ध्यान से स्वयं के साक्षात्कार का मार्ग प्रशस्त होता है
(21 दिसंबर, 'विश्व ध्यान दिवस' पर विशेष)
विश्व ध्यान दिवस हम सबों को यह याद दिलाता है कि ध्यान मनुष्य के लिए कितना जरूरी है । आज के बदले वैश्विक सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य ने संपूर्ण विश्व वासियों के दिलों दिमाग में हलचल पैदा कर दिया है। आधुनिकता,फास्ट लाइफ स्टाइल और भागम भाग दिनचर्या ने मनुष्य की शांति छीन ली है । छोटी - छोटी बात पर हम सब मरने और मारने के लिए उतावले हो जाते हैं । देखते ही देखते दोस्ती दुश्मनी में बदल जाती है । हम सबों का स्वभाव धीरे-धीरे चिड़चिड़ापन की ओर अग्रसर होता चल रहा जा रहा है । ज्यादातर लोग उग्र होते चले जा रहे हैं। यह बताता है कि कहीं न कहीं हम सबों से कोई न कोई भूल जरूर हो रही है। चूंकि हमारा मन व चित शांत नहीं है । हम सब दुनिया को सुधारने की बात बड़े-बड़े मंचों से जरूर करते रहते हैं, लेकिन खुद को ही निहार नहीं पाते हैं । यही सबसे बड़ी भूल है। उदाहरण स्वरूप शांत व स्थिर जल में हम सब अपने चेहरे को बहुत ही साफ-सुथरे ढंग से देख पाते हैं। अगर वही जल खौलता रहे तो अपने चेहरे को कदापि ढंग से देख नहीं दे सकते हैं। आज ठीक उसी तरह अधिकांश मनुष्यों का मन मस्तिष्क खोलते हुए जल के समान हो चुका है। ऐसी परिस्थिति में मनुष्य उग्र ही बनेगा । आज विश्व के अधिकांश मनुष्यों की यह स्थिति क्यों हो गई है ? इस पर गहन चिंतन मनन करने की जरूरत है।
इसलिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने हर 20 दिसंबर को खुद से साक्षात्कार करने के लिए विश्व ध्यान दिवस की घोषणा की थी । विश्व ध्यान दिवस हमें यह बताता है कि ध्यान हर मनुष्य के लिए बहुत जरूरी है। ध्यान से ही मन स्थिर होता है। चित में शांति आती है । जब हमारा मन व चित शांत होगा, तब हम कोई भी निर्णय बहुत संयमित ढंग से ले पाते हैं। ऐसी ही अवस्था विषम से विषम चुनौतियों का सामना बहुत ही धैर्य के साथ कर पाते हैं। ध्यान का विश्व मानव से गहरा रिश्ता है। इस धरा पर जो भी महापुरुष आए, चाहे वे किसी भी धर्म, पंथ अथवा विचार के रहे हों,सभी ने ध्यान को आत्मसात कर खुद को परिष्कृत किया। ज्ञान की अवस्था हमें सत्कर्म की ओर प्रेरित करता है। ध्यान मनुष्य को धैर्यवान और जीवन जीने की कला भी बताता है। ध्यान की अवस्था में मनुष्य अपने परमपिता परमेश्वर से साक्षात्कार तक कर लेता है। ध्यान के माध्यम से ही हमारे महापुरुषों ने मोक्ष को प्राप्त किया। ध्यान की अवस्था ही मनुष्य के जीवन की वास्तविक अवस्था है। ध्यान हमें यह बताता है कि अपना कार्य करते हुए चित और बुद्धि को शांत और स्थिर रखें। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक शोध ने यह सिद्ध किया है कि जो व्यक्ति ध्यान नियमित रूप से करते हैं। वे अन्य व्यक्तियों की तुलना में ज्यादा सहज ,सरल और शांत रहते हैं । इसके साथ ही वे अपने जीवन को बहुत ही आनंद के साथ जीते हुए मंजिल को प्राप्त करते हैं।
ध्यान के संबंध में विश्व के तमाम धर्म ग्रंथो में बहुत ही विस्तार से चर्चा की गई है। हिंदू धर्म ग्रंथो में हमारे ऋषि मुनियों ने ध्यान की महता पर बहुत कुछ दर्ज किया है। ध्यान की अवस्था ही मनुष्य की वास्तविक अवस्था होती है। पुरातत्वविदों के अनुसार, ध्यान का इतिहास 5,000 ईसा पूर्व तक जाता है, और इस अभ्यास का संबंध प्राचीन मिस्र और चीन, यहूदी धर्म, हिंदू धर्म, जैन धर्म, सिख धर्म और बौद्ध धर्म के साथ-साथ ईसाई धर्म और इस्लाम से भी है।अनुमानों के अनुसार, विश्व स्तर पर 200 से 500 मिलियन लोग ध्यान का अभ्यास करते हैं।
ध्यान एक प्राचीन अभ्यास है, जिसमें व्यक्ति अपना ध्यान वर्तमान क्षण पर केंद्रित करता है। विभिन्न संस्कृतियों में धार्मिक, योगिक और धर्मनिरपेक्ष परंपराओं से जुड़ा यह अभ्यास हजारों वर्षों से किया जा रहा है। आज, इसे विश्व स्तर पर अपनाया जा रहा है, और यह अपने आध्यात्मिक मूल से परे जाकर व्यक्तिगत कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक सार्वभौमिक साधन बन गया है। हम सब यह हमेशा याद रखें कि ध्यान से ही स्वयं से साक्षात्कार का मार्ग प्रशस्त होता है।
ध्यान की सबसे मान्यता प्राप्त परिभाषा आम तौर पर इसे एक ऐसी प्रथा के रूप में वर्णित करती है, जिसमें एक व्यक्ति मन को प्रशिक्षित करने और मानसिक स्पष्टता, भावनात्मक शांति और शारीरिक विश्राम की स्थिति प्राप्त करने के लिए सचेतनता, केंद्रित ध्यान या एकाग्र विचार जैसी तकनीकों का उपयोग करता है। आज विश्व में जितने भी सफल राजनेता,वैज्ञानिक, चिकित्सक, अभियंता, शिक्षाविद आदि अपने-अपने क्षेत्र में हैं, वे सभी किसी न किसी रूप से ध्यान से जुड़े हुए हैं।
ध्यान के अनेक प्रकार हैं, जिनमें से प्रत्येक शांति, स्पष्टता और संतुलन प्राप्त करने के लिए अद्वितीय तरीके प्रदान करता है। शोध से पता चलता है कि यह तनाव कम करने, एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन में सुधार करने, चिंता और अवसाद से राहत दिलाने और नींद की गुणवत्ता बढ़ाने में सक्षम है। यह रक्तचाप कम करने और दर्द को नियंत्रित करने सहित बेहतर शारीरिक स्वास्थ्य में भी योगदान देता है। प्रौद्योगिकी ने ध्यान तक पहुंच को और भी व्यापक बना दिया है, ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की मदद से व्यक्ति कहीं भी और कभी भी इसका अभ्यास कर सकते हैं ।
विचारणीय यह है कि व्यक्तिगत लाभों के अलावा, ध्यान सहानुभूति, सहयोग और साझा उद्देश्य की भावना को बढ़ावा देता है, जो सामूहिक कल्याण में योगदान देता है। अपनी सार्वभौमिकता के लिए प्रशंसित, ध्यान का अभ्यास विश्व के सभी क्षेत्रों में सभी उम्र, पृष्ठभूमि और जीवन शैली के लोगों द्वारा किया जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार , ध्यान चिंता के लक्षणों को नियंत्रित करने में सहायक और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का एक शक्तिशाली साधन हो सकता है। कुछ मिनटों के लिए भी माइंड फुलनेस मेडिटेशन को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से आपको शांति और एकाग्रता प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। इसके अतिरिक्त योग जैसी प्रथाओं के मानसिक स्वास्थ्य लाभों को स्वीकार करता है, जिनमें अक्सर ध्यान के तत्व शामिल होते हैं। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आजीवन स्वास्थ्य और कल्याण में योग के योगदान को उजागर किया , और स्वस्थ आबादी और अधिक न्यायसंगत एवं टिकाऊ विश्व को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका पर बल दिया।ध्यान तनाव, रक्तचाप और चिंता को कम करने में मदद कर सकता है, भावनात्मक स्वास्थ्य को बढ़ावा दे सकता है, आत्म-जागरूकता बढ़ा सकता है और नींद में सुधार कर सकता है।
हम सब को यह जानना चाहिए कि ध्यान और इसके लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए, संयुक्त राष्ट्र ने हर 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस के रूप में घोषित किया । ताकि सभी लोग उच्चतम स्तर के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का आनंद ले सकें । ध्यान कर आप सिर्फ अपना ही भला नहीं करते हैं बल्कि यह एक तरह से अपने परिवार, समाज और देश पर उपकार करते हैं । ध्यान करने से आपका मन, बुद्धि शांत रहता है । आप जिस पेशे में भी हों । अगर ऐसी अवस्था में अपने कार्य को अंजाम देते हैं, तब वह कार्य प्रतिशत सफल होता है । वहीं दूसरी ओर अगर एक वैज्ञानिक चित और मन से शांत नहीं है। ऐसी अवस्था में वह अपने वैज्ञानिक शोध में लगा हुआ है, तब आप समझ सकते हैं कि उस शोध के परिणाम क्या होंगे ? उसी प्रकार एक चिकित्सक अगर मन और चित से शांत नहीं है। ऐसी अवस्था में अगर वह रोगियों को देख रहा हो, तब उसके परिणाम क्या होंगे ? इसे सहजता के साथ समझा जा सकता है। ध्यान हमें बेहतर कार्य करने के लिए तैयार करता है । जब हम सहज सरल और शांत होंगे, तभी अपने परिवार, समाज और देश का ख्याल अच्छे ढंग से कर पाएंगे । विश्व ध्यान दिवस पर हम सभी को यह संकल्प लेने की जरूरत है कि अपने काम से कुछ समय निकालकर नियमित रूप से ध्यान करें।