'हिंदी की वैश्विक विकास यात्रा और भारत' पर विचार गोष्ठी संपन्न
हिंदी लगातार वैश्विक भाषा की ओर बढ़ती चली जा रही है। हिंदी विश्व के 222 विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही है। हिंदी को वर्तमान स्वरूप प्रदान करने ने में लगभग 3200 वर्षों का सफर तय करना पड़ा है।
विश्व हिंदी दिवस पर सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था सागर भक्ति संगम के तत्वाधान में स्थानीय स्वर्ण जयंती पार्क में 'हिंदी की वैश्विक विकास यात्रा और भारत' विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संगम के सदस्यों ने अपने दैनांदिन जीवन में हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करने का संकल्प लिया।
अध्यक्षता करते हुए कथाकार विजय केसरी ने कहा कि हिंदी विश्व की तीसरी सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषा के रूप में प्रतिष्ठित हो रही है । हिंदी लगातार वैश्विक भाषा की ओर बढ़ती चली जा रही है। हिंदी विश्व के 222 विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही है। हिंदी को वर्तमान स्वरूप प्रदान करने ने में लगभग 3200 वर्षों का सफर तय करना पड़ा है। हिंदी की विकास यात्रा में प्रवासी भारतीयों का महत्वपूर्ण योगदान है। हिंदी की वैश्विक विकास यात्रा में भक्ति गाल के कवियों, श्रीमद्भागवत गीता एवं रामचरित मानस आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
शिक्षाविद के.सी.मेहरोत्रा ने कहा कि हिंदी की रफ्तार धीरे-धीरे जरूर है, लेकिन जो भी हिंदी के संपर्क में आए हिंदी का होकर रह गए। फादर कामिल बुल्के भारत आए थे,बच्चों को शिक्षित करने के लिए लेकिन जब उनका रामचरित मानस से साक्षात्कार हुआ ,थब वे हिंदी का होकर रह गए। हिंदी एक मीठी भाषा है। यह भाषा कवियों, लेखकों, साहित्यकारों को उनके रचनाकर में पंख प्रदान करती है। हिंदी को आगे बढ़ाने में हिंदी भाषी सहित देश के गैर हिन्दी भाषियों के अवदान को कभी विशामृत नहीं किया जा सकता है।
समाजसेवी ब्रजनंदन प्रसाद ने कहा कि हम सबों को अपने दैनंदिन जीवन में हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करना चाहिए । हिंदी प्रेम की भाषा है। हिंदी गर्व की भाषा है। हमारी मातृभाषा है। हिंदी अपनी प्रांतीय भाषाओं को लेकर आगे बढ़ रही है। हिंदी की विकास यात्रा में देश के साहित्यकारों के अवदान को कभी विस्मृत नहीं किया जा सकता है यही कारण है कि हिंदी विश्व के कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही है।
समाजसेवी सतीश होर्रा ने कहा कि भारत की विकास यात्रा पर समस्त देशवासियों को गर्व है । हिंदी की विकास यात्रा में देश की अन्य भाषाओं के अवदान को कभी नकारा नहीं जा सकता है। हिंदी भारत से निकलकर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी बोले जाने वाली भाषा के रूप में प्रतिष्ठित हो रही है। यह हिंदी भाषा के लिए गौरव की बात है। विश्व के 222 विश्वविद्यालय में हिंदी पढ़ाई जा रही है। हिंदी में दर्ज किताबों पर लगातार शोध हो रहे हैं।
इन वक्ताओं के अलावा डा.वीणा अगोरी, शंभू शरण सिन्हा, गोपी कृष्ण सहाय, उषा सहाय, कृष्णा सोनी, अखिलेश सिंह, प्रदीप विश्वकर्मा,सुरेश मिस्त्री, अशोक प्रसाद, आदि ने भी अपने अपने विचार रखें। सभा का संचालन ब्रजनंदन प्रसाद एवं धन्यवाद ज्ञापन कृष्णा सोनी ने किया।