तरबूज की वैज्ञानिक खेती के लिए इफको ने झारखंड के किसानों को तरीके बताए
तरबूज के नर्सरी की तैयारी मुख्यतः किसान भाई दिसंबर के प्रथम पखवाड़े में प्रारम्भ करते हैं।
रांची के बुढ़मू में इफको द्वारा एक किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया I इस गोष्ठी में तरबूज की वैज्ञानिक खेती के लिए किसानों के साथ वार्ता किया गया I इस विषय में वार्ता करते हुए इफको क्षेत्र प्रबंधक ने तरबूज के समय से नर्सरी तैयार करने पर बात करते हुए बताया गया कि तरबूज के नर्सरी की तैयारी मुख्यतः किसान भाई दिसंबर के प्रथम पखवाड़े में प्रारम्भ करते हैं। इस समय मौसम में ठण्ड का प्रभाव अधिक रहता है ऐसे में समय से नर्सरी तैयार करने के लिए तरबूज के बीज को बेड में गिराने से पहले इफको के नैनो डीएपी तरल, नैनो जिंक एवं नैनो कॉपर से शोधन करें I ऐसा करने से बीज को आरम्भ में ही खाना मिल जाता है और यह अपने अंकुरण के बाद ही नैनो रूप में उपलब्ध खाने को अपने जड़ के विकास में लगाता है जिससे जड़ों का त्वरित गति से विकास होता है जो समय से मजबूत पौध को तैयार करने में सहायक होता है I
उन्होंने तरबूज की खेती में फास्फोरस,पोटाश एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि तरबूज एक बहु तोड़ाई वाली फ़सल है जो काफी बड़ा एवं रसदार भी होता है साथ ही इसके गुदा को मीठा एवं कड़कदार बनाना भी एक महत्वपूर्ण भाग होता है जो कि इसके अच्छे बाजार मूल्य को निर्धारण करने में एवं लंबी अवधि तक टिकाऊ बनाए रखने के लिये सहायक होता है I
ऐसे में जब आप तरबूज की रोपाई करने के समय मिट्टी में पर्याप्त मात्रा में गोबर का खाद का प्रयोग करना चाहिए और रोपाई के पूर्व नर्सरी के जड़ों को इफको नैनो डीएपी से शोधन करना चाहिए। जब फ़सल 30 से 35 दिन का हो जाए और आप निकाय गुडाई करें तो उस समय मिट्टी में यूरिया देने की जगह कैल्शियम नाइट्रेट का भुरकाव करें और दानेदार यूरिया की जगह पर नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का प्रयोग पत्तियों में स्प्रे करें I पुनः फूल निकलने के समय इसका पत्तियों में सल्फेट ऑफ पोटाश के साथ मिलाकर स्प्रे करें I ऐसा करने से अधिक फूल लगते हैं तथा फल वजनदार,रसदार और कड़कदार के साथ लंबे समय तक तरोताजा बना रहता है I फसलों में फूल और फल के लगने की अवधि को अधिक लंबे समय तक बनाए रखने के लिए इनका स्प्रे पत्तियों में 10 से 15 दिनों के अंतराल में करते रहना चाहिए।
कृषि में ड्रोन के महत्व पर वार्ता करते हुए ड्रोन आंत्रप्रेन्योर रंजीत गोप ने इससे फसलों, उर्वरकों एवं दवा के छिड़काव एवं उससे होने वाले लाभ की जानकारी दी।
कार्यक्रम में इफको के प्रशांत गोप एवं अमरजीत अमर ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस बैठक में 80 किसानों ने अपनी सहभागिता निभाई।