'हिंदी' विश्व भर में मजबूत उपस्थिति दर्ज करती चली जा रही है
( 10 जनवरी, 'विश्व हिंदी दिवस' पर विशेष )
आज हिंदी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट भाषा की पहचान बनाने में सफल हुई है। वैश्विक स्तर पर हिंदी के कदम धीरे-धीरे बढ़ते चले जा रहे हैं। यह हिंदी के लिए गर्व की बात है। साथ ही हिंदी भारत की पहली बोलचाल की भाषा के रूप में प्रतिष्ठित हो रही है । विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा हिंदी के रूप में प्रतिष्ठित हो रही है। यह हिंदी के बढ़ते कदम की निशानी है। हिंदी भाषा भारत से निकलकर विश्व समुदाय के बीच में भी लोकप्रिय हो रही है, इसके पीछे सबसे बड़ा कारक है, हिंदी भाषा की सहजता, सरलता, मिठास और सहज व्याकरण है । हिंदी भाषा अनुरागियों, साहित्यकारों व रचनाकारों ने वैश्विक स्तर पर हिंदी के लिए अथक प्रचार प्रसार किया है।। उन सबों का यह प्रयास आज भी जारी है । देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर हिंदी में भाषण देकर हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती के साथ स्थापित करने का एक सफल प्रयास किया था। आज भारत से प्रकाशित कई पत्र पत्रिकाएं विदेशों में बड़े ही चाव से पढ़े जा रहे हैं। आज कई विदेशी लेखक हिंदी मैं लिखकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित कर रहे हैं। हिंदी भाषा को यह सम्मान हिंदी वासियों ने दिलाया है।
देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजराती भाषी होने के बावजूद राष्ट्रीय - अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी में ही अपनी बातों को रखते हैं। यह हिंदी के लिए गौरव की बात है। उन्होंने भी यह माना कि हिंदी ही भारत की सबसे बोली जाने वाली भाषा है। विश्व हिंदी दिवस पर हिंदी अनुरागियों की यह संकल्प लेना चाहिए कि हिंदी विश्व की एक प्रमुख भाषा के रूप में आगे बढ़ते रहे । देश की आजादी के बाद इस निमित्त हिंदी भाषा अनुरागियों ने बहुत ही सार्थक प्रयास किया है । फलस्वरुप हिंदी विश्व की एक मजबूत भाषा के रूप में स्थापित हो पाई है। हिंदी विश्व भर में लगभग दो सौ से अधिक विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही है । हिंदी पर नियमित शोध कार्य हो रहे हैं। हिंदी भारत के साथ विश्व की प्रतिष्ठित भाषा के रूप में जानी जा रही है। भाषा है।
विश्व हिंदी दिवस पर जब हिंदी भाषा पर पर लिख रहा हूं, तब स्वामी विवेकानंद का स्मरण करना जरूरी हो जाता है। ।स्वामी विवेकानंद ने विश्व धर्म सभा में उपस्थित सभी विचारकों को भारत के सभी हिंदुओं की ओर से धन्यवाद दिया था। स्वामी विवेकानंद एक बांग्ला भाषी संत थे। जिनका लालन पालन बंगाली विधि से हुआ था। लेकिन उन्होंने बांग्ला भाषा के अलावा हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी भाषा पर पांडित्य पूर्ण ज्ञान अर्जित किया था। वे धाराप्रवाह हिंदी, अंग्रेजी, बंग्ला और संस्कृत बोलते थे। उन्हें एक भारतीय होने पर गर्व था। वे इस बात को लेकर अपने आप को भाग्यशाली मानते थे कि मेरा जन्म भारत जैसे गौरवशाली देश में हुआ। हिंदी के प्रति उनकी धारणा बहुत ही सराहनीय थी। वे जितना बांग्ला भाषा से प्रेम करते थे, उतना ही हिंदी और संस्कृत से भी प्रेम करते थे। विश्व की सबसे अधिक किसी एक महापुरुष की रचनावाली बिक्री के शीर्ष पर स्वामी विवेकानंद की रचनावली है। यह रचनावली हिंदी सहित विश्व की कई प्रमुख भाषाओं मैं अनुवादित है। इस रचनाबली की हिंदी की लाखों प्रतियां बिकती है। हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करने में स्वामी जी की रचनावली के अवधान को विस्मृत नहीं किया जा सकता है।
हिंदी के संदर्भ में कहा जाता है कि हिंदी की विकास यात्रा में कई वर्ष लगे थे । तब हिंदी एक भाषा के रूप में आकार ग्रहण कर पाई थी । राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलवाने में महती भूमिका अदा की थी। हिंदी को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय क्षितिज पर पहचान दिलाने में स्वाधीनता सेनानी स्वर्गीय खत्री जी के सहयोग को विस्मृत नहीं किया जा सकता है।
हिंदी एक मीठी भाषा है। हिंदी प्रेम की भाषा है । हिंदी लेखकों और कवियों की भाषा है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी में निरंतर काम हो रहे हैं। खड़ी हिंदी के जनक भारतेंदु हरिश्चंद्र ने हिंदी में रचनाकर हिंदी को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया था । आज भी उनकी कहानियां और उपन्यास बहुत ही चाव के साथ पढ़े जाते हैं। भक्ति काल के संत कवि कबीर, सूरदास, रहीम, नरहरी, रैदास, तुलसीदास के दोहे आज भी हिंदी भाषियों को प्रेरित करते नजर आते रहे हैं। इनकी रचनाओं का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद यह साबित करता है कि हिंदी की रचनाएं कितनी प्रभावशाली हैं।
हिंदी प्यारी व मीठी भाषा है। जिसने भी हिंदी का पान किया। समझो! वह हिंदी का हो गया । फादर कामिल बुल्के पश्चिम से ईसाई मिशनरी के लिए एक शिक्षक के तौर पर भारत की आए थे । जब वे भारत में सर्वाधिक बोली जाने वाली हिंदी भाषा का पान किया, सदा सदा के लिए हिंदी का हो गए । जब उन्होंने हिंदी का अध्ययन प्रारंभ किया, तब उन्हें हिंदी की व्यापकता का अहसास हुआ । उन्होंने हिंदी में बीए ऑनर्स, एमएऔर पीएचडी भी किया। हिंदी अध्ययन के दौरान उन्हें तुलसीकृत रामचरितमानस से सामना हुआ। उन्होंने रामचरितमानस का गहराई से अध्ययन किया । वे रामचरितमानस के अध्ययन में ऐसा लीन हो गए, जैसे उन्हें भगवान राम का साक्षात्कार हो गया हो। रामचरितमानस से प्रेरित होकर उन्होंने भगवान राम के संबंध में विशेष जानकारी के लिए संपूर्ण देश की यात्रा की । देश के विभिन्न प्रांतों में भगवान राम पर वर्णित विभिन्न भाषाओं के रामायण का अध्ययन किया । तब उन्होंने एक वृहद रामायण की रचना की । उनकी यह कृति कालजई कृति बन गई । हिंदी प्रेम ने उनसे हिंदी का शब्दकोश तक लिखवा दिया। भारत में उनका संपूर्ण जीवन हिंदी शिक्षा ग्रहण और लेखन में बीता था। अर्थात उन्होंने भारत आकर अपना संपूर्ण जीवन हिंदी को ही समर्पित कर दिया था । यह हिंदी की विशालता, सार्वभौम और व्यापकता का परिचायक है ।
हिंदी लगातार विश्व भर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करती चली जा रही है। आज हिंदी एक बहुत ही मजबूत स्थिति में है। हिंदी भाषा की इन बुलंदियों के बावजूद अपने ही देश में कई लोग हिंदी को कम ज्ञान वालों की भाषा कहते हैं । दूसरी ओर अंग्रेजी को अधिक ज्ञान वालों की भाषा कहते हैं। देश की आजादी के बाद हिंदी जिस तरह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित की है। हिंदी को कम ज्ञान वालों की भाषा कहने वालों का भ्रम टूट गया है। आज हिंदी में विज्ञान, तकनीकी, कानून, चिकित्सा से संबंधित हर तरह की पुस्तकें उपलब्ध हैं। जब देश परतंत्र था। हिंदी का विकास रुका हुआ था। देश की आजादी के बाद हिंदी लगातार बढ़ती चली जा रही है। हिंदी की खासियत यह है कि हिंदी अपनी प्रांतीय भाषाई बहनों को भी आगे बढ़ाती चली जा रही है । इसी का प्रतिफल है कि हिंदी को देश के सभी प्रांतों फैलने का अवसर मिलता चला जा रहा है। हिंदी के विषय में एक यह भ्रम भी फैलाई जा रही है कि हिंदी सिर्फ हिंदी भाषियों की ही भाषा है। यह पूरी तरह झूठ है । आज हिंदी संपूर्ण विश्व की एक लोकप्रिय भाषा बनने की ओर कदम बढ़ा चुकी है । हिंदी पर संपूर्ण देशवासियों सहित विश्व के हिंदी प्रेमियों को गर्व है। विश्व हिंदी दिवस पर हम सब इतना जरूर कर सकते हैं कि देश अथवा विदेशों में रह रहे अपने किसी एक मित्र को हिंदी में जरूर संवाद भेजें । आपका यह संवाद हिंदी के प्रचार प्रसार में मील का पत्थर साबित होगा।