बाल श्रम को पनाह देने वाले पत्थर दिलों व्यापारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराया जाए : पंचम कुमार

बाल श्रम को रोके बिना अधूरी है भारत की तरक्की, सरकार अनाथ बच्चों के लिए मुफ्त में आश्रय एवं शिक्षा व्यस्था करें।

Jun 12, 2021 - 11:52
बाल श्रम को पनाह देने वाले पत्थर दिलों व्यापारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराया जाए : पंचम कुमार

बाल श्रम हमारे देश और समाज के लिए बहुत ही गम्भीर विषय है। आज समय आ गया है कि हमें इस विषय पर बात करने के साथ-साथ अपनी नैतिक जिम्मेदारियाँ भी समझनी होगी। बाल मज़दूरी को जड़ से उखाड़ फेंकना हमारे देश के लिए आज एक चुनौती बन चुका है क्योंकि बच्चों के माता-पिता ही बच्चों से कार्य करवाने लगे है। आज हमारे देश में किसी बच्चे को कठिन कार्य करते हुए देखना आम बात हो गई है।
वहीं बच्चों से काम करवाने से बच्चों का शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और सामाजिक विकास रुक जाता है। जहाँ पर बच्चों से मज़दूरी कराई जाती है, वहाँ के लोग अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं।
बाल मज़दूरी करते समय कई बच्चे और बच्चियों का शारीरिक शोषण भी किया जाता रहा है जोकि उनके ऊपर दोहरी मार है। एक रिपोर्ट के अनुसार बाल मज़दूरी करने वाले बच्चों में से लगभग 40% बच्चों का शारीरिक शोषण किया जाता है। यह बहुत ही गंभीर बात है लेकिन इस पर कभी भी ध्यान नहीं दिया जाता है।
मज़दूरी करते समय बच्चों से अक्सर गलतियाँ होती रहती हैं। गलतियाँ तो बड़े लोगों से भी होती है लेकिन बच्चों को डाँट लगाना व सजा देना आसान होता है इसलिए उन से काम कराने वाले उनके मालिक उन्हें मानसिक प्रताड़ना देते है। जो कि एक छोटे से बच्चे के मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव डालती है।
साथ ही उनका रहन-सहन भी अच्छा नहीं होता है। जिसके कारण बच्चे भी उन्हीं के साथ रहने के कारण उनकी भाषा और उन्हीं के जैसा रहन-सहन करने लग जाते हैं और उनकी मानसिक स्थिति भी कमजोर हो जाती है जिसके कारण एक अच्छे समाज का विकास नहीं हो पाता है।
बाल मज़दूरी को बड़े लोगों और माफियाओं ने व्यापार बना लिया है। जिसके कारण दिन-प्रतिदिन हमारे देश में बाल श्रम बढ़ता जा रहा है और बच्चों का बचपन खराब हो रहा है। इससे बच्चों का भविष्य तो खराब होता ही है, साथ में देश में गरीबी फैलती है और देश के विकास में बाधाएँ आती हैं। बाल श्रम भारत के साथ-साथ सभी देशों में गैर कानूनी है। बाल श्रम अधीनियम 1986 के तहत ढाबों, घरों, होटलों में बाल श्रम करवाना दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद पूरे देश में बाल मजदूरी करते देखा जा रहा है। बाल श्रम हमारे समाज के लिए एक कलंक बन चुका है। बाल मज़दूरी की समस्या समय के साथ – साथ बहुत उग्र रूप लेती जा रही है। इस समस्या को अगर समय रहते जड़ से मिटाया नहीं गया, तो इससे पूरे देश का भविष्य संकट में आ सकता है। हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था में आज भी सुधार नहीं है। जिसके कारण ग्रामीण इलाकों और बिछड़े हुए इलाकों के बच्चे आज भी पढ़ लिख नहीं पाते हैं। जिसके कारण वह बचपन में ही बाल मज़दूरी का शिकार हो जाते हैं। बाल श्रम में फंसे बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। गरीब बच्चे सबसे अधिक शोषण का शिकार हो रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चे स्कूल छोड़ कर बाल मजदूर बन चुके हैं। बाल श्रम मानव अधिकार का खुला उल्लंघन है। इस लिए बाल श्रम निषेध दिवस मना कर लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। अगर हमें बाल मजदूरी जैसे श्राप को हमारे समाज से नष्ट करना है, तो हमें खुद आगे आना होगा और इसके खिलाफ आवाज उठानी होगी। चुकी जब तक हमारा देश बाल श्रम से मुक्त नहीं हो जाता है तब देश तरक्की नहीं करेगा। बाल श्रम को रोकने के लिए सरकार को मजबूत और कड़े कानून बनाने की आवश्यकता है। जिससे कोई भी बाल मज़दूरी करवाने से डरे। अगर आपके सामने कोई भी बाल श्रम का मामला आए तो सबसे पहले नज़दीकी पुलिस स्टेशन में खबर करनी चाहिए। हमें बाल श्रम को पनाह देने वाले पत्थर दिलों के विरुद्ध अपनी आवाज़ को बुलंद करना चाहिए। आम आदमी को भी बाल मज़दूरी के विषय में जागरूक होना चाहिए और अपने समाज में इसे होने से रोकना चाहिए।
सर्व विदित है कि बाल श्रम को रोकने के लिए कई आवश्यक कानून बनाएं गए हैं जिसमें कई संस्थाएं कार्य कर रही है बावजूद इस पर काबू न पाना विचारणीय प्रश्न है।

सरकार को वैसे सभी संस्थाओं को कड़े निर्देश देने की आवश्यकता है जो बाल श्रम को रोकने के लिए कार्य कर रही है। ईमानदारी पूर्वक बच्चों की तलाश करने की आवश्यकता है जो अनाथ हैं उन्हें निःशुल्क शिक्षा एवं आश्रय एवं सुरक्षा प्रदान करना नितांत आवश्यकता है।

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