अखंड भारत संकल्प दिवस कार्यक्रम मनाया गया
अखंड भारत संकल्प दिवस कार्यक्रम मनाया गया

गयाजी।लोको हनुमान मंदिर माधवनगर गयाजी के प्रांगण में विश्व हिंदू परिषद,बजरंग दल के द्वारा अखंड भारत संकल्प दिवस का कार्यक्रम मनाया गया।इस दौरान विहिप विभाग संगठन मंत्री सूरज प्रताप ने लोगो को संबोधित करते हुए बताए अखण्ड भारत महज सपना नहीं, श्रद्धा है, निष्ठा है. जिन आंखों ने भारत को भूमि से अधिक माता के रूप में देखा हो, जो स्वयं को इसका पुत्र मानता हो, जो प्रात: उठकर “समुद्रवसने देवी पर्वतस्तन मंडले, विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यम् पादस्पर्शं क्षमस्वमे. “कहकर उसकी रज को माथे से लगाता हो, वन्देमातरम् जिनका राष्ट्रघोष और राष्ट्रगान हो, ऐसे असंख्य अंत:करण मातृभूमि के विभाजन की वेदना को कैसे भूल सकते हैं, अखण्ड भारत के संकल्प को कैसे त्याग सकते हैं? किन्तु लक्ष्य के शिखर पर पहुंचने के लिये यथार्थ की कंकरीली-पथरीली, कहीं कांटे तो कहीं दलदल, कहीं गहरी खाई तो कहीं रपटीली चढ़ाई से होकर गुजरना ही होगा।15 अगस्त को हमें आजादी मिली और वर्षों की परतंत्रता की रात समाप्त हो गयी. किन्तु स्वातंत्र्य के आनंद के साथ-साथ मातृभूमि के विभाजन का गहरा घाव भी सहन करना पड़ा. 1947 का विभाजन पहला और अन्तिम विभाजन नहीं है,1857 ई से लेकर 1947 तक भारत के 7 टुकड़े अग्रेजो के द्वारा अफगानिस्तान,नेपाल,भूटान,तिब्बत,श्रीलंका,ब्रह्मदेश(म्यांमार),पाकिस्तान,बंगलादेश किए गए तेरह सौ वर्ष से भारत की धरती पर जो वैचारिक संघर्ष चल रहा था, उसी की परिणति 1947 के विभाजन में हुई. पाकिस्तानी टेलीविजन पर किसी ने ठीक ही कहा था कि जिस दिन आठवीं शताब्दी में पहले हिन्दू ने इस्लाम को कबूल किया, उसी दिन भारत विभाजन के बीज पड़ गये थे।
विभाजन के पश्चात् खंडित भारत की अपनी स्थिति क्या है? ब्रिटिश संसदीय प्रणाली के अन्धानुकरण ने हिन्दू समाज को जाति, क्षेत्र और दल के आधार पर जड़मूल तक विभाजित कर दिया है. पूरा समाज भ्रष्टाचार की दलदल में आकंठ फंस गया है. हिन्दू समाज की बात करना साम्प्रदायिकता है और मुस्लिम कट्टरवाद व पृथकतावाद की हिमायत करना सेकुलरिज्म. अनेक छोटे-छोटे राजनीतिक दलों में बिखरा हिन्दू नेतृत्व सत्ता के कुछ टुकड़े पाने के लोभ में मुस्लिम वोटों को रिझाने में लगा है।अखंड भारत की आकांक्षा के साथ साथ हमें अपने लिए कुछ करने वाली बातें भी तय करनी होगी । हमें समाज की कमियों को पहचान कर उसको दूर करने के लिए तत्पर रहना, अपने आप को संगठित रखना, अपने सिद्दांतों को व्यवहार में उतारना व जीवन में उसका प्रकटीकरण दिखना, देशहित के बारे में सोचने वाले बंधुओं को व समाज की सज्जन शक्ति को साथ लेकर चलना । इन सब बातों का ध्यान रखते हुए नित्यप्रति अखंड भारत का स्वप्न अपनी आँखों में रखना । मैं अपने इसी जीवन में अखंड भारत को साकार होते हुए देखूंगा, यही प्रबल इच्छाशक्ति हमारे आगे के मार्ग को भी तय करेगी और हम अखंड भारत को साकार होते हुए देखेंगे
इस दौरन माधवनगर इकाई का गठन किया गया।इस दौरन कार्यक्रम में दीपक पांडेय,रोहित कुमार,राघव कुमार,विवेक कुमार अनुराग कुमार पिंकी दीदी सहित दर्जनों की संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।