गया जी में रक्षाबंधन का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया
गया जी में रक्षाबंधन का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

गयाजी। भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व शनिवार को पूरे जिले में परंपरागत उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना की, वहीं भाइयों ने बहनों को उपहार देकर उनका स्नेहपूर्ण आशीर्वाद लिया।
रक्षाबंधन के अवसर पर बाजारों में राखी और मिठाई की दुकानों पर खासा उत्साह और भीड़ देखने को मिली। घर-घर में पर्व को लेकर व्यापक तैयारियां की गई थीं। सुबह लोग स्नान कर देवी-देवताओं की पूजा के बाद बहनों ने भाइयों को तिलक कर रक्षा सूत्र बांधा और जीवन भर साथ निभाने का वचन लिया।
मनोज कुमार शुक्ला ने बताया कि यह पर्व भाई-बहन के अटूट स्नेह का प्रतीक है। हर वर्ष सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला यह पर्व समाज में पारिवारिक मूल्यों और रिश्तों की मिठास को दर्शाता है। रेशम की कच्ची डोरी भले ही कमजोर दिखे, लेकिन इसके पीछे का भाव बेहद मजबूत होता है।
पर्व के दौरान बच्चों में भी खासा उत्साह देखा गया। नए कपड़ों में सजे बच्चे, और रंग-बिरंगे परिधानों में महिलाएं व युवतियां, थाल सजाकर भाइयों के घर पहुंचीं और राखी बांधी। दोपहर बाद अधिकांश बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर खुशियों का इज़हार किया।
कई बहनों ने वीर सैनिकों की कलाइयों पर रक्षा सूत्र बांधकर राष्ट्र की रक्षा कर रहे भाईयों के प्रति आभार और प्रेम प्रकट किया। वहीं कुछ बहनों ने बंदी भाइयों को राखी बांधकर मानवता और अपनत्व का संदेश दिया।
भारत में रक्षाबंधन का पर्व पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है। कहा जाता है कि असुरों के संग्राम में इंद्र की रक्षा के लिए इंद्राणी ने उन्हें अभिमंत्रित रेशम का धागा बांधा था, जिससे वे विजयी हुए। वहीं, द्रौपदी द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की घायल उंगली पर साड़ी की पट्टी बांधना भी इस पर्व की भावना से जुड़ा हुआ माना जाता है।
रक्षाबंधन के चलते शहर की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ पड़ी थी और चारों ओर पर्व की चहल-पहल बनी रही।