देश के विकास में उत्पादन की महती भूमिका होती है
(12 फरवरी, राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस पर विशेष)
देश के विकास में उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। खासकर भारत जैसे विकासशील देश के लिए उत्पादन का महत्व और भी बढ़ जाता है। चूंकि भारत, बीते दो दशकों में दुनिया भर के देशों के सामने यह साबित में सफल रहा है कि यह देश सबसे तेज आर्थिक गति के दर से आगे बढ़ रहा है। जबकि बीते दो दशकों के दरमियान दुनिया में तीन बार वैश्विक आर्थिक मंदी का दौर आया । इसके साथ ही कोरोना जैसी वैश्विक महामारी ने दस्तक दी थी। भारत इन वैश्विक दुश्वारियों और चुनौतियों मुकाबला बहुत ही साहस और धैर्य के साथ किया। ऐसा नहीं कि इन वैश्विक दुश्वारियां और चुनौतियों ने भारत को नुकसान नहीं पहुंचाया, लेकिन भारत में इसका असर सबसे कम पड़ा। इसके बावजूद भारत का आर्थिक विकास दर ऊंचे सूचांक पर ही बना रहा। इसका सबसे बड़ा श्रेय देश के तमाम छोटे - बड़े उत्पादन कर्ताओं को जाता है। जिन सबों ने कड़ी मेहनत कर देश के उत्पादन को गिरने नहीं दिया। उत्पादन के सूचांक को और भी बढ़ाया। जिसके परिणाम स्वरूप देश का विकास दर आगे बढ़ा। देश की जीडीपी आगे बढ़ी। भारत एक ऊंचे आर्थिक मुकाम को प्राप्त कर पाया है। इस आर्थिक विकास की रफ्तार को उत्पादन ही गति प्रदान कर सकता है। चूंकि देश की सरकार 2047 तक भारत को एक विकसित देश के रूप में तब्दील करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है्। ऐसे में राष्ट्रीय उत्पादकता का महत्व और भी बढ़ जाता है। अगर भारत का यही आर्थिक विकास रफ्तार रहा तो निश्चित तौर पर भारत का यह सपना पूरा होगा।
1992 में जब देश में उदारीकरण का दौर आया तब कुछ अर्थ शास्त्रियों को आशंका थी कि इससे भारत का भला होने वाला नहीं है । लेकिन देश के उद्यमियों, उत्पादनकर्ताओं और निजी क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों ने उदारीकरण को एक अवसर में बदल दिया । वहीं दूसरी ओर विश्व के कई देश इस वैश्विक उदारीकरण को अवसर में नहीं बदल पाए। बल्कि कई देशों के विकास आर्थिक विकास दर काफी नीचे सूचांक तक पहुँच गए। बात यहीं रूकती न हीं हैं। कई देश तो दीवालिया हालात तक पहुंच गए। हम सबों को यह जानना चाहिए कि देश की आज़ादी के बाद जब-जब देश के समक्ष आर्थिक चुनौतियां उत्पन्न हुई, तब तब देश के कृषकों, उद्यमियों, खरीद उत्पादन कर्ताओं, इंजीनियर, छोटे और बड़े स्तर के सभी व्यवसाइयों ने भरपूर सहयोग दिया, जिसका परिणाम यह हुआ कि देश का आर्थिक दर बना रहा।
देश का आर्थिक विकास दर बना रहे। इस दिशा में देशव्यापी जागरूकता बहुत जरूरी है। देश के अंदर छोटी बड़ी गाड़ियं बनाने से लेकर छोटे-छोटे उत्पादन कर्ताओं की अहम भूमिका होती है। इसके साथ ही व्यावसायिक क्षेत्र में छोटे-छोटे व्यवसायियों की भी अहम भूमिका होती है। चूंकि भारत विश्व का सबसे बड़ा खुदरा बाजार है । विश्व के तमाम देश की निगाहें भारत के खुदरा बाजार पर रहती हैं। अगर देश का उत्पादन बढ़िया रहता है, तो देश की चीजें देश में ही खपत होगी। इसका लाभ देश को ही प्राप्त होगा । यह लाभांश राष्ट्रीय आय की श्रेणी में आएगा। अगर देश के बाजार में अन्य देशों के सामानों की ज्यादा बिक्री होगी, तो इससे देश का राष्ट्रीय लाभांश का बहुत स हिस्सा विदेशों में चला जाएगा । इसलिए देश का उत्पादन किसी भी स्तर पर काम नहीं होना चाहिए। इसलिए भारत सरकार ने हर वर्ष 12 फरवरी को राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस मनाने का निर्णय ली थी। इस निमित्त भारत सरकार ने राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद की स्थापना की थी। जिसे राष्ट्रीय उत्पादकतादिवस के रूप में भी जाना जाता है। इस दिवस के आयोजन के पीछे सरकार की मंशा है कि देश की उत्पादकता, दक्षता और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा मिले। यह दिन भारत की राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद की स्थापना दिवस का भी स्मरण किया जाता है।
भारत सरकार राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस को राष्ट्रीय उत्पादकता सप्ताह के रूप में भी मनाती चली आ रही है । यह सप्ताह 12 से 18 फरवरी तक प्रतिवर्ष मनाया जाता है। इसका आयोजन भारत के एनपीसी द्वारा आयोजित किया जाता है। भारत सरकार यह आयोजन नई दिल्ली स्थित दिल्ली उत्पादकता परिषद के साथ मिलकर करती है। इस दिन इस बारे में जागरूकता बढ़ाता है कि उत्पादकता केवल उत्पादन बढ़ाने से कहीं अधिक है, यह एक व्यापक अवधारणा है जो पर्यावरणीय समस्याओं, मानव संसाधन विकास और काम की गुणवत्ता पर विचार करती है। यह एक प्रतिस्पर्धी और संपन्न अर्थव्यवस्था के निर्माण में नवाचार, कुशल प्रथाओं और बौद्धिक संपदा संरक्षण की भूमिका पर जोर देता है।
राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस 2026 की थीम 'विचारों से प्रभाव तक : प्रतिस्पर्धी स्टार्टअप के लिए बौद्धिक संपदा की सुरक्षा' है। यह थीम नवाचारों की सुरक्षा और स्टार्टअप के लिए प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को बढ़ावा देने में बौद्धिक संपदा की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देती है, यह सुनिश्चित करती है कि उनके रचनात्मक विचार प्रभावशाली व्यावसायिक समाधान और लंबे समय तक सफलता की ओर ले जाएं।
राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद, भारत के व्यापार और उद्योग मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संगठन है। 1958 में स्थापित, एनपीसी का उद्देश्य उद्योगों, कृषि और सेवाओं में उत्पादकता जागरूकता और सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देना था। उत्पादकता सप्ताह के साथ-साथ राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस की शुरुआत लोगों और संगठनों को नवाचार, दक्षता और प्रौद्योगिकी के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने पर चर्चा में शामिल करने के लिए की गई थी। यह दिन भारत जैसे विकासशील देश में बहुत अहम है, जहां उद्यमिता और स्टार्टअप बढ़ रहे हैं। साथ ही, यह संगठनों और सरकारों को आर्थिक विकास, प्रतिस्पर्धी उद्योगों के निर्माण, नवाचार को बढ़ावा देने और लंबे समय तक सफलता के लिए बौद्धिक संपदा की सुरक्षा के लिए उत्पादकता आधारित तरीकों को अपनाने के लिए एक रिमाइंडर या अनुस्मारक के रूप में कार्य करता है। इसके अलावा एनपीसी का उद्देश्य भारत को विश्व में अग्रणी बनाना और लोगों को उत्पादकता उपकरणों के उपयोग के महत्व के बारे में शिक्षित करना, वर्तमान विषयों को शामिल करके प्रक्रियाओं को बढ़ाना और गुणवत्ता, दक्षता और प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना है।
उत्पादकता व्यवसायों को समान या कम संसाधनों के साथ अधिक उत्पादन करने में मदद देकर आर्थिक विकास को बढ़ावा देती है। उत्पादकता में वृद्धि से लाभ, निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलता है, जो सभी में योगदान करते हैं। राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस 2026 नवाचार का जश्न मनाने और प्रभावशाली प्रगति को प्रोत्साहित करने का अवसर है। कार्यशालाओं से लेकर रचनात्मक अभियानों तक, यह दिन लोगों और स्टार्टअप को अपनी बौद्धिक संपदा की रक्षा करने और उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करता है। यह स्टार्टअप को सफलता के लिए आवश्यक उपकरण, रणनीति और संसाधन प्रदान करते हुए नवाचार की संस्कृति को पोषित करने के महत्व पर प्रकाश डालता है।
राष्ट्रीय उत्पादकता सप्ताह और राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस का उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मकता, दक्षता और गुणवत्ता बढ़ाने के महत्व के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना है, ताकि भारत को वैश्विक नेता के रूप में स्थापित किया जा सके। यह दिवस बताता है कि उत्पादन को अनुकूलित करने और संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करने के लिए, उत्पादकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना महत्वपूर्ण है। ध्यातव्य है कि भारत की राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद टोक्यो स्थित एशियाई उत्पादकता संगठन का सदस्य है, जो एक अंतर-सरकारी निकाय है। जिसका भारत सरकार एक संस्थापक सदस्य है। राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद देश की औद्योगिक इंजीनियरिंग, कृषि व्यवसाय, आर्थिक सेवाएँ, गुणवत्ता प्रबंधन, मानव संसाधन,प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी, प्रौद्योगिकी प्रबंधन, ऊर्जा प्रबंधन और पर्यावरण प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों में परामर्श और प्रशिक्षण सेवाएँ प्रदान कर रहा है। ये सेवाएँ सरकारी और सार्वजनिक/निजी क्षेत्र के संगठनों को दी जाती हैं। ताकि देश का आर्थिक विकास दर बना रहे। इसके साथ ही देश का उत्पादन किसी भी रूप में गिरने नहीं पाए और उत्पादन अपने लक्ष्य को प्राप्त कर देश को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाने में कारगर सिद्ध हो, ताकि भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल हो सके।
