हिंदी दिवस पर एटीआई में व्याख्यान और काव्यपाठ, सचिव प्रवीण टोप्पो बोले- सरल भाषा और पारदर्शिता से मजबूत होगा सुशासन
रांची: हिंदी दिवस के अवसर पर कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखंड सरकार की ओर से एटीआई सभागार, रांची में व्याख्यान एवं काव्यपाठ समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभागीय सचिव प्रवीण टोप्पो ने सुशासन में सरल हