रतन वर्मा और उनका साहित्य - पुस्तक एक अनमोल धरोहर 

(6 जनवरी, प्रख्यात कथाकार रतन वर्मा के 76 वें जन्मदिन पर विशेष)

रतन वर्मा और उनका साहित्य - पुस्तक एक अनमोल धरोहर 

  'रतन वर्मा और उनका साहित्य' शीर्षक से नूतन वर्ष पर कथाकार डॉ विकास कुमार के संपादन में एक पुस्तक आ रही है। उक्त पुस्तक में प्रख्यात कथाकार रतन वर्मा के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से व्याख्या की गई है। संपादक डॉ विकास कुमार ने बहुत ही मेहनत और लगन से पुस्तक की सामग्री देश भर के लेखकों, कथाकारों, समीक्षकों और साहित्यकारों से लिखवाकर कर इस पुस्तक में दर्ज की है। इसके साथ ही उनके जीवन से जुड़ी गई महत्वपूर्ण तथ्यों को पहली बार को उजागर किया गया है।  वे कैसे जीवन के झंझावातों से मुकाबला करते हुए, आगे बढ़े हैं। उन्हें खुद भी मालूम नहीं था कि वे  एक कथाकार बनेंगे। लेकिन जो मुकद्दर में लिखा था, वही हुआ इसके । रतन वर्मा और उनका साहित्य में उनका एक लंबा इंटरव्यू भी दर्ज है। यह उनके जीवन का सबसे लंबा इंटरव्यू है। यूं कह लीजिए यह इंटरव्यू  उनकी संक्षिप्त आत्मकथा है। रतन वर्मा और उनका साहित्य पुस्तक हिंदी सेवियों के लिए एक अनमोल धरोहर के समान सिद्ध होगी। नवोदित लेखकों को उक्त पुस्तक से एक लेखक बनने की प्रक्रिया और उसके संघर्ष को पढ़ने का अवसर प्राप्त हो पाएगा। 
  कथाकार रतन वर्मा का रचना  संसार बहुत ही विस्तृत  है। । बीते पांच दशकों से लगातार हिंदी साहित्य की साधना में रत हैं। एक के बाद एक उनकी कहानियां विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में दस्तक देती रहती हैं। वहीं दूसरी ओर उनकी कहानियों,कविताओं और उपन्यासों पर नियमित समीक्षाएं छपती रहती हैं।  विभिन्न साहित्यिक मंचों से उनकी कहानियों पर चर्चा भी होती रहती हैं। रतन वर्मा का व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों समाज के लिए अनुकरणीय बन गया है। हिंदी साहित्य की साधना ही उनके जीवन का उद्देश्य बन कर रह गया है। उनके  शब्दों में 'अब जो शेष जीवन है, उसे भी साहित्य को अर्पित कर देना चाहते हैं। जीवन से उन्हें कोई शिकायत नहीं है। जीवन ने उन्हें भरपूर दिया है। किसी से कोई मलाल नहीं। सब अपने हैं, कोई बेगाना नहीं'। उन्होंने अब तक जीवन को  आनंद के साथ जिया है।‌ आगे शेष जीवन को भी आनंद के साथ जीना चाहते हैं। उन्होंने जो कुछ भी रचा है, परिवार के साथ रहकर, पारिवारिक और सामाजिक दायित्वों को पूरी तरह निभाकर । उनकी कहानियों में हताशा बोलकर कुछ भी नहीं है बल्कि हताशा के गर्भ से जीवन की जिजीविषा प्रस्तुत होती हैं । इससे उत्पन्न  संघर्ष चेतना को जगा जाती हैं। इनके तमाम कहानियों और उपन्यासों के पात्र हमारे आसपास के गली, मोहल्ले के समाज की संघर्षशील जन हैं ,जो समाज में एक नया बदलाव लाना चाहते हैं । समाज के लिए कुछ कर  गुजरना चाहते हैं। इनकी  कहानियों के पात्र अपने दैनंदिन कार्यों  के माध्यम से एक आदर्श स्थापित करते हैं।
 ‌रतन वर्मा के कथा-साहित्य में मिट्टी की गंध और जीवन की धड़कन समाहित है। ये उद्दाम जिजीविषा के कथाकार हैं। इनकी कहानियों में दो जून की रोटी के लिए जद्दोजहद करते वाले श्रमिक मजदूर, प्राइवेट फार्म में छोटी नौकरियों में जुते कामगार और छोटी तनख्वाह पाने वाले सरकारी सेवक के रूप में सैकडों ऐसे पात्र हैं, जो परेशान तो हैं, किंतु हताश नहीं हैं। इनकी स्त्री पात्र अत्यंत जुझारू और संघर्षशील हैं। कामकाजी महिलाएं प्रतिकूलताओं के साथ लड़ती हुईं खुद को साबित करती हैं। 'गुलाबिया' एवं 'दस्तक' जैसी कहानियां स्त्री-अस्मिता को अपने ढंग से स्थापित करती हैं। 'नेटुआ करम बड़ा दुखदाई' जैसे उपन्यास में एक लोक नर्तक की पीड़ा, संत्रास और संघर्ष शीलता को बखूबी उजागर किया  गया है।
