पूंजीपतियों और बड़े घरानों को लाभ पहुंचाना भाजपा का मुख्य उद्देश्य : कांग्रेस

Jun 21, 2020 - 09:07
पूंजीपतियों और बड़े घरानों को लाभ पहुंचाना भाजपा का मुख्य उद्देश्य : कांग्रेस

रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे,लाल किशोर नाथ शाहदेव, डा राजेश गुप्ता छोटू ने संयुक्त रूप से प्रेसवार्ता में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक कोरोना महामारी संकट काल को भी अवसर में बदलने की बात की थी, लेकिन इस बात का अंदाजा नहीं था कि जब पूरी दुनिया में आर्थिक गतिविधियां ठप्प है, वैसे समय में ही कोल ब्लॉक नीलामी के नाम पर जमीन उद्योगपतियों को सौंप दिया जाएगा और इसे अवसर का नाम दिया जाएगा।
प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रवक्ताओं ने कहा कि महाराष्ट्र और गुजरात के पूंजीपतियों के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की नजर झारखंड की भू संपदा पर लग चुकी है। पिछले छह वर्ष के कार्यकाल में गोड्डा में अडाणी पावर प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण समेत अन्य परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की चुकी है। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण कानून में भी संशोधन कर पूंजीपतियों और व्यवसायियों के एक समूह को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गयी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार देश में इस वक्त कुल 28 सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पीएसयू) में हिस्सेदारी बेचने में जुटी है। सरकार ने इन कंपनियों में विनिवेश यानी हिस्सेदारी बेचने को लेकर सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है। वहीं, देश में पहली बार रेलवे के निजीकरण की कोशिश भी शुरू कर दी गयी है। केंद्र सरकार ने देश के 23 स्टेशनों को निजी हाथों में सौंपने का फैसला लिया गया है, इसके लिए 28 जून को ऑनलाइन नीलामी भी होने वाली है।
आलोक दूबे, किशोर शाहदेव, डा राजेश गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में छह एयरपोर्ट को भी निजी हाथ में सौंप दिया गया है और ये एयरपोर्ट अडाणी समूह को सौंपे गये है। दूसरी तरफ आज राष्ट्रीयकृत बैंकों की स्थिति भी किसी से छिपी नहीं है। लोगों ने अब बैंकों की ओर रूख करना बंद कर दिया है। कई अन्य केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों पर भी विनिवेश का तलवार लटक रहा है।
कोयला झारखंड का मुद्दा सिर्फ राजस्व संग्रहण से जुड़ा मसला ही नहीं, बल्कि यह मसला यहां रहने वाले लोगों के अस्तित्व से जुड़ा है। कोयला खनन क्षेत्र में श्रमिकों के हो रहे शोषण को देखते हुए ही तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में कोयला कंपनी का राष्ट्रीयकरण किया गया था, लेकिन आज फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार लोगों को उसी पुरानी व्यवस्था में ढकेलने की कोशिश में है। उन्होने कहा कि कोयला खनन का मसला सिर्फ केंद्र का विषय नहीं है, इसके लिए राज्य की सहमति भी जरूरी है और देश में संघीय ढांचे का सम्मान करते हुए फिलहाल कोल ब्लाक की नीलामी की प्रक्रिया को स्थगित किया जाना चाहिए, क्योंकि अभी लॉकडाउन के दौरान जब अंतरराष्ट्रीय विमान सेवा स्थगित है, ग्लोबल टेंडर में कई कंपनियां हिस्सा नहीं ले पाएगी, ऐसे में आनन-फानन में नीलामी प्रक्रिया पूरी करने से कई संदेह भी उत्पन्न होते है। इसलिए फिलहाल पूरी नीलामी प्रक्रिया को रोक कर स्थिति के सामान्य होने का इंतजार किया जाना चाहिए।

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