चैंपियंस ट्रॉफी विजय जुलूस के दौरान महू में भड़की हिंसा के मायने
चैंपियंस ट्रॉफी की जीत के जश्न मनाने के लिए इंदौर के महू में स्थानीय मस्जिद के पास से विजय जुलूस जा रही थी, तभी हिंसा भड़क उठी। भारतीय टीम की जीत का जश्न मना रहे लोगों पर अचानक पथराव हो गया । देखते ही देखते दो गुट आमने-सामने आ गए और इसके बाद वहां माहौल का तनावपूर्ण हो गया।

दुबई में भारत ने न्यूजीलैंड को चार विकेट से हराकर तीसरी बार चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब अपने नाम कर लिया। जैसे ही यह खबर टेलीविजन पर क्रिकेट प्रेमियों सहित देशवासियों ने देखा सभी खुशी से झूम उठे। देखते ही देखते संपूर्ण भारत वर्ष में जीत के पटाखे जीत के फूटने लगे थे । इस जीत की खुशी का आलम यह रहा कि लोग घरों से बाहर निकल कर हाथों में तिरंगा निकालकर सड़कों में अपनी खुशियों का इजहार करने लगे थे। भारत माता की जय, वंदे मातरम, रोहित शर्मा जिंदाबाद, राहुल जिंदाबाद आदि के नारे देश भर में गूंजित हो रहे थे। इस जीत पर देश के प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री सहित विपक्ष के कई बड़े नेताओं ने वक्तव्य जारी कर भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों की सरहाना की। यह रात दीपावली की रात के रूप में तब्दील हो गई थी। तभी मध्य प्रदेश से यह खबर आई कि चैंपियंस ट्रॉफी की जीत के जश्न मनाने के लिए इंदौर के महू में स्थानीय मस्जिद के पास से विजय जुलूस जा रही थी, तभी हिंसा भड़क उठी। भारतीय टीम की जीत का जश्न मना रहे लोगों पर अचानक पथराव हो गया । देखते ही देखते दो गुट आमने-सामने आ गए और इसके बाद वहां माहौल का तनावपूर्ण हो गया।
भारतीय क्रिकेट टीम कि यह जीत संपूर्ण देश की जीत है । यह जीत न किसी जाति, वर्ग, वर्ण और विचारों के बंधन में बंधी है। बल्कि इस जीत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रौशन किया है । तब क्या चैंपियंस ट्रॉफी जुलूस पथराव कहां तक उचित है ? इससे प्रतीत होता है कि एक खास वर्ग जो भारत की चैंपियंस ट्रॉफी जीत से खुश नहीं है । जबकि दूसरी ओर देश भर में सभी वर्ग के लोगों ने मिलजुल कर खुशी मनाई । यह निर्विवाद सत्य है कि इस जीत ने संपूर्ण भारत वर्ष को एक सूत्र में बांधने का काम किया है। लेकिन महू में भड़की हिंसा ने इस जीत की खुशी पर ही पानी फेर कर रख दिया। आखिर इस विजय जुलूस पर पत्थर फेंक कर पत्थर बाज क्या साबित करना चाहते हैं ?
संपूर्ण देश में चैंपियंस ट्रॉफी की जीत पर सभी धर्म, विचार, पंथ और वर्ग के लोग भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों के प्रदर्शन की प्रशंसा करते देखे जा रहे हैं। हर ओर से क्रिकेट खिलाड़ियों की वाहवाही हो रही है । ऐसा सिर्फ भारत के क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए ही नहीं हो रहा है। विश्व के जिन देशों में भी क्रिकेट खेले जाते हैं, अगर उन देशों में भी क्रिकेट खिलाड़ी इस तरह की जीत दर्ज करते हैं, तब वहां के नागरिक भी इसी तरह की खुशियां मानते हैं । महू की घटना ने भारत की गंगा - जमुनी सरस्वती को कलंकित करने का काम किया है। यह सब एक साजिश के तहत की जा रही है । अगर मैं ऐसा दर्ज करता हूं तो कोई अतिशयोक्ति ना होगी। भारतवर्ष में बीते कई दशकों से हिंदू और मुसलमान मिलजुल कर भाईचारे की तरह साथ रहते चले आ रहे हैं । इस भाईचारे को ऐसी शक्तियां खंडित करने में लगी हुई है। तभी महू जैसी घटना दस्तक देती है । समस्त देशवासियों को ऐसी साजिशों को मिल जुलकर ध्वस्त करने की जरूरत है। तभी भारत के एकता और अखंडता का अक्षुण्ण में रह सकती है।