 कहानीकार रतन वर्मा की दृष्टि की परिधि बड़ी व्यापक है। समाज के बदलते परिदृश्य, एक - दूसरे को मात देने की दौड़,  परिवार के बनते बिगड़ते रिश्ते, वोट की राजनीति, और सत्ता की स्वार्थ युक्त राजनीति पर वे चुप नहीं बैठते, बल्कि अपनी कहानियों के माध्यम से समाज में नव जागरण पैदा करते हैं।  उनकी कहानियां यथार्थ की भूमि पर को स्पर्श करती नजर आती हैं । समाज के यथार्थ को उसी रूप में प्रस्तुत करने में भी वे सफल होते दिखते हैं। इसके साथ ही उन्होंने बाल मनोविज्ञान आधारित कई यादगार कहानियां भी लिखी हैं। वे बाल मनोविज्ञान पर लिखी कहानियों के माध्यम से लोगों को उनके बालपन के दिनों की याद करा जाते हैं। उनसे बातचीत  के दरमियान उनके बालपन  व बालमन को समझा जा सकता है। 
  'घराना'  हैप्पी क्रिसमस'  'मारिया", "जूठन", "वेतन का दिन", "डाल से बिछड़ी सूरजमुखी",  "घोंचू",  '"अपराजिता", "मेरा सहयात्री", "कबाब,' 'अंततः', 'हरिश्चंद्र का पुनर्जन्म'' 'सस्ती गली' 'गुलाबिया', 'शेर', ' जो जीता वही सिकंदर', आदि कहानियां सामाजिक यथार्थ के धागों से बुनी गई है।  जिसमें दैहिक भूख, रिश्ते, बिछुड़न, संघर्ष, पराजय, अपराजय, पीड़ा और संघर्षरत लोगों के स्वर साफ सुनाई देते हैं। ये कहानियां परिवर्तन की मांग करती है, जो परिस्थितियों से मुकाबला कर आगे बढ़ना चाहती है।  हर एक कहानी एक नई  बात कहती हैं। इसके साथ ही आवाज उठाती भी नजर आती हैं।  रतन वर्मा की  कहानियों की बुनावट ऐसी हैं कि अगर पाठक किसी एक कहानी को पढ़ने का मन बना ले तो उसे पूरा किए बिना नहीं छोड़ेगा ।  साथ ही उसे अगली कहानियां पढ़ने की इच्छा भी जाग जाएगी । इन कहानियों के माध्यम से लेखक, पाठकों से समाज में मचे हलचल और उथल-पुथल को शांत करने की भी बात बताते हैं। लेखक यहां बदलाव की मांग भी करते नजर आते हैं । निश्चित तौर पर रतन वर्मा  की कहानियां जीवन संघर्ष से मुकाबला करने की ताकत प्रदान करती है ।
   रतन वर्मा की हर एक कहानी सामाजिक यथार्थ को स्पर्श करती हैं। इनकी कहानियां बदलाव के लिए प्रेरित करती हैं। संघर्ष के लिए प्रेरित करती हैं। इनकी  कहानियों का संघर्ष बदलाव लाने में सफल होती हैं। संघर्ष के समय एक व्यक्ति को किस तरह समस्याओं से मुकाबला करना चाहिए ? समस्याओं से कैसे जूझना चाहिए ? की सीख देती हैं। उनकी कहानियों के पात्र कभी भी पीठ दिखाकर भागते नहीं हैं,बल्कि जीवन में जो भी परेशानियां है, उनसे डटकर मुकाबला करते हैं । परेशानियों को परास्त करते हैं और जीवन में सफल होते हैं । 
   रतन वर्मा जितने उम्दा कथाकार हैं, उतने ही सधे हुए कवि भी हैं। पिछले दिनों उनकी एक कविता 'मन में है' आकाश काम नहीं' शीर्षक से फेसबुक सोशल मीडिया पर आई और देखते ही देखते साहित्यक मंचों की एक प्रेरणादाई कविता बन गई है। इस कविता की देशभर में चर्चा होने लगी है। यह कविता अवसाद पर बड़े ही कड़े तरीके से प्रहार करती है। जीवन की परेशानियों से लोग बहुत जल्द  परेशान हो जा रहे हैं।‌ लोग अवसाद से ग्रसित भी हो जा रहे हैं ।‌ इस चपेट में देश के लाखों युवा शिकार  हो चुके हैं ।‌ कविता की पंक्तियां यह सीख  है कि जीवन बहुमूल्य है । परेशानियां, समस्याएं और उलझने तो मानवीय जीवन का अंग है । मानवीय जीवन में संघर्ष नहीं है, तो यह जीवन कैसा है ? परेशानियां, उलझनें और समस्याएं जीवन को सतत संघर्ष करने की प्रेरणा देती है।  सच्चे अर्थों में इन्हीं परेशानियों, उलझनों और समस्याओं के बीच तप कर मनुष्य कुछ कर पाता है । तप कर स्वर्ण के निखर पाता है ।‌ इन परेशानियों से घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि इनके बीच रहकर ही संघर्ष करना है।  लेखक का खुद का  जीवन भी इन्हीं परेशानियों के बीच निखर कर बाहर आया है।  आज रतन वर्मा का जो नाम संपूर्ण देश में ख्याति है, इसके पीछे इनकी एक निष्ठ साधना है।