यह जीवन ईश्वर का अनुपम उपहार है

( 22 जनवरी, 'जीवन दिवस' पर विशेष) 

यह जीवन ईश्वर का अनुपम उपहार है

यह जीवन ईश्वर का अनुपम उपहार है। इस जीवन के महत्व को  समझ कर जीवन जीने की जरूरत है।  ईश्वर के इस महत्वपूर्ण व उपहार रूपी जीवन के महत्व को जो समझ लेता है, वह बहुत ही आनंद के साथ इस जीवन को जीता है ।  हमारा जीवन तभी सार्थक है, जब हम अपने जीवन की चुनौतियां, झंझावातों और परेशानियां का मुकाबला  कर आगे बढ़ते चले जाते हैं, एक न एक दिन इन पर विजय प्राप्त कर लेते हैं। मनुष्य के जीवन का लक्ष्य यही होना चाहिए ।  व्यक्ति को जीवन में कभी भी नकारात्मक विचार उत्पन्न नहीं होने देना चाहिए। यह जीवन है, तभी खुशी है, गम है ।  यह कदापि नहीं भूलना चाहिए कि खुशी और गम दोनों के मिलन का नाम ही जीवन है ।  जिस तरह दिन के बाद रात का होना तय है और रात के बाद दिन का होना तय है ।  जब ईश्वर ने यह निर्धारित कर दिया है कि दिन के बाद रात और रात के बाद दिन का होनानिश्चित है। ‌ तब जीवन में मिले दु:ख से घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि दु:ख की  इस घड़ी में बहुत ही धैर्य और हिम्मत से जीवन जीने की जरूरत है।
  जीवन में सुख और दुख दोनों का मौजूद रहना, जीवन की महता को बतलाता है ।  जो मनुष्य जीवन के इस गुढ़ रहस्य को समझ लेता है, वह जब घोर संकट में भी होता है, तो उसे कभी घबराते नहीं है बल्कि उससे मुकाबला कर आगे बढ़ता है।  वह इस बात को जानता है कि यह संकट कुछ दिनों का है और कुछ ही दिनों में ही चला जाएगा ।  बहुत लोग थोड़ी सी परेशानी होने पर  इस जीवन को ही बोझ समझ लेते हैं । ऐसे लोग इस जीवन को ही व्यर्थ मानते हैं ।  यह सोच व्यक्ति के नकारात्मक चिंतन का अग्रसर कर देता है। ‌मनुष्य को कभी भी नकारात्मक चिंतन को अपने मन मस्तिष्क में जगह नहीं देना चाहिए बल्कि मनुष्य  को ईश्वर के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करना चाहिए कि ईश्वर तुमने मुझे इस धरा पर जन्म देकर कुछ विशेष कार्य के लिए भेजा है ।  जैसे ही ये  विचार मन में आते हैं, जीवन में उत्साह की वृद्धि हो जाती है । फिर कुछ नया करने के लिए अग्रसर हो जाते हैं। 
  हम सबों को इतिहास से यह सबक लेना चाहिए कि इस धरा पर जो भी  महापुरुष आए, सभी एक साधारण मनुष्य की ही तरह जन्म लिए थे। लेकिन ये  साधारण मनुष्य कुछ असाधारण काम कर महापुरुष बन गए थे। ऐसा नहीं कि इन महापुरुषों के जीवन में कोई संकट नहीं आया था बल्कि अगर  उनके जीवन का अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि  उनका संपूर्ण जीवन झंझावातों, परेशानियों और चुनौतियों से भरा पड़ा था। लेकिन उन्होंने इन चुनौतियों, झंझावातों और परेशानियों का मुकाबला पूरी शक्ति और धैर्य के साथ किया था। उन्होंने इन परेशानियों को परास्त कर अपने जीवन को सफल बना दिया था। महापुरुषों ने इस धरा पर आकर जो काम किया, उनके कार्य सदा याद किए जाते रहेंगे। ‌विचारणीय यह कि अगर ईश्वर उन्हें इस धरा पर नहीं पैदा करते,  तब शायद वे इतने महत्वपूर्ण कार्य नहीं कर पातें।  और न ही इतिहास के पन्नों पर अमिट हो पाते। इसलिए हर व्यक्ति कभी भी  कमतर नहीं समझना चाहिए। एक साधारण मनुष्य भी अपने असाधारण  कामों से अपनेजीवन को सफल बना सकता है । ‌ जीवन को ईश्वर का अनुपम उपहार मानकर बहुत ही आनंद के साथ परिवार के बीच जीवन जीना चाहिए। हर व्यक्ति को परिवार के बीच सुख-दुख बांट कर  एक दूसरे का सहयोग करना चाहिए। समाज के हर व्यक्ति को समाज के बीच रहकर मैत्री भाव को बढ़ाते रहना चाहिए। साथ ही अगल-बगल के लोगों के  सुख-दुख में साथ खड़े रहना चाहिए।यही जीवन सार्थक जीवन कहा जाएगा
