भारतीय इतिहास के सबसे शक्तिशाली शासक थे महाराजा रणजीत सिंह
भारत में समय समय पर अनेक शक्तिशाली और महान शासक हुए हैं। अनेक ऐसे राजा महाराजा हुए हैं, जिन्होंने भारत के अलग अलग राज्य में शासन किया हैं।

महाराजा रणजीत सिंह भारत के एक ऐसे महाराजा थे, जिनके शक्तिशाली शासन और महानता से बहुत से लोग आज भी अनजान हैं। रणजीत सिंह शासक भी थे और जनता का सेवक भी। उनका शासन एक आदर्श था। जो अपने सिंहासन पर भी चौकड़ी मार कर बैठता था। जो जमीन से जुड़ा हुआ था। जिसने अपने शासन काल में सिक्के भी चलवाए तो अपने नाम पर नहीं। जिनके साम्राज्य में जनता खुश और सुखी थी। राज्य में पूर्ण शांति, न्याय और कानून व्यवस्था का बोलबाला था। इतिहास में उनके शासन को शासन का स्वर्ण योग कहा जाता है।
उनके शक्तिशाली शासन की कुछ झलकियां :–

- महाराजा रणजीत सिंह पहले ऐसे गैर मुस्लिम थे, जिन्होंने पश्तूनों पर राज किया था। जिसने अफगानों और सिखों पर भी राज किया।
- जम्मू कश्मीर पर शासन किया और अनपढ़ होने के बावजूद उन्होंने अपने शासन में शिक्षा और कला को सबसे ज्यादा प्रोत्साहन दिया था।
- अपने 40 साल के लंबे शासनकाल में कानून व्यवस्था को इतना सशक्त किया था कि उनके शासनकाल में किसी को भी मृत्यु दंड देने की नौबत नहीं आई थी। क्योंकि कानून व्यवस्था बेहद सशक्त थी।
- मुस्लिम शासकों द्वारा लगाए गए सिखों और हिंदुओं पर जजिया कर को भी समाप्त कर दिया था।
- हरिमंदिर साहिब को संगमरमर और सोना जड़ कर स्वर्ण मंदिर बनाया। वो स्वर्ण मंदिर जो आज विश्व भर में प्रसिद्ध है।
- महाराजा रणजीत सिंह के साम्राज्य की शान कोहिनूर हीरा हुआ करता था।
- महाराजा रणजीत सिंह ने अपने जीते जी उस शक्तिशाली ब्रिटेन को भी अपने राज्य के आस पास फटकने नहीं दिया था, जिस ने उस समय बाकी पूरे भारत पर कब्जा कर लिया था।
महाराजा रणजीत सिंह ने पंजाब पर 1801 से लेकर अपनी मौत तक 1839 तक राज्य किया । उनके राज्य की सरहदें अफगानिस्तान तक फैली हुई थी और उन्हें शेर–ए–पंजाब के नाम से प्रसिद्ध भी जाना जाता था ।
अब अगर शासक सशक्त और शक्तिशाली है तो उनका सेनाध्यक्ष कैसा होगा ?

महाराजा रणजीत सिंह का जरनैल यानी सेनाध्यक्ष वो साशक था, जिनकी बहादुरी के अनेक किस्से मशहूर थे। महाराजा रणजीत सिंह के इस महान योद्धा का नाम हरी सिंह नालवा था । जिसने एक बार अपने पर हमला करने आए बाघ के जबड़े को अपनी बलशाली बाजुओं से चीर दिया था। जिनको अफगानों का काल कहा जाता था। इस 7 फीट से भी ज्यादा बड़ी कद काठी के जरनैल से अफगान थर थर कांपते थे। वो अफगान, जहां से सोवियत संघ और अमेरिका जैसी महाशक्तियों को भी अंत में हार कर अपनी सेना को वापस बुलाना पड़ा हो, वहां इस योद्धा ने बड़ी बड़ी जीत हासिल की थी और अफगानों को पस्त कर दिए थे। कभी पंजाब पर राज करने वाले अफगानों से महराजा रणजीत ने अपने इस जरनैल की अगवानी में पंजाब को मुक्त करवाया और फिर अफगानिस्तान के काबुल को अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया था। अफगानों के जेहन में हरी सिंह के नाम का खौफ कितना था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अफगान महिलाएं अपने रोते हुए बच्चों को चुप कराने के लिए कहती थीं, चुप हो जाओ, नहीं तो नालवा आ जाएगा।
अंग्रेज, महाराजा रणजीत सिंह की मौत का ही इंतजार कर रहे थे
समय बदला, हालात बदले और पूरे भारत को निगल चुका ब्रिटिश साम्राज्य, गिद्ध जैसी निगाह से पंजाब को भी लगातार घूर रहा था। महराजा रणजीत सिंह की मौत के कुछ सालों के बाद ही 1849 में एंग्लो-सिख युद्ध हुआ और शक्तिशाली ब्रिटेन ने पंजाब को हरा कर इसे ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया। महाराजा रणजीत सिंह और पंजाब की शान उस कोहिनूर हीरे को भी ब्रिटेन ने हड़पने में देर नहीं लगाई और अपने देश की महारानी विक्टोरिया को सौंप दिया गया।
“यह वो कोहिनूर हीरा था, जिनके बारे में महाराजा रणजीत सिंह ने अपनी वसीयत में इसे उड़ीसा के जगन्नाथ मंदिर को दान देने के लिए लिखा था। पर वो एक सपना बन कर रह गया और महाराजा रणजीत सिंह की इच्छा भी अधूरी रह गई।”