास के लिए करते हैं। अगर आप इस मतदान को निरर्थक समझते हैं, तो ऐसा सोचना बंद करें।
हम सबों को यह जानना चाहिए कि देश की आजादी के बाद 1952 में पहला लोकसभा का चुनाव हुआ था। देश की जनता ने पहली बार अपने मत से देश के सांसदों को चुना था। आजादी के 78 वर्ष हो चुके हैं। लेकिन मतदान के प्रतिशत में जितनी वृद्धि की अपेक्षा की गई, नहीं हो पा रही है।जबकि चुनाव आयोग द्वारा मतदान की वृद्धि के राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रूप से प्रचार प्रसार किया जा रहा है, लेकिन बहुत मामूली वृद्धि हो पाई है । यह बेहद चिंता की बात है। परिणाम स्वरूप ऐसे बहुत सारे उम्मीदवार जात-पात और धर्म के नाम पर विजयी हो जा रहे हैं। अगर मतदान का 90 प्रतिशत के लगभग हो, तो उम्मीद है कि जात - पात और धर्म का सहारा लेकर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार उतनी संख्या में चुनाव जीत नहीं पाएगें।
झारखंड नगर पालिका का इतिहास सौ साल से भी पुराना है। मैं सिर्फ देश की आजादी के बाद झारखंड नगर पालिका/ नगर निगम और नगर पंचायतों के संपन्न हुए चुनावों पर अपनी बातों को दर्ज कर रहा हूं। इन चुनावों में अब तक मतदान का प्रतिशत 67 प्रतिशत से अधिक नहीं बढ़ पाया । मतदान का प्रतिशत इतना काम होने पर हम सब योग्य उम्मीदवार को नगर पालिका/नगर परिषद और पंचायतों में कैसे भेज सकते हैं ? हम सबों को यह संकल्प लेने की जरूरत है कि मतदान करने के बाद ही कोई अन्य काम को करें। सबसे पहले मतदान उसके बाद जलपान। इस संकल्प के साथ मतदान करने की जरूरत है। तभी हम सभी अपने नगर निगम/ नगर परिषद और नगर पंचायतों को एक योग्य उम्मीदवार दे सकते हैं। अन्यथा बीते चुनावों का जो परिणाम हम लोग के सामने है, आने वाले भविष्य में भी वही परिणाम देखने को मिलेगा।
लंबे संघर्ष के बाद भारत एक संप्रभुता संपन्न लोकतांत्रिक देश के रूप में प्रतिष्ठित हो पाया था। तब समाज का अंतिम व्यक्ति भी अपने मनपसंद के उम्मीदवार को लोकसभा, विधानसभा, नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में चुन कर भेज पाया। यह कोई मामूली बात नहीं थी बल्कि एक नये युग में प्रवेश और नया इतिहास गढ़ने की बात समाहित थी। तब हमारा भारत एक आजाद देश बन पाया था। भारत वर्ष पर लंबे समय तक ब्रिटिश हुकूमत का शासन रहा था। उसके पूर्व मुगलों का भी शासन लंबे समय तक रहा था। उससे पूर्व विभिन्न खंडों में विभक्त देशी राजाओं का राजतांत्रिक शासन रहा था । अर्थात ढाई हजार से अधिक वर्षों तक भारत की जनता को लोकतांत्रिक तरीके से अपने देश के प्रमुखों को चुनने का अधिकार नहीं था । राजतांत्रिक व्यवस्था में जनता को अपने देश के संचालक प्रमुख को चुनने का अधिकार था बल्कि वंशानुगत तरीके से राजा के पुत्र को सत्ता की बागडोर सौंप दी जाती थी। विचारणीय यह है कि देश के हर मतदाता को जो आज मतदान का अधिकार प्राप्त है, वह बीते ढाई सौ वर्षो के संघर्ष और राजनीतिक बदलाव का प्रतिफल है । जो मतदाता, मतदान को बहुत जरूरी नहीं समझते हैं, उन्हें भारतवर्ष के इतिहास को जरूर पढ़ना चाहिए। तब शायद उनकी दृष्टि बदल जाए और मतदान के महत्व को समझ पाएं। मतदान के दिन समय पर मतदान कर एक सच्चे मतदाता होने का परिचय दें । यह मतदान भारत के संविधान के प्रति सच्ची निष्ठा भी होगी।
