झारखंड पुलिस ने साइबर ठगों से बचाए गए 150 करोड़ रुपये, पीड़ितों को वापस मिले पैसे
RANCHI : नक्सलियों पर नकेल कसने वाली झारखंड पुलिस अब अपना फोकस साइबर अपराधियों की तरफ कर चुकी है. साल 2026 के पहले सात महीने में ही झारखंड में साइबर ठगों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी आर्थिक चोट की है. इस साल जनवरी से जुलाई तक साइबर ठगी की शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने ठगों से जुड़े बैंक खातों में गई करोड़ों रुपये फ्रीज करवा पब्लिक की गाढ़ी कमाई बचा ली गई. वहीं, जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद करीब 19 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस भी दिलाए गए.
साइबर अपराध के खिलाफ जंग
झारखंड में पुलिस की लड़ाई सिर्फ बंदूक और बारूद के खिलाफ नहीं है, बल्कि अपराध की आर्थिक रीढ़ तोड़ने पर भी जोर है. पुलिस मुख्यालय के जनवरी से जुलाई 2026 तक के आंकड़े इसकी एक दिलचस्प तस्वीर पेश करते हैं. साइबर ठगी के मामलों में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब 150 करोड़ रुपये फ्रीज कराए हैं.
पुलिस के अनुसार यह वह रकम है जिसे साइबर ठगी से जुड़े बैंक खातों में फ्रीज कराया गया. यानी पैसा अपराधियों तक पहुंचने से पहले बैंकिंग सिस्टम में रोक दिया गया. इनमें से 19 करोड़ रुपये ठगी के पीड़ितों को वापस भी दिलाए जा चुके हैं.
झारखंड पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, प्रतिबिंब और डायल-1930 पर जनवरी से जुलाई 2026 तक कुल 77,503 शिकायतें दर्ज हुईं. इन शिकायतों के आधार पर पुलिस और संबंधित एजेंसियों ने साइबर ठगी में इस्तेमाल बैंक खातों की पहचान कर उनमें मौजूद रकम को फ्रीज कराया.
ठगों के हाथ से निकला 150 करोड़ का कंट्रोल
साइबर ठग किसी व्यक्ति को शिकार बनाने के बाद रकम को तेजी से एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करते हैं. ऐसे में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती पैसा निकलने से पहले बैंक खाते को फ्रीज कराना होता है. झारखंड पुलिस की कार्रवाई में 150 करोड़ रुपये ऐसे खातों में फ्रीज कराए गए, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी के नेटवर्क में किया जा रहा था. यानी पुलिस ने बड़ी रकम को संदिग्ध खातों से आगे ट्रांसफर होने से रोक दिया.
19 करोड़ रुपये पीड़ितों की जेब में वापस
साइबर ठगी के मामलों में पैसा वापस मिलना पीड़ितों के लिए सबसे बड़ी राहत होती है. जनवरी से जुलाई तक पुलिस की कार्रवाई के बाद करीब 19 करोड़ रुपये वास्तविक पीड़ितों को लौटाए गए. यह रकम उन लोगों की है, जो ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, लिंक, ऐप और अन्य साइबर तरीकों से अपने पैसे गंवा बैठे थे. शिकायत के बाद पुलिस, बैंक और साइबर एजेंसियों के समन्वय से रकम को ट्रेस कर वापस कराने की प्रक्रिया शुरू की गई.
22 हजार से ज्यादा मोबाइल नंबर और 10 हजार IMEI ब्लॉक
साइबर अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ने के साथ-साथ उनके तकनीकी नेटवर्क पर भी कार्रवाई की गई है. जनवरी से जुलाई तक पुलिस ने 22,165 मोबाइल नंबर ब्लॉक कराए. इसके अलावा साइबर अपराध में इस्तेमाल हो रहे 10,054 IMEI नंबर भी ब्लॉक किए गए.
साइबर ठगी के खिलाफ सबसे बड़ी लड़ाई अब पैसे बचाने की
झारखंड में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस की लड़ाई अब केवल ठगों को गिरफ्तार करने तक सीमित नहीं है. पुलिस का सबसे बड़ा लक्ष्य है कि ठगी की रकम अपराधियों के हाथ से निकलने से पहले उसे रोक दिया जाए. 77 हजार से अधिक शिकायतों, 150 करोड़ रुपये फ्रीज करने और 19 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस दिलाने का आंकड़ा बताता है कि साइबर अपराध का नेटवर्क कितना बड़ा है. साथ ही यह भी कि समय पर शिकायत होने पर ठगी का पैसा बचाया और वापस पाया जा सकता है.
गिरफ्तारी का आंकड़ा भी बढ़ा
वर्ष 2026 में जनवरी से जून तक साइबर अपराध से जुड़े मामलों में पुलिस ने बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर 486 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है. झारखंड पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए जिला पुलिस द्वारा लगातार स्पेशल ड्राइव चलाया जा रहा है. इसी अभियान के तहत अलग-अलग जिलों में छापेमारी और कार्रवाई कर साइबर ठगी में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है.
प्रतिबिंब ऐप से भी 336 साइबर अपराधी गिरफ्तार
साइबर अपराधियों की पहचान और उन तक पहुंचने में झारखंड पुलिस के प्रतिबिंब ऐप की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. वर्ष 2026 में जनवरी से जुलाई तक प्रतिबिंब ऐप से संबंधित 121 कांडों में 336 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. इस दौरान पुलिस ने 545 मोबाइल फोन और 655 सिम कार्ड बरामद किए.
साइबर ठगी होने पर गोल्डन ऑवर में उठाएं जरूरी कदम
सीआईडी के अनुसार साइबर ठग रोज नए-नए तरीकों से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं. कभी रिवार्ड और कैशबैक का लालच दिया जाता है, तो कभी लॉटरी, नौकरी, ऑनलाइन मदद या अन्य बहाने से लोगों से पैसे ठग लिए जाते हैं. फोन कॉल, एसएमएस, ई-मेल और इंटरनेट के जरिए होने वाली इन ठगी से बचने के लिए जागरूक रहना बेहद जरूरी है. लेकिन अगर किसी के साथ साइबर ठगी हो भी जाए, तो घबराने की जरूरत नहीं है. ठगी के बाद के शुरुआती 2 से 3 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. इस दौरान तुरंत कार्रवाई करने से ठगी गई रकम को रोकने या वापस दिलाने की संभावना बढ़ सकती है.
साइबर ठगी का भी होता है गोल्डन ऑवर
जिस तरह सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाना जरूरी होता है, उसी तरह साइबर फ्रॉड के मामले में भी तुरंत शिकायत करना जरूरी है. ठगी के तुरंत बाद जितनी जल्दी पुलिस और बैंक को जानकारी दी जाएगी, उतनी ही जल्दी पैसों के लेन-देन को रोकने की कोशिश की जा सकेगी.
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