बाबू राम नारायण सिंह के विचार सदा लोगों का मार्ग प्रशस्त करता रहेगा  - बटेश्वर प्रसाद मेहता 

बाबू राम नारायण सिंह की 142 वीं जयंती धूमधाम से मनाई

बाबू राम नारायण सिंह के विचार सदा लोगों का मार्ग प्रशस्त करता रहेगा  - बटेश्वर प्रसाद मेहता 

महान स्वाधीनता सेनानी बाबू राम नारायण सिंह की 142 वीं जयंती पर स्थानीय स्वर्ण जयंती पार्क में सागर भक्ति संगम के तत्वधान में एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में सम्मिलित लोगों ने महान योद्धा बाबू राम नारायण सिंह की तस्वीर पर पुष्प अर्पित की। अध्यक्षता के.सी.मेहरोत्रा एवं संचालन ब्रजनंदन प्रसाद ने किया।

संगम ने बाबू राम नारायण सिंह की प्रतिमा हजारीबाग में स्थापित करने के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा 

इस अवसर पर संगम के सदस्यों ने एक प्रस्ताव पारित कर देश के माननीय प्रधानमंत्री को पत्र लिखा , जिसमें मांग किया कि महान स्वाधीनता सेनानी बाबू राम नारायण सिंह की एक आदम कद प्रतिमा हजारीबाग में लगाई जाए।
    मुख्य अतिथि झारखंड स्वाधीनता सेनानी विचार मंच के केंद्रीय अध्यक्ष बटेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि बाबूराम नारायण सिंह के विचार सदा देशवासियों का मार्ग प्रशस्त करता रहेगा।  उनका संपूर्ण जीवन देश की आजादी और राष्ट्र सेवा में बीता था। 
अध्यक्षता करते हुए शिक्षाविद  के.सी.मेहरोत्रा ने कहा कि बाबू राम नारायण सिंह स्वाधीनता आंदोलन के अप्रतिम योद्धा थे। उन्हें देखना और सुनने का मुझे अवसर प्राप्त हुआ था। उनकी सादगी से वर्तमान पीढ़ी के नेताओं को सीख लेने की जरूरत है।
 विजय केसरी ने कहा कि वे आजीवन सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते रहे । उन्होंने  सदा अन्याय प्रतिकार किया था ।  वे पृथक झारखंड निर्माण के पक्षधर रहे थे। आज की बदली राजनीतिक परिस्थिति में देश के नेताओं के बाबूराम नारायण सिंह के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।
    शिक्षाविद ब्रजनंदन प्रसाद ने कहा कि बाबू राम नारायण सिंह के जीवन से हम लोगों को सबक लेनी चाहिए । वे सादा जीवन और उच्च विचार के प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन भारत की आजादी के नाम कर दिया था। 
  समाजसेवी संजय खत्री ने कहा कि  बाबू राम नारायण सिंह का संपूर्ण जीवन भारत की आजादी के  संघर्ष और देश  की आजादी के बाद आजाद भारत की रक्षा के इर्द-गिर्द घूमता है ।  उन्होंने स्वार्थ की राजनीति कभी नहीं की ।
  समाजसेवी सतीश  होर्रा ने कहा कि बाबू राम नारायण सिंह का व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों बेमिसाल था।  इसलिए बाबू राम नारायण सिंह की जीवनी को  पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए 
   आयोजित कार्यक्रम में गोपी कृष्ण सहाय, उषा सहाय, मनोज गुप्ता, अजीत गुप्ता,  कृष्ण मुरारी गुप्ता, डॉ बीना अखौरी, इंद्र सोनी, अजीत विश्वकर्मा, बैजनाथ जायसवाल, शंभू शरण सिंह, अशोक प्रसाद, महावीर ठाकुर, अखिलेश सिंह, मिथुन राणा, सुरेश मिस्त्री आदि सम्मिलित हुए।  धन्यवाद ज्ञापन संजय खत्री ने किया।