हजारीबाग लॉ कॉलेज में प्रोफेसर की नियुक्ति पर सवाल, फर्जी डिग्री के आरोप पर हाईकोर्ट ने मांगा 2 सप्ताह में जवाब
रांची: हजारीबाग स्थित यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज में सहायक प्राध्यापक के पद पर कुमारी लक्ष्मी सिंह की नियुक्ति को लेकर विवाद झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। नियुक्ति में कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने लक्ष्मी सिंह समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने मामले में दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
रांची: हजारीबाग स्थित यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज में सहायक प्राध्यापक के पद पर कुमारी लक्ष्मी सिंह की नियुक्ति को लेकर विवाद झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। नियुक्ति में कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने लक्ष्मी सिंह समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने मामले में दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत में हुई। हजारीबाग निवासी सुशील कुमार की ओर से दायर रिट याचिका में यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज में सहायक प्राध्यापक के पद पर लक्ष्मी सिंह की नियुक्ति को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने नियुक्ति रद्द करने की मांग करते हुए उनकी शैक्षणिक योग्यता और प्रस्तुत दस्तावेजों की वैधता पर सवाल उठाए हैं।
LL.B. डिग्री को लेकर उठे सवाल
याचिका में दावा किया गया है कि लक्ष्मी सिंह ने औरंगाबाद लॉ कॉलेज, जो मगध विश्वविद्यालय से संबद्ध बताया गया है, से LL.B. की डिग्री हासिल करने का दावा किया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, उक्त कॉलेज को बार काउंसिल ऑफ इंडिया से केवल 1993-94 सत्र के लिए मान्यता प्राप्त होने की बात सामने आई है।
याचिका में प्रवेश पत्र, मार्कशीट और अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों में भी कथित विसंगतियों का उल्लेख किया गया है। इनमें प्रथम वर्ष के प्रवेश पत्र और मार्कशीट में परीक्षा केंद्र के कोड अलग-अलग होने का दावा किया गया है।
इसके अलावा याचिका में पार्ट-II और पार्ट-III की परीक्षा से संबंधित तारीखों तथा कॉलेज लीविंग सर्टिफिकेट की तारीख को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने इन दस्तावेजों को संदिग्ध बताते हुए नियुक्ति की जांच की मांग की है।
विश्वविद्यालय की जांच पर भी सवाल
मामले में विनोबा भावे विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिका के अनुसार, शिकायत सामने आने के बाद विश्वविद्यालय के कुलपति ने 30 मई 2023 और 12 मार्च 2025 को जांच समितियों का गठन किया था। आरोप है कि अब तक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया है कि RTI और प्रथम अपील के माध्यम से जानकारी मांगे जाने के बावजूद उन्हें अपेक्षित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
याचिका में लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत दस्तावेजों पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े पक्षों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति, कुलसचिव और कुमारी लक्ष्मी सिंह से दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।
फिलहाल अदालत के समक्ष लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब आना बाकी है। जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय होगी।
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