  जीवन का हर दिन एक उत्सव के समान है। यह मानकर परिवार के बीच जीवन जीना चाहिए ।  परिवार के सदस्यों के मनोभावों को समझना चाहिए ।  उनकी तकलीफों  को समझना चाहिए। उनकी खुशी में अपनी खुशी जोड़कर आगे बढ़ना चाहिए। 22 जनवरी को मनाया जाने वाला यह जीवन दिवस के हम सबों को यह सीख देता है कि जीवन कितना महत्वपूर्ण है ? आप अपने परिवार के लिए कितने महत्वपूर्ण है ? आप अपने परिवार के बच्चों को कितना समझ पाए हैं ? उन बच्चों और नाती-पोतों को समझने की जरूरत है  जो आपके क्ष जीवन में खुशियाँ भरते हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि प्रत्येक बच्चे और प्रत्येक जीवन को सर्वोच्च सम्मान और गरिमा के साथ एक अनमोल उपहार के रूप में संजोकर रखना चाहिए।  इसके साथ ही हमें यह कदापि नहीं भूलना चाहिए कि कभी हम भी बच्चे थे। फिर युवा हुए। फिर वृद्ध हुए ।  यह रूपांतरण जीवन का सच है। इसी रूपांतरण के बीच ही हमारा जन्म होता है ।  अंत में मृत्यु को प्राप्त करते हैं। यह  जीवन का सच है। हमें यह हमेशा ख्याल रखना चाहिए कि बच्चे बहुत जल्दी बड़े हो जाते हैं। व्यस्त जीवन की दिनचर्या से समय निकालकर बच्चों के साथ बिताना चाहिए। कहीं  अपनी व्यस्तता के कारण जब उनके साथ समय नहीं बिता पाते हैं, तो बच्चे कब युवा हो जाएंगे, पता ही नहीं चलेगा । ‌चूंकि बच्चें लगातार नई चीजें सीखते रहते हैं और हर दिन बदलते रहते हैं। हर दिन वे अपनी सरल समझ और विचारों से हमें प्रसन्न करते हैं। बच्चों के साथ समय बिताकर और उन्हें वह स्नेह और देखभाल देकर जिसके वे हकदार हैं, हम उनके जीवन का जश्न मनाते हैं।
 इसके साथ ही जीवन दिवस यह भी सीखना है कि इस जीवन को उत्सव में कैसे तब्दील करें ? जीवन दिवस का उत्सव बहुत ही धूमधाम के साथ मनाना चाहिए।  इस अवसर पर हम सबों को गोष्ठियाँ आयोजित करनी चाहिए  आस - पास परिवारों को मिलजुल कर एक साथ भोजन करना चाहिए और समय बिताना चाहिए । साथ ही एक दूसरे के मनोभावों को भी समझना चाहिए। घर के बच्चें जो घर के सदस्यों के जीवन में उल्लास और उमंग पैदा करते हैं ।  अपने जीवन में मौजूद बच्चों का जश्न मनाएं। अपने बच्चे, पोते-पोती, भतीजे या भतीजी के साथ यह दिन साझा करें। हमने कई सुझाव दिए हैं। जीवन दिवस पर  बच्चों  के साथ किताबें पढ़ें।ज़मीन पर बैठ जाइए और एक पहेली को सुलझाइए। अपने बच्चे के साथ मिलकर कुछ बनाएं।सभी चचेरे भाई-बहनों को बोर्ड गेम खेलने के लिए आमंत्रित करें। कुकीज़ बेक करें और उन्हें सजाएं। इससे छोटे बच्चे को भी कुछ न कुछ सीखने को मिलेगा। पॉपकॉर्न बनाइए और फिल्म देखिए। उन्हें बताइए कि दादी और दादाजी कैसे मिले थे। उनके समक्ष कला सामग्री निकालें और कुछ रचनात्मक कार्य शुरू करें। इस दिन किसी संग्रहालय का भ्रमण करें। किसी किशोर को टायर बदलना सिखाएं। ड्राइविंग सिखाएं। अपने नाखूनों पर एक साथ नेल पॉलिश लगाएं।
 ऐसा कर हम सब अपने अपने जीवन को खुशियों से भर देते हैं। हम सबों को यह भरसक  प्रयास करना चाहिए कि कोई भी कार्य बहुत निष्ठा के साथ करना चाहिए। मन मार कर काम नहीं करना चाहिए।  पूरे आनंद के साथ काम करना चाहिए। याह  वैज्ञानिक शोधों में भी सिद्ध हो चुका है कि जो काम मन से किए जाते हैं, उसका रिजल्ट बहुत ही बेहतर होता है। और जो काम बेमन से किए जाते हैं, उसमें सफलता की बहुत कम गुंजाइश रह पाती है  इसलिए किसी कार्य को बोझ मानकर नहीं करना चाहिए बल्कि एक दायित्व मानकर पूरी निष्ठा के  करनी  चाहिए।  जो भी कार्य मिले मन लगाकर करना चाहिए । आप जहां भी हों, घर में हों, समाज में हों,  व्यवसाय में हो, नौकरी पेशा में हो, अपने-अपने कार्य को पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ कर‌‌नी  चाहिए। तभी यह जीवन सच्चे अर्थों में ईश्वर का अनुपम उपहार बन पाएगा।