मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के अंतर्गत शहरी क्षेत्र नगर निकाय के वार्ड 47 से 53 तक के समूह की महिलाए अभी तक योजना के लाभ से है वंचित
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के अंतर्गत शहरी क्षेत्र नगर निकाय के वार्ड 47 से 53 तक के समूह की महिलाए अभी तक योजना के लाभ से है वंचित
गया । मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से जुड़ने की प्रक्रिया को शहरी क्षेत्र में स्वयं सहायता समूह के माध्यम से संचालित किया जाता है। इस योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु महिला क्षेत्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संगठन ALO अथवा नगर निगम द्वारा निर्धारित समूह से संबंध होना अनिवार्य है। गया निगम के वार्ड 47 से 53 तक के क्षेत्र को प्रखंड मानपुर की जगह प्रखंड चंनौती में यर्था दिया गया है। जिसके कारण योजना संघालन में गंभीर व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। प्रखंड चंनौती में पदस्थ अधिकारी रश्मि कुमारी द्वारा अनियमितता की जाने की शिकायतें निरंतर प्राप्त हो रही है, जिससे वास्तविक लाभार्थी महिलाओं को योजना को लाभ नहीं मिल पा रहा है। वार्ड 47 से 53 के क्षेत्र को पुनः प्रखंड मानपुर के अंतर्गत चिन्हित किया जाए और महिलाओं को योजना से जोड़ने की प्रक्रिया को पारदर्शी एवं सुगम बनाया जाए। अनियमित की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करते हुए अधिक से अधिक शहरी महिलाओं को इस योजना का लाभ सुनिश्चित कराया जाए। स्थानीय जीविका ने इसकी जानकारी जिला प्रशासन अधिकारियों को भी लिखी में दिए है लेकिन अभी तक इसपर किसी भी तरह का जवाब नहीं मिला है आखिर कब तक दस्तावेज को अधिकारियों द्वारा अनदेखी किया जाएगा। स्वरोजगार का सपना दिखाकर लाभ न मिलने से हजारों महिलाओं के रोजगार के सपने टूट रहे हैं। अधिकारी इस मामले पर चुप्पी क्यो साधे हुए हैं। महिलाएं सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और समस्या के समाधान की मांग लगातार कर रही हैं। बिहार सरकार द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई। नगर निगम वार्ड संख्या 47 से 53 तक के हज़ारों पात्र महिलाएं इस योजना के तहत मिलने वाले स्वरोजगार के लिए आवेदन कर चुकी हैं, लेकिन महीनों बाद भी उन्हें न तो वित्तीय सहायता मिली है और न ही कोई स्पष्ट कारण बताया गया है। वहीं ममता देवी, बेवी देवी, सुग्गी देवी, प्रियंका देवी, कांति देवी, रीता देवी, रेखा देवी, रूबी देवी, पीहू देवी, सुलेखा देवी इत्यादि कई जीविका सदस्य महिलाओ ने बताया कि हमने महीने पहले आवेदन किया था, बैंक पासबुक, आधार कार्ड सब जमा किए, लेकिन अभी तक न पैसे आए, न कोई जवाब मिला। सरकार कहती है आत्मनिर्भर बनो, लेकिन जब मदद ही नहीं मिलेगी तो कैसे बनेंगे आत्मनिर्भर। आवेदन के बाद भी निराशा ही मिला। यह योजना महिलाओं को दस हजार रुपया तक की सहायता देती है, पर जमीनी स्तर पर इसका क्रियान्वयन ठीक नहीं। इस संबंध में स्थानीय जीविका प्रखंड परियोजना प्रबंधक से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। जबकि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का लास्ट किस्त जारी करने का 25 दिसंबर 2025 ही है। इससे पहले योजना का लाभ नहीं मिलता है तो यह स्थिति उन हज़ारों महिलाओं के सपनों पर पानी फेर रही है, जो इस योजना के माध्यम से अपना छोटा व्यवसाय शुरू करना चाहती थीं।