भारत की सनातन संस्कृति का प्रतीक धर्म ध्वजा का गौरवशाली इतिहास 

भगवा ध्वज भारतीय सनातन संस्कृति के  गौरव का प्रतीक है।‌ यह मात्र केसरिया रंग का ध्वज नहीं है, अपितु इस संपूर्ण भूखंड के शौर्य और स्वाभिमान का प्रतीक है।

भारत की सनातन संस्कृति का प्रतीक धर्म ध्वजा का गौरवशाली इतिहास 

भारत की प्राचीन सनातन संस्कृति का प्रतीक भगवा ध्वज व धर्म ध्वजा संसार में शान्ति बनाये रखने के लिए एक दूसरे के प्रति सांमजस्य, सहअस्तित्व, सहकार, सद्भाव और सहयोग की भावना की सीख प्रदान करता है। भगवा ध्वज व ‌धर्म ध्वजा दीर्घकाल से हमारे सनातन इतिहास का मूक साक्षी रहा है। इसमें हमारे पूर्वजों, ऋषियों और माताओं के तप की कहानियां छिपी हुई हैं। यही हमारा सबसे बड़ा गुरु, मार्गदशक र्और प्रेरक है।  देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा फहरा कर धर्म ध्वजा को जो सम्मान दिया है, भारत के इतिहास में सदा स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा।  भगवा ध्वज भारतीय सनातन संस्कृति के  गौरव का प्रतीक है।‌ यह मात्र केसरिया रंग का ध्वज नहीं है, अपितु इस संपूर्ण भूखंड के शौर्य और स्वाभिमान का प्रतीक है । यह धर्म ध्वजा अपने आप में अखंड भारत वर्ष के प्राचीन सनातन संस्कृति का इतिहास को समेटे हुए हैं। आज की बदली सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य  में संपूर्ण देशवासियों को यह जानना चाहिए कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर के मुख्य शिखर पर धर्म ध्वजा फराह कर एक इतिहास रचने का काम किया है इस धर्म ध्वजा का  गौरवशाली इतिहास क्या है ? इस इतिहास का पुनर्पाठ बहुत जरूरी है । भारत वर्ष में आक्रांताओं के लंबे शासन के बावजूद यह धर्म ध्वजा लहराता रहा। विषम परिस्थितियों में भी  देश के सूरवीरों ने इस धर्म ध्वजा  के वजूद को बनाए रखा। राम मंदिर के शिखर पर इस धर्म ध्वजा को लहराकर उन सूरवीरों को सम्मान देने का काम किया गया है ।‌ इस धर्म ध्वजा के मान और सम्मान के लिए लाखों भारत माता के सपूतों ने अपनी कुर्बानी दी थी।
   नरेंद्र मोदी ने धर्म ध्वजा फहराने के बाद जो कहा उस बात को गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।‌ उन्होंने  मैकाले की शिक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि देशवासियों को गुलामी की मानसिकता से ग्रसित किया गया ।  इससे बाहर आने का संकल्प लेना होगा।  विकसित भारत का निर्माण कर अगले दस  वर्षों में  देश इस मानसिकता से बाहर आ जाएगा । संपूर्ण विश्व के मीडिया ने नरेंद्र मोदी के उस वक्तव्य को बहुत ही प्रमुखता के साथ स्थान दिया।  यह कोई मामूली बात नहीं है अपितु गुलाम मानसिकता से निकले बिना देश अपने गौरवशाली इतिहास को कदापि वापस नहीं ला सकता है । धर्म ध्वजा का लहराना उस गौरवशाली इतिहास का पुनर्पाठ का शुभारंभ है। उन्होंने बहुत ही गर्व के साथ देशवासियों को  यह भी कहा कि अगले दस वर्षों के भीतर इस गुलाम मानसिकता को निकाल कर बाहर फेंक देना है।
    एक ओर जहां राम मंदिर के शिखर पर प्रधानमंत्री द्वारा धर्म ध्वजा फहराने की संपूर्ण देश में प्रसंशा  वर्ष हो रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष के  इसकी आलोचना करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं । यह बात समझ से परे है ।‌ भगवान राम इस देश के करोड़ सनातनियों के देवता के रूप में पूजे जाते हैं । भगवान राम, त्याग और बलिदान के नायक के रूप में जाने जाते हैं । ऐसे आस्था के देवता के मंदिर के  शिखर पर धर्म ध्वजा  लहराना समस्त देशवासियों के लिए गौरव की बात है न कि विपक्ष की । देश के विपक्ष को धर्म ध्वजा के गौरवशाली इतिहास की महत्ता को समझने की जरूरत है। साथ ही इस गुलाम मानसिकता से निकलने की जरूरत है।
   हम समस्त देशवासियों को यह जानना चाहिए कि भगवा ध्वज व धर्म  ध्वजा का इतिहास प्राचीन काल से है।‌ यह ध्वज हिंदू और बौद्ध धर्म में त्याग, ज्ञान और वीरता का प्रतीक रहा है। इसी धर्म ध्वजा की पहचान और सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर ने अपनी शहादत दी थी। आगे चलकर गुरु गोविंद सिंह जी ने अपने पूरे परिवार की शहादत देकर इस धर्म ध्वजा के मान सम्मान पर आंच आने नहीं दिया था। यह ध्वज  शिवाजी महाराज की सेना का ध्वज था। वीर शिवाजी ने इस  ध्वज की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन उत्सर्ग कर दिया था । उन्होंने खुद को भारत माता के लिए न्योछावर कर इस धर्म ध्वजा पर आंच आने नहीं दिया था । यह ध्वज भगवान राम, कृष्ण तथा अर्जुन के रथों पर भी लहराया जाता था। आधुनिक समय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस धर्म ध्वज अपना गुरु मान कर एक नव संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।
  यह धर्म ध्वजा भारतीय सनातन संस्कृति का धार्मिक और आध्यात्मिक प्रतीक के रूप में जाना जाता है। यह हिंदू और बौद्ध धर्म में एक शाश्वत प्रतीक के  रूप में जाना जाता है,जो त्याग, शुद्धता और ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है। धर्म ध्वजा का केसरिया  रंग वीरता और बलिदान का प्रतीक है। यह ध्वज छत्रपति शिवाजी महाराज की सेना का ध्वज था।‌ आगे चलकर यह धर्म ध्वजा हिंदवी स्वराज्य का प्रतीक बना। स्वाधीनता आंदोलन के दौरान 1905 में सिस्टर निवेदिता ने एक ध्वज बनाया, जिसमें लाल और पीले रंग थे, जो 'वंदे मातरम्' के साथ एक वज्र दर्शाता था। इसे कलकत्ता अधिवेशन में फहराया गया था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने स्थापना कल से ही भगवा ध्वज को अपना गुरु माना । संघ की शाखाओं में इसी ध्वज के सामने राष्ट्रसेवा की शपथ ली जाती है। भले ही भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा से भागवत ध्वज की भिन्नता है, किन्तु  करोड़ों देशवासी इस धर्म ध्वजा से राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के सम्मान ही श्रद्धा और प्रेम रखते हैं। सनातनियों के यज्ञ एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों पर यह भगवा ध्वज  बड़े ही शान  के साथ लहराता है।
 वीर शिवाजी महाराज ने भगवा रंग को उगते हुए सूर्य का रंग माना था, जो ज्ञान और वीरता का प्रतीक है। धर्म ध्वजा में मौजूद दो त्रिभुज यज्ञ की ज्वालाओं का प्रतीक हैं, जो ज्ञान और शुद्धि का संदेश देते हैं। धर्म ध्वजा त्याग, बलिदान, शौर्य, ज्ञान, शुद्धता और सेवा का प्रतीक है। इसके साथ ही धर्म ध्वजा  गुरु, हिन्दू संस्कृति और धर्म का शाश्वत प्रतीक के रूप में माना जाता है।  यह धर्म ध्वजा धर्म, समृद्धि, विकास, अस्मिता, ज्ञान, और विशिष्टता का प्रतीक है।  इस भगवा ध्वज का केसरिया रंग  त्याग, बलिदान, ज्ञान, और शुद्धता  का प्रतीक है। यह हिन्दू धर्म के प्रत्येक आश्रम, मन्दिर पर फहराया जाता है।  इन अनेक गुणों या वस्तुओं का सम्मिलित द्योतक है, अपना यह भगवा ध्वज। भगवा ध्वज का केसरिया रंग  उगते हुए सूर्य का रंग है। इसका रंग अधर्म के अंधकार को दूर करके धर्म का प्रकाश फैलाने का संदेश देता है। यह हमें आलस्य और निद्रा को त्यागकर उठ खड़े होने और अपने कर्तव्य में लग जाने की भी प्रेरणा देता है। यह हमें यह भी सिखाता है कि जिस प्रकार सूर्य स्वयं दिनभर जलकर सबको प्रकाश देता है, इसी प्रकार हम भी निस्वार्थ भाव से सभी प्राणियों की नित्य और अखंड सेवा करें।
 धर्म ध्वजा का केसरिया रंग यज्ञ की ज्वाला का भी रंग है। यज्ञ सभी कर्मों में श्रेष्ठतम कर्म बताया गया है। यह आन्तरिक और बाह्य पवित्रता, त्याग, वीरता, बलिदान और समस्त मानवीय मूल्यों का प्रतीक है, जो कि हिन्दू धर्म के आधार हैं। यह केसरिया रंग हमें यह भी याद दिलाता है कि केसर की तरह ही हम इस संसार को महकायें। भगवा ध्वज में दो त्रिभुज हैं, जो यज्ञ की ज्वालाओं के प्रतीक हैं। ऊपर वाला त्रिभुज नीचे वाले त्रिभुज से कुछ छोटा है। ये त्रिभुज संसार में विविधता, सहिष्णुता, भिन्नता, असमानता और सांमजस्य के प्रतीक हैं।