मनीष गोरख महाले, राष्ट्रपति के द्वारा दूसरी बार अगम्य वीरता के लिए प्रतिष्ठित पुलिस वीरता पदक से नवाजा
मनीष गोरख महाले, राष्ट्रपति के द्वारा दूसरी बार अगम्य वीरता के लिए प्रतिष्ठित पुलिस वीरता पदक से नवाजा

गयाजी।मनीष गोरख महाले, द्वितीय कमान अधिकारी का जन्म 1978 को महाराष्ट्र राज्य के धुले शहर में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था।उनके पिता स्वर्गीय श्री गोरख विठ्ठल महाले एक सरकारी कर्मचारी थे और माता श्रीमती उषा एक गृहिणी हैं।उनके बडे भाई मनोज कुमार है जो वर्तमान में महाराष्ट्र के सी.एम. कार्यालय में विशेष कार्य अधिकारी है और एक छोटी बहन मंजूषा है जो शादी के पश्चात सूरत, गुजरात में बस गई है।अधिकारी ने 2008 में श्रीमती नम्रता से विवाह किया और उनके 2 बच्चे हैं जिनके नाम हिमांशु और यशिता है।अधिकारी ने महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में अपनी 5 वीं की पढ़ाई शेठ के . डी. हायस्कूल, तळोदा, मे पूरी करने के बाद, जवाहर नवोदय विद्यालय, अक्कलकुवा से मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की। तत्पशात व पुनः तलोदा, में न्यू इंग्लिश स्कूल में 12 उत्तीर्ण कर अधिकारी ने महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, धुले और अहमदनगर, महाराष्ट्र से बी.एससी. एग्रीकल्चर और एम.एससी. इन एग्रीकल्चर माइक्रोबायोलॉजी की पढ़ाई पूरी की।अधिकारी 2005 में UPSC की परीक्षा उत्तीर्ण होकर सहायक कमांडेंट के पद पर सीधे नियुक्त राजपत्रित अधिकारी के रूप में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में शामिल हुए। उन्होंने 2006-2008 तक जम्मू-कश्मीर के बारामुल्ला में 184 बटालियन में सेवा की। बाद में छत्तीसगढ़ के सुकमा और दंतेवाड़ा के घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 201 कोबरा यूनिट (दृढ कार्रवाई के लिए कमांडो बटालियन) में शामिल हुए। इसके अलावा, उन्होंने असम के चिरांग और बोंगाईगांव के पूर्वोत्तर चरमपंथ प्रभावित जिलों में 156 बटालियन में सेवा की। इसके बाद,वह उप कमांडेंट इंटेलिजेंस के रूप में आई.जी.कार्यालय नवी मुंबई में शामिल हुए और महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में अपनी सेवाए दी। सेकेंड इन कमांड के रूप में पदोन्नति पर उन्हें 180 बटालियन, त्राल, अवंतीपुरा, पुलवामा, जम्मू और कश्मीर में तैनात किया गया। उक्त क्षेत्र अति दुर्गम और आतंकवादियों का गढ़ माना जाता है। अधिकारी ने वहां विभिन्न आतंकवाद विरोधी अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया और 02/06/2020 को जैश-ए-मोहम्मद संगठन के 2 खूंखार कमांडरों को ढेर करने में उनकी वीरतापूर्ण कार्रवाई के लिए जनवरी, 2023 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा वीरता के लिए प्रतिष्ठित पुलिस पदक (Police Medal for Gallantry) से सम्मानित किया गया। और आगे 20 दिसंबर 2020 को अधिकारी गया बिहार में 205 कोबरा इकाई में शामिल हुए और बिहार में नक्सलियों के गढ़ चक्करबंधा वन क्षेत्रों, कोलेश्वरी क्षेत्रों और छत्तीसगढ़ में विशेष अभियान में नक्सलियों के खिलाफ सफल ऑपरेशन किए। 21/03/2021 को, अधिकारी ने एक विशिष्ट खुफिया आधारित ऑपरेशन में चक्करबंधा वन क्षेत्र में 4 खूंखार नक्सल कमांडरों को ढेर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिसके लिए उनको पुनः एकबार राष्ट्रपति द्वारा वीरता पदक ( Medal For Gallantry) से नवाजा गया है।
2020 से 2024 तक 205 कोबरा में अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद, अधिकारी वर्तमान में भोपाल के बंगरसिया के पास 107 रैपिड एक्शन फोर्स में तैनात हैं। लगभग 19 वर्षों की अपनी सेवा अवधि के दौरान, अधिकारी ने देश के लगभग सभी अशांत क्षेत्रों में सेवा की है, और अपने उल्लेखनीय ऑपरेशनल उपलब्धियों की वजह से उन्हें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के गोल्डन डी.जी. डिस्क के अलावा दो बार वीरता के लिए पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। यह तलोदा और सारे महाराष्ट्र के लिए गौरव की बात है।