ध्यातव्य है कि रविवार 9 मार्च को न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हराकर भारतीय टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का खिताब अपने नाम किया। टीम इंडिया की जीत के साथ देशभर में बीती रात जश्न शुरू हो गया। हर जगह आतिशीबाजी होने लगी। लोग सड़कों पर उतरकर झूमते हुए जश्न मनाने लगे। इंदौर में भी टीम इंडिया की जीत से उत्साहित लोगों ने जश्न मनाया। जश्न के दौरान दो पक्षों में विवाद हो गया है। भारतीय टीम की जीत को सेलिब्रेट कर रहे लोगों के जुलूस पर पथराव किया गया। घटना महू के जामा मस्जिद के पास हुई। जानकारी के अनुसार चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के फाइनल मुकाबले में भारत की जीत का जश्न मनाते हुए बीती रात महू में जुलूस निकाला गया। ये जुलूस जैसे ही मस्जिद के पास पहुंचा तो दोनों पक्षों में बहस होने लगी, जिसने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया। इस दौरान पत्थरबाजी शुरू कर दिया, जिसमें कई लोग घायल भी हुए। हालात बिगड़ते चले गए और इस दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने वाहनों में तोड़फोड़ शुरू की। कई गाड़ियों और दुकानों को भी फूंक डाला। महू में बीती रात भड़की हिंसा के कुछ वीडियो भी सामने आए हैं, जिसमें वहां पथराव होते दिख रहा है। भीड़ को वाहनों और गाड़ियों को फूंकने भी देखा गया। वहीं, हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए।
विवाद के बाद पुलिस फिलहाल वहां पैट्रोलिंग कर रही है। इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि अब यहां शांति स्थापित है। कोई समस्या नहीं है। किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दिया जाए। घटना का कारण क्या है ? इस घर की हिंसा के लिए कौन कौन जिम्मेदार हैं ? इसकी जांच होगी और कार्रवाई की जाएगी। इस भड़की हिंसा में कितने लोग घायल हुए हैं ? संख्या अभी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार चार लोग घायल हैं। मामले में मुकदमा दर्ज किया जाएगा, जो भी शामिल होंगे कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कुछ वीडियो दिखाई गई है और गवाहों के बयान भी दर्ज हो रहे हैं। इस घटना की सूचना मिलने के बाद महू विधायक उषा ठाकुर मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि यह सुनियोजित षड्यंत्र था। रास्ता बंद करके डायवर्ट किया गया और उसके बाद पथराव और आगजनी की गई।
वहीं दूसरी ओर इस मामले को लेकर मुस्लिम पक्ष का कहना है कि नमाजी निकल रहे थे। इसी दौरान किसी शरारती तत्व ने उन पर सुतली बम फेंक दिया, जिससे वजह से विवाद बढ़ गया। पहले हिंदू पक्ष की तरफ से पथराव किया गया। बात कहने के लिए बहुत कुछ कही जा सकती है। आरोप प्रत्यारोप होते रहेंगे। लेकिन इस तरह की घटना पर बिल्कुल वोट की राजनीति नहीं होनी चाहिए। हम सब बरसों से साथ-साथ रहते चले आ रहे हैं। यही हमारी सांस्कृतिक पहचान भी बन गई है। हमारे नेता गण विश्व मंच से भारत की एकता और अखंडता की बात पुरजोर तरीके से रखते रहे हैं । पूरी दुनिया भारत की गंगा जमुनी संस्कृति को गर्व की निगाह से देखती है। चैंपियंस ट्रॉफी विजय के जश्न के रूप में जुलूस निकल गया था। यह भी सत्य है कि जुलूस के दौरान पटाखे फूट भी रहे थे। यह जीत सिर्फ हिंदुओं की जीत नहीं है बल्कि संपूर्ण देशवासियों की जीत है । समस्त देशवासियों को मिल जुल कर इस जीत की खुशियां मनानी चाहिए।
महू में भड़की हिंसा से समस्त देशवासियों को सावधान रहने की जरूरत है । अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक साजिश भारत के खिलाफ पर रची जा रही है। इस साजिश में पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन आदि देश शामिल हैं। पिछले दिनों कनाडा सहित विश्व के कई देशों के हिंदू मंदिरों पर जो हमले हुए, ये सारी घटनाएं इसी कड़ी का हिस्सा हैं। ऐसी शक्तियां भारत की एकता और अखंडता को तोड़ने में लगी हुई हैं। मध्य प्रदेश सरकार को महू की घटना को गंभीरता से लेने की जरूरत है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है। महू में भड़की हिंसा के सैकड़ों वीडियो वायरल हो चुके हैं। इन वायरल विडियो की मदद से पत्थर बाजों चिन्हित किया जा सकता है। उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए तभी ऐसी घटनाओं पर विराम लग सकता है।