झारखंड प्रांत के चौबीस जिलों राज्य में कुल नौ नगर निगम, बीस नगर परिषद और उन्नीस नगर पंचायतों के लिए चुनाव हो रहे हैं। इन निकायों में मेयर और अध्यक्ष के अलावा कुल एक हजार सत्तासी वार्डों में काउंसिलर के लिए मतदान होगा। अर्थात 23 फरवरी को होने वाले चुनाव में 6288 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इन प्रत्याशियों में कुछ ही प्रत्याशी जीतकर वार्ड काउंसलर, नगर परिषद, मेयर आदि बनेंगे । अगर ये योग्य उम्मीदवार नहीं होंगे, तब समझ लीजिए जिस में प्रांत वासी परिवेश रहते हैं, उसकी स्थिति क्या हो जाएगी ? इसलिए पूरी सूझबूझ के साथ अपना मतदान करें। मतदान आपके लिए कोई घर जरूरी नहीं बल्कि बहुत ही जरूरी कार्य है। इस कार्य को समय से करें । लोकतांत्रिक प्रक्रिया का तक़ाज़ा यह है कि राजभर में हो रहे नगर निगम व नगर परिषद के चुनाव में अड़तीस वार्डों में वार्ड पार्षद पद के लिए निर्विरोध निर्वाचन हो चुका है। केवल एक प्रत्याशी के मैदान में रहने के कारण उन्हें निर्वाची पदाधिकारियों की ओर से निर्वाचित घोषित किया गया। सर्वविदित यह है कि नामांकन और छंटनी की प्रक्रिया के बाद कुल 6,288 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। महापौर और अध्यक्ष पद के लिए 560 तथा वार्ड पार्षद पद के लिए 5,728 उम्मीदवार अंतिम सूची में शामिल हैं।
प्रांत के हर एक मतदाताओं को यह जानना चाहिए कि राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदान की सभी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। शनिवार से ही कई जिलों में पोलिंग पार्टियां अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना होनी शुरू हो गईं, जबकि कुछ स्थानों पर मतदान कर्मी रविवार को प्रस्थान करेंगे। मतदान बैलेट पेपर के जरिए होगा और इस बार मतदाताओं को नोटा का विकल्प उपलब्ध नहीं रहेगा। यानी मतदाता को चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों में से किसी एक को ही वोट देना होगा। चूंकि मतदान बैलट पेपर के माध्यम से हो रहा है। इसमें स्याही का प्रयोग होता है। इसलिए मतदान पत्र को कैसे मोड़ जाए ? इसकी जानकारी भी हर एक मतदाताओं को होनी चाहिए अन्यथा थोड़ी सी असावधानी से आपका मतदान पत्र रद्द कर दिया जाएगा । इसलिए मतदाताओं को मतदान करने से संबंधित पोलिंग अधिकारियों से इसकी जानकारी जरूर कर लेनी चाहिए। चुनाव आयोग ने पोलिंग अधिकारियों को हर एक मतदाता को इसकी जानकारी देने का आदेश निर्गत किया है। मतदान के दिन संबंधित क्षेत्रों में ड्राई-डे लागू रहेगा। शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। जिला निर्वाचन अधिकारियों को हर दो घंटे पर राज्य निर्वाचन आयोग को स्थिति रिपोर्ट भेजनी होगी, ताकि किसी भी अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। इस बार के नगर निकाय चुनाव कई मायनों में अहम माने जा रहे हैं। अगर आपको मतदान करने के दौरान कोई गड़बड़ी दिखे तो संबंधित पोलिंग अधिकारियों व कर्मचारियोंको जरूर सूचित करें। ताकि मतदान प्रक्रिया पूरी तरह स्वच्छ तरीके से संपन्न हो सके । इसके साथ ही हर एक मतदाता को यह ध्यान देने की जरूरत है कि मतदान निष्पक्ष ढंग से करें। परिवारवाद, जात पात और धर्म वाद से मुक्त होकर मतदान करें। एक ऐसे उम्मीदवार का चयन करें जो नगर निगम,नगर परिषद और नगर पंचायत की जबाबदेही पूरी निष्ठा के साथ निभा पाए।
