99 हजार करोड़ से अधिक के 14 एमओयू पर सियासत गर्म, JMM ने गिनाईं उपलब्धियां, BJP ने उठाए सवाल
RANCHI : नेशनल स्टेकहोल्डर्स कन्सल्टेशन के माध्यम से झारखंड में निवेश के द्वार खुलने पर राजनीतिक बहस छिड़ गई है. सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की इस पहल को बड़ी पहल करार देते हुए राज्य में आने वाले समय में बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना जताई है.
जेएमएम के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पाण्डेय ने कहा कि सकारात्मक सोच के साथ सफलता हासिल हुई है और यह सिर्फ पहल ही नहीं बल्कि ठोस प्रयास था, जिसमें सफलता मिली है. उन्होंने कहा कि दो दिवसीय नेशनल स्टेकहोल्डर्स कन्सल्टेशन में बड़ी कंपनियों के साथ 14 एमओयू हुए हैं और करीब 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश की सहमति बनी है. अब युवा झारखंड चलेगा नहीं, रेंगेगा नहीं, बल्कि दौड़ेगा.
मनोज पांडे ने विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर तंज कसते हुए कहा कि झारखंड विरोधी विपक्ष नकारात्मक सोच वाला है. उसकी बात करना उचित नहीं है
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि दावोस यात्रा के दौरान भी बड़ी-बड़ी बातें की गई थीं. जनता को बताना चाहिए कि जमीन पर कितना काम हो पाया. पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता दीनदयाल बरनवाल ने कहा कि दावोस यात्रा में हुए खर्च और उसका फलाफल क्या निकला, यदि सरकार नहीं बता पाती है तो कहीं ना कहीं यह घूमने और शहर सपाटे करने का एक इवेंट के रूप में माना जाना चाहिए. इसी तरह इस बार भी जो नई दिल्ली में इन्वेस्टर्स समिट सरकार ने किया है, उसका फलाफल कुछ भी नहीं निकलेगा.
दो दिनों तक चला नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन
नई दिल्ली में आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन का समापन हो गया है, जिसमें झारखंड सरकार ने 14 एमओयू किए. सरकार ने 'नेशनल स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन 2026' के दौरान इंडस्ट्री, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और पर्यटन जैसे सेक्टर में 99 हजार करोड़ से अधिक के 14 एमओयू पर हस्ताक्षर किए. इनमें से 10 समझौते इंडस्ट्री विभाग ने, दो इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी विभाग ने और दो पर्यटन विभाग ने किए. इनमें मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पर्यटन, इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर शामिल हैं.
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