कई चुनौतियों का मुकाबला कर सुनीता और बुच ने आखिर धरती पर कदम रख ही दिया  

सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर 6 जून 2024 को अंतरिक्ष स्टेशन के लिए 8 दिनों तक रहने और उसी अंतरिक्ष यान द्वारा लौटने की योजना बनाई थी, जो उन दोनों को बोइंग स्टारलाइनर को ले गया था । लेकिन अंतरिक्ष यान में खराबी ने उन दोनों की वापसी पर ग्रहण लगा दिया था।

कई चुनौतियों का मुकाबला कर सुनीता और बुच ने आखिर धरती पर कदम रख ही दिया  

अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर अंतरिक्ष में कई चुनौतियों का सामना करते हुए आखिरकार धरती पर कदम रखें । सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर  सात दिनों के लिए अंतरिक्ष पर गए थे। लेकिन उन दोनों को अप्रत्याशित रूप से नौ  महीने तक अंतरिक्ष  में ही प्रवास करना पड़ा था । जैसे ही उन दोनों ने धरती पर कदम रखा, पूरी दुनिया में उन दोनों को सकुशल देखकर खुशी से उछल पड़ी । नासा के वैज्ञानिकों के समक्ष अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर को स कुशल लाने की चुनौती थी ।‌ उन दोनों के अंतरिक्ष पर जैसे-जैसे दिन  बढ़ते चले जा रहे थे, नासा के समक्ष चुनौतियां और भी बढ़ती चली जा रही थी । इन तमाम मुश्किलों के बावजूद नासा के वैज्ञानिकों ने उन दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी पर सकुशल लाकर एक बड़ा काम किया है। जिसकी पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है।‌ अंतरिक्ष में फंसे रहने के कारण सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर की सकुशल वापसी के लिए दुनिया भर में दुआएं की जा रहीं थीं। उन दोनों के सकुशल वापसी के साथ ही दुनिया भर में की जा रही प्रार्थनाएं सफल हुई।
सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर 6 जून 2024 को अंतरिक्ष स्टेशन के लिए 8 दिनों तक रहने और उसी अंतरिक्ष यान द्वारा लौटने की योजना बनाई थी, जो उन दोनों को बोइंग स्टारलाइनर को ले गया था । लेकिन अंतरिक्ष यान में खराबी ने उन दोनों की वापसी पर ग्रहण लगा दिया था। इस दौरान उन दोनों ने पूरे अदम्य साहस का परिचय दिया। वे दोनों बिल्कुल घबराएं नहीं। उन दोनों को नासा के वैज्ञानिकों  ने जो सलाह दिया,  उस मुताबिक  कार्य भी किया।‌ उन दोनों ने अंतरिक्ष यान को ठीक करने की दिशा में बहुत ही सकारात्मक पहल भी किया था, लेकिन अंतरिक्ष यान को ठीक नहीं किया जा सका । समय धीरे-धीरे कर बढ़ता चला जा रहा था। चूंकि सुनीता विलियम्स का 127 दिनों तक अंतरिक्ष में रहने का अनुभव था । यह अनुभव  उन दोनों को बहुत काम आया। जैसे-जैसे दिन बढ़ रहे थे, उन दोनों के जीवन पर मौत का संकट बढ़ता चला जा रहा था ।‌ इन विपरीत परिस्थितियों में भी वे बिल्कुल घबराएं नहीं। दोनों मुस्कुराते रहें । वहीं दूसरी ओर नासा के वैज्ञानिकों ने जो निर्देश दिया उसका अनुपालन पूरी ईमानदारी के साथ किया। इसी का परिणाम है कि 9 महीने के बाद वे दोनों धरती पर सकुशल कदम रख सकें।
  तमाम कोशिशें के बावजूद जब अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यान ठीक नहीं हुआ तब नासा ने स्पेसएक्स  ड्रैगन अंतरिक्ष यान उन दोनों को  पृथ्वी की सतह पर सकुशल लाने के लिए भेजा।  ये दोनो अंतरिक्ष यात्री निक हेग और रुसी कॉस्मोनॉट अलेक्जेंडर गोरबुनोव रहें। जिन्होंने बीते 9 महीने से फंसे अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर को  धरती की सतह पर सकुशल लेकर आए। यह कर कर निक हेग ओर अलेक्जेंडर ने एक नया कृतिमान स्थापित कर दिया। मंगलवार  को जैसे ही वापसी अंतरिक्ष यान फ्लोरिडा राज्य के तट से दूर पानी के नीचे गिरा और यह नासा का मिशन पूरी तरह सफल हुआ। नासा ने इसी तरह अंतरिक्ष यान की वापसी की घोषणा की थी। तब कैप्सूल को रिकवरी शिप में ले जाया गया, जहां एक स्प्प्लैशडाउन  के लगभग 50 मिनट बाद स्पेसक्राफ्ट से बाहर निकलने वाले निक हेग पहले व्यक्ति बन गए।  सुनीता विलियम्स तीसरी ।‌ तब सभी मुस्कुराते हुए नजर आए। नासा का यह मिशन पूरी तरह कामयाब रहा। इस संबंध में एक खास खबर यह भी है कि नासा के वैज्ञानिकों ने दुनिया भर के उन देशों के वैज्ञानिकों से भी सलाह मशवरा किया,जो अंतरिक्ष के क्षेत्र में अनुसंधान कर रहे हैं । अर्थात सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर सकुशल वापसी में पूरी दुनिया के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को एक सूत्र में बांधकर रख दिया।
  सुनीता विलियम्स एक भारतीय मूल अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री हैं। जिन्होंने अंतरिक्ष अन्वेषण में कई उल्लेखनीय उपलब्धियां लिया हासिल की, जिसमें अंतरिक्ष में सबसे लंबी उड़ान का रिकॉर्ड भी शामिल है। पूरी दुनिया को सुनीता विलियम्स से और अदम्य साहस की सीख लेनी चाहिए। इसके साथ ही दुनिया को यह भी जानना चाहिए कि 2003 में जब कोलंबिया में अंतरिक्ष यात्री कल्पना  चावला अपने अंतरिक्ष यान  से पृथ्वी पर लौट रही थीं ,तब कुछ ही दूरी में अंतरिक्ष यान में आई गड़बड़ी के कारण उनकी मौत हो गई थी। तब पूरी दुनिया स्तब्ध रह गई थी।  विश्व ने एक श्रेष्ठ अंतरिक्ष यात्री को खो दिया था। लेकिन इस बार ईश्वर ने सुनीता विलियम्स को एक नया जीवनदान देकर उनके जीवन को पूरे विश्व बीसियों के लिएअनुकरणीय बना दिया है। 
  हम सबों को सुनीता विलियम्स के जीवन से बहुत कुछ सीख लेने की जरूरत है।  जीवन में कितनी बड़ी विपत्ति क्यों न आ जाए, आखिरी क्षण तक प्रयास किया जाना चाहिए।  शायद उसी क्षण में उसकी विपत्ति का समाधान छुपा हो। जैसा कि सुनीता विलियम्स के साथ अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन में हुआ। सुनीता  विलियम्स का जन्म 19 सितम्बर 1965 को अमेरिका के ओहियो राज्य में यूक्लिड नगर में हुआ था। मैसाचुसेट्स से हाई स्कूल पास करने के बाद 1987 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की नौसैनिक अकादमी से फिजिकल साइन्स में स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। सुनीता विलियम्स को बचपन से ही अंतरिक्ष के प्रति रूझान था। वह अपने शिक्षकों से अंतरिक्ष से संबंधित सवाल पूछती रहती थी।  आगे चलकर उनके शिक्षक यह मानने लगे थे कि  यह बच्ची एक दिन अंतरिक्ष की दुनिया में कुछ नया कारनामा कर दिखाएगी।  आगे चलकर यह भविष्यवाणी सच साबित हुई।
 1995 में सुनीता विलियम्स ने फ़्लोरिडा इंस्टिट्यूट ऑफ़ टैक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में एम.एस. की उपाधि हासिल की थी। उनके पिता डॉ॰ दीपक एन. पांड्या एक जाने-माने तंत्रिका विज्ञानी,एम.डी हैं, जिनका संबंध भारत के गुजरात राज्य से हैं। उनकी माँ बॉनी जालोकर पांड्या स्लोवेनिया की हैं। उनका एक बड़ा भाई जय थॉमस पांड्या और एक बड़ी बहन डायना एन, पांड्या है। जब वे एक वर्ष से भी कम की थी तभी पिता 1958 में अहमदाबाद से अमेरिका के बोस्टन में आकर बस गए थे। हालांकि बच्चे अपने दादा-दादी, ढेर सारे चाचा-चाची और चचेरे भाई-बहनों को छोड़ कर ज्यादा खुश नहीं थे, लेकिन परिवार ने पिता दीपक को उनके चिकित्सा पेशे में प्रोत्साहित किया।
  1998 में सुनीता विलियम्स का  अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा में चयन हुआ और प्रशिक्षण शुरू हुआ था । सुनीता भारतीय मूल की दूसरी महिला हैं जो अमरीका के अंतरिक्ष मिशन पर गईं। सुनीता विलियम्स ने सितंबर, अक्टूबर 2007 में भारत का दौरा भी किया था।  1998 से नासा से जुड़ी सुनीता ने अभी तक कुल 30 अलग-अलग अंतरिक्ष यानों में 2770 उड़ानें भर चुकी हैं। साथ ही सुनीता सोसाइटी ऑफ एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलेट्स, सोसाइटी ऑफ फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर्स और अमेरिकी हैलिकॉप्टर एसोसिएशन जैसी संस्थाओं से भी जुड़ी हुई हैं।
 सुनीता विलियम्स का विवाह  माइकल जे. विलियम्स से हुआ।वे सुनीता पंड्या के सहपाठी रह चुके है। वे नौसेना पोत चालक, हेलीकाप्टर पायलट, परीक्षण पायलट, पेशेवर नौसैनिक, गोताखोर, तैराक, धर्मार्थ धन जुटाने वाली, पशु-प्रेमी, मैराथन धावक और अब अंतरिक्ष यात्री एवं विश्व-कीर्तिमान धारक हैं। उन्होने एक साधारण व्यक्तित्व से ऊपर उठकर अपनी असाधारण संभाव्यता को पहचाना और कड़ी मेहनत तथा आत्मविश्वास के बल पर उसका भरपूर उपयोग किया।
   2008  में सुनीता विलियम्स को भारत सरकार द्वारा विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था।इसके अलावा उन्हें नेवी कमेंडेशन मेडल,  नेवी एंड मैरीन कॉर्प एचीवमेंट मेडल, ह्यूमैनिटेरियन सर्विस मेडल जैसे कई सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। इसके साथ ही सुनीता विलियम्स  अंतरिक्ष पर 9 महीने 8 दिन रहने का रिकॉर्ड भी बन चुकी है । अंतरिक्ष का संसार कैसा होगा ? इस पर सुनीता विलियम्स कुछ दिनों में जरूर बोलेंगी।अंतरिक्ष में सुनीता विलियम्स और उनके मित्र बिना डरे और घबराए 287 दिनों तक कैसे गुजारे होंगे ? इस विषय पर भी सुनीता विलियम्स क्या बोलती है ?  जिसे पूरी दुनिया दुनिया को इंतजार।