BIG NEWS : लालू यादव को बड़ी राहत, चारा घोटाला केस में सुप्रीम कोर्ट का जमानत रद्द करने से इनकार

Jul 14, 2026 - 17:42
BIG NEWS : लालू यादव को बड़ी राहत, चारा घोटाला केस में सुप्रीम कोर्ट का जमानत रद्द करने से इनकार

PATNA : चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव को बड़ी राहत दी है. ED की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जमानत रद्द करने की मांग की गई थी. इस पर सोमवार को सुनवाई में कोर्ट ने लालू यादव की जमानत रद्द करने और सजा पर लगी रोक हटाने की मांग को खारिज कर दिया है.

दोनों पक्षों के वकील की दलील

इस मामले की सुनवाई जस्टिस एम एम सुंदरेश और पी बी वराले की बेंच ने की. एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने CBI की तरफ से पैरवी की. वहीं सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने बेंच के सामने यादव की तरफ से अपनी दलीलें रखीं और पक्ष मजबूत किया.

जमानत आदेश में दखल से इनकार

बेंच ने कहा कि यादव को ज़मानत दिए हुए 8 साल बीत चुके हैं. बेंच ने कहा कि वह हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने के लिए तैयार नहीं है. लेकिन उसने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ यादव और CBI द्वारा दायर मुख्य अपीलों पर सुनवाई में तेज़ी लाने को कहा

जल्द सुनवाई करने का आदेश

यह अपील साल 2018 की है, इसलिए कोर्ट ने सज़ा के खिलाफ लालू की अपील पर हाई कोर्ट द्वारा तेज़ी से सुनवाई करने का आदेश दिया. बेंच ने आगे कहा कि हाई कोर्ट से अपील की सुनवाई में तेज़ी लाने की रिक्वेस्ट करना सही होगा, हो सके तो 6 महीने के अंदर.

सीबीआई के वकील एस वी राजू की दलीलें

सुनवाई के दौरान राजू ने कहा कि दो मौकों पर सज़ा सस्पेंड करने की अर्ज़ी मेरिट के आधार पर खारिज की गई थी. राजू ने कहा कि हाई कोर्ट ने इस आधार पर ज़मानत दी कि यादव ने अपनी 50% सज़ा पूरी कर ली थी, जो असल में गलत है.

सीबीआई का तर्क

उन्होंने तर्क दिया कि हाई कोर्ट ने यादव की जेल की सज़ा का हिसाब लगाने में गलती की और जज का हिसाब गलत था. राजू ने ज़ोर देकर कहा कि यादव को लगातार सज़ा काटनी थी, इसलिए ट्रायल कोर्ट गलत है जब वह कहता है कि उसने आधी सज़ा काटी है.

सीबीआई को जवाब

सिब्बल ने राजू की बात का जवाब देते हुए कहा कि यह पूरी दलील कि यादव को दूसरी सज़ा से पहले पहली सज़ा काटनी चाहिए थी, पूरी तरह से गलत है. सिब्बल ने कहा कि जज ने एक जैसा पैमाना अपनाया और यह पूरी तरह जज की अपनी मर्ज़ी है.

धारा 427 का हवाला

सिब्बल ने ज़ोर देकर कहा कि क्रिमिनल प्रोसीजर कोड का सेक्शन 427, जो एक साथ और लगातार चलने वाली सज़ाओं से जुड़ा है, सिर्फ़ फ़ाइनल फ़ैसले के स्टेज पर लागू होगा. उन्होंने आगे कहा कि सज़ा के अंतरिम सस्पेंशन पर विचार करते समय यह नियम लागू नहीं होगा.

फास्ट-ट्रैक करने पर जोर

बेंच ने कहा कि वह ज़मानत के आदेश पर दोबारा विचार करने के बजाय अपील को फ़ास्ट-ट्रैक करने के लिए ज़्यादा तैयार है. कोर्ट ने कहा कि हमें ट्रायल में तेज़ी लानी होगी. कोर्ट ने इशारा किया कि वह हाई कोर्ट के ऑर्डर में दखल नहीं दे सकती है.

कपिल सिब्बल ने क्या कहा?

बेंच ने जब कहा कि अगर हम अपील में तेज़ी लाते हैं तो आपका क्या कहना है, तब सिब्बल ने जवाब दिया कि अगर कोर्ट ऐसा आदेश पास करना चाहता है तो मैं उसके रास्ते में नहीं आ सकता. इसके बाद कोर्ट ने इस सुनवाई को आगे गति दी.

सीबीआई की मुख्य चुनौती

सेंट्रल एजेंसी ने झारखंड हाई कोर्ट के उस आदेश को भी चुनौती दी है, जो अक्टूबर 2020 में पास किया गया था. यह आदेश 1992-93 के दौरान 37.62 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ था. CBI ने तर्क दिया कि हाई कोर्ट ने 'हाफ़-सेंटेंस' प्रिंसिपल को गलत तरीके से लागू किया.

क्या है चारा घोटाला मामला

1996 में तत्कालीन सीएम लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में चारा घोटाला का मामला सामने आया था. पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने 1997 में आरोप पत्र दाखिल किया था. जांच में सामने आया था कि 1990 में पशुपालन विभाग द्वारा मवेशियों के चारे, दवा की खरीद पर अवैध निकासी हुई थी.

चारे और दवा के नाम पर घोटाला

यह अवैध निकासी मवेशियों के चारे, दवा और कृत्रिम गर्भधारण की खरीद पर सरकारी खजाने से की गई थी. इस घोटाले में कुल 950 करोड़ रुपये की अवैध निकासी हुई थी. यह पूरा मामला करीब 5 साल तक दबे रहने के बाद अचानक खुलकर सबके सामने उजागर हुआ था.

सीबीआई केस

सीबीआई के आरोप पत्र दाखिल होते ही लालू यादव ने सीएम पद से इस्तीफा देते हुए राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बना दिया था. सीबीआई ने इस मामले में कुल 50 केस दर्ज किए थे. 17 साल तक इस मामले में सुनवाई हुई. लालू यादव को घोटाला से संबंधित कुल 5 मामलों में दोषी पाया गया.

पांच अलग-अलग कोषागारों से जुड़े मामले

उन्हें चाईबासा कोषागार के पहले और दूसरे मामले, देवघर कोषागार, दुमका कोषागार और डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी मामले में दोषी पाया गया था. इन मामलों में रांची सीबीआई कोर्ट ने उन्हें कुल 13 साल की सजा सुनाई थी. सजा होने के बाद लालू यादव की सदस्यता चली गई.

सात बार जेल यात्रा और वर्तमान स्थिति

वे 1997 से लेकर 2022 के बीच कुल 7 बार अलग-अलग अवधियों में जेल गए और लगभग 3 साल जेल में रहे. इसके बाद 2022 में ही रांची हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी. वर्तमान में लालू यादव जमानत पर बाहर हैं. मामला सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में चल रहा है.

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