तिहार जेल नंबर 3 में चारों दोषियों को फांसी देने की तैयारी

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नई दिल्ली : तिहाड़ जेल नंबर 3 में चारों दोषियों को फांसी देने की तैयारी जारी है, बावजूद इसके कि निर्भया के 4 दोषियों में से दो की क्यूरेटिव पिटिशन पर सुप्रीम कोर्ट 14 जनवरी को सुनवाई करेगा. सूत्रों की माने तो दोषियों को 22 जनवरी की सुबह 7:00 बजे फांसी के फंदे पर लटका दिया जाएगा. इधर शनिवार को तिहाड़ जेल में डमी को फांसी देकर पूरी प्रक्रिया को परखने से पहले चारों दोषियों के गले की नाप ली गई. गले की साइज के हिसाब से ही जेल प्रशासन फंदा तैयार करता है. इस दौरान चारों दोषियों की लंबाई मापी गई और वजन भी लिया गया. साइज के हिसाब से जेल प्रशासन फांसी का फंदा तैयार करेगा.
पूरी प्रक्रिया के दौरान चारों गुनाहगार फूट-फूट कर रोते रहे. उन्हें अपने सामने मौत नजर आ रही थी. मौके पर मौजूद जेल कर्मियों ने उन्हें किसी तरह शांत कराया.
सूत्रों के मुताबिक गले का नाप लेने के दौरान काफी सतर्कता बरती गई. फंदे का नाप बाएं कान के नीचे जबड़े के पास से लिया गया. दरअसल गांठ वहीं से शुरू होती है. इसे तैयार करने में वजन का भी ध्यान रखा जाता है. ज्यादा वजन वाले गुनाहगार के फंदे के लिए ज्यादा गांठें लगाई जाती है जबकि कम वजन वाले के लिए कम. एक फंदे में अमूमन 3 से 5 गांठ होती है.
फांसी घर में दोषियों को फांसी देने की तैयारी चल रही है. दोषियों के वजन से करीब डेढ़ गुना ज्यादा वजन के रेत की डमी को फंदे पर लटका कर देखा जा रहा है. वजन और लंबाई के अनुसार डमी को 1.83 मीटर से 2.44 मीटर तक लटका कर देखा जा रहा है. हर दोषी के लिए दो फंदे अतिरिक्त है. हर फांसी के समय ने फंदों का ही इस्तेमाल किया जाता है.
कुएं की गहराई 15 फीट होती है.
जेल अधिकारियों के मुताबिक दोषियों के वजन के हिसाब से फंदे की लंबाई तय होती है. 45 किलो वजन वाले दोषी के फंदे की लंबाई करीब 8 फीट जबकि 90 या उससे ज्यादा वजन वालों के लिए 6 फीट होती है. फांसी के तख्ते के नीचे कुएं की गहराई करीब 15 फीट है. लीवर खींचते ही तख्ता खुल जाता है और फंदे पर लटकाए गए दोषी का आधा शरीर कुए के अंदर चला जाता है. करीब आधे घंटे में उसकी मौत हो जाती है.

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