कभी यहाँ की सभी सीटों पर भाजपा का कब्जा रहता था, आज भाजपा विहीन हो गई है
दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी में शुमार भाजपा का पश्चिमी सिंहभूम जिला और कोल्हान में हाल बेहाल। एक समय पूरा कोल्हान प्रमंडल भाजपा का अभेद किला और गढ़ हुआ करता था। आज चार-चार पूर्व मुख्यमंत्री के रहते भाजपा एक-एक सीट के लिए मोहताज हो गई। चाईबासा - चक्रधरपुर नगर परिषद शहरी क्षेत्र में भी झामुमो का हो गया कब्जा।
दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी में शुमार भाजपा का पश्चिमी सिंहभूम जिला और कोल्हान में हाल बेहाल है । एक समय पश्चिमी सिंहभूम जिला और पूरा कोल्हान प्रमंडल सहित पूरा झारखंड राज्य भाजपा का गढ़ और अभेद्य किला हुआ करता था। झारखंड के 14 लोकसभा सीटों में से 12 सीटों पर भाजपा के सांसद चुनाव जीतते थे और भाजपा का कब्जा रहता था । इसी तरह कोल्हान के भी 14 विधानसभा सीटों पर 12-13 सीटों पर भाजपा ही चुनाव जीतती थी, भाजपा के विधायक जीतकर आते थे। मगर अब हालात यह हो गया है कि जिले में पार्टी सांसद और विधायक विहीन हो गया है। भाजपा यहां सांसद-विधायक के लिए मोहताज हो गया है। जिले में पार्टी सबसे बुरे दौर से हाल के वर्षों में गुजर रही है।
मोदी-शाह भी जीत दिलाने में विफल
कोल्हान से भाजपा के कई बड़े-बड़े दिग्गज नेताओं की फौज रही है। चार-चार पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, रघुवर दास, मधुकोड़ा और चंपई सोरेन इसी कोल्हान प्रमंडल से आते हैं। इसके बावजूद भाजपा अपनी वह खोई प्रतिष्ठा वापस नहीं ला पा रही है, जिस पर झामुमो ने कब्जा कर लिया है। हर लोकसभा-विधानसभा चुनाव में भाजपा द्वारा जंबो जेट नेताओं की फौज चुनाव प्रचार में उतार देने और पानी की तरह पैसा बहाने के बावजूद कोल्हान और जिले में भाजपा एक भी सांसद ,विधायक की सीट नहीं जीत पा रही है। जबकि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे बड़े-बड़े नेता चुनाव प्रचार में अपनी ताकत लगाते रहे हैं। भाजपा के कथित नेताओं द्वारा ही पार्टी के अंदर आपसी गुटबाजी, अंतर कलह ने पार्टी की नैया को डुबाने का काम किया है। पार्टी की नैया कथित नेताओं द्वारा ही डुबाया जा रहा है।
नगर परिषद अध्यक्ष पद पर झामुमो का कब्जा
हाल में हुए नगर निकाय चुनाव में जिले के दोनों सीट चक्रधरपुर और चाईबासा नगर परिषद अध्यक्ष पद पर भाजपा समर्थित प्रत्याशियों की हार हुई और दोनों सीटों पर झामुमो का कब्जा हो गया। शहरी क्षेत्र अमूमन भाजपा का वोट बैंक माना जाता है। मगर यहां भी भाजपा अपना समर्थित प्रत्याशी जीता नहीं पाई। चाईबासा में भाजपा के दो नेता अनूप सुल्तानिया और काबू दत्ता ने बागी बनकर चुनाव लड़ा। अनूप सुल्तानिया को लगभग 300 वोट पड़े और काबू दत्ता को 1500 वोट मिला। जबकि भाजपा समर्थित प्रत्याशी रमेश खिरवाल झामुमो समर्थित प्रत्याशी नितिन प्रकाश से महज 504 वोटों से चुनाव हार गए । भाजपा के बागी नेताओं के चुनाव लड़ने के कारण ही भाजपा समर्थित प्रत्याशी को महज 504 वोटों से हार का सामना करना पड़ा । वैसे हार के कई कारण रहे ,चुनावी मैनेजमेंट, पार्टी संगठन से लेकर, लेकिन बागी नेताओं का चुनाव लड़ना मुख्य कारण रहा। दोनों बागी बनकर चुनाव लड़ने वाले का आधा वोट भी जोड़ा जाए तो भी चुनाव की तस्वीर कुछ अलग होती। मगर चाईबासा और चक्रधरपुर शहरी क्षेत्र भी भाजपा के हाथ से निकल गया और यहां भी दोनों सीटों के अध्यक्ष पद पर झामुमो का कब्जा हो गया।
भाजपा समर्थित वार्ड पार्षदों ने दिया इस्तीफा, झामुमो के समर्थन से बनेंगे उपाध्यक्ष
नगर निकाय चुनाव परिणाम के बाद भाजपा में पार्टी छोड़ने का सिलसिला चल पड़ा है। कई वर्षों से भाजपा में जुड़े पार्टी के पूर्व नगर अध्यक्ष और भाजपा युवा मोर्चा के पदाधिकारी रहे विकास शर्मा और मुकेश जोगी ने वार्ड पार्षद का चुनाव जीत तो लिया लेकिन अब दोनों ने व्यक्तिगत कारणों से पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। अंदर खाने चर्चा है कि विकास शर्मा झामुमो के समर्थन से नगर परिषद उपाध्यक्ष बनने की तैयारी कर रहे हैं, इसीलिए भाजपा को उन्होंने छोड़ दिया है। ज्ञात हो कि झामुमो समर्थित वार्ड पार्षद भी चुनाव जीते हैं और वर्तमान में झामुमो जिले में मजबूत स्थिति में है।
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