बांकीपुर सीट पर 30 जुलाई को वोटिंग, PK लड़ सकते हैं चुनाव, तेजप्रताप ने भी उतारा प्रत्याशी, जानिए BJP से कौन हो सकता है उम्मीदवार
PATNA : चुनाव आयोग ने गुरुवार को निविन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव का ऐलान कर दिया है। 30 जुलाई को यहां वोटिंग होगी। 3 अगस्त को वोटों की गिनती की जाएगी। BJP ने अब तक यहां उम्मीदवार नहीं उतारा है। तेज प्रताप सबसे पहले कैंडिडेट का ऐलान कर चुके हैं। जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के भी यहां से चुनाव लड़ने की चर्चा है।
हाल में उन्होंने कहा था कि अगर मेरे चुनाव लड़ने से भाजपा बांकीपुर जैसी मजबूत सीट हारती है तो मैं चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूं। तेज प्रताप यादव ने जनशक्ति जनता दल में शामिल हुईं वीणा मानवी को इस सीट से टिकट दिया है। वीणा मानवी एक सामाजिक कार्यकर्ता रही हैं, वे मुख्य रूप से पटना और बिहार में महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहने के लिए पहचानी जाती हैं।
'समृद्ध महिला विकास मंच' (महिला विकास मंच) की राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर काम करती रही हैं। इसके जरिए वे पारिवारिक विवादों, घरेलू हिंसा और पीड़ितों की कानूनी, सामाजिक मदद के लिए पटना के इलाकों में काफी सक्रिय रही हैं।
जुलाई 2026 में तेज प्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) में शामिल होकर वे सक्रिय चुनावी राजनीति में मुख्य भूमिका में आई हैं। वे पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) महानगर (पटना) की महिला विंग में कोषाध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं।
BJP से ये हो सकते हैं उम्मीदवार
बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर जिनका नाम सामने आ रहा है, उनमें अजय आलोक और रणवीर नंदन का नाम शामिल है। नेशनल मीडिया में भाजपा के मजबूत चेहरे के रूप में पहचाने जाने वाले अजय आलोक को भी बांकीपुर में नितिन नवीन के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है। कायस्थ जाति से आने वाले डॉ. आलोक के पिता पद्म श्री गोपाल प्रसाद सिन्हा बड़े डॉक्टर हैं। पटना में इनकी एक अलग छवि है। 2003 में अपना पॉलिटिकल करियर शुरू करने वाले आलोक ने 2005 में कैमूर के चैनपुर विधानसभा सीट से LJP के टिकट पर चुनाव लड़ा था।
वहीं, भाजपा नेता रणवीर नंदन धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष हैं। इनके नाम की भी चर्चा बांकीपुर सीट के लिए है। रणवीर शिक्षित और सौम्य क्षवि के नेता माने जाते हैं। कायस्थ जाति से आते हैं। पटना के ही रहने वाले हैं। प्रो. रणवीर नंदन कभी नीतीश कुमार के भरोसेमंद माने जाते थे। 2014 में नीतीश ने इन्हें पहली बार अपनी पार्टी के कोटे से विधान परिषद भेजा था। 2020 में कार्यकाल पूरा होने के बाद पार्टी की तरफ से इन्हें रिपीट नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने सितंबर 2023 में जेडीयू से इस्तीफा दे दिया था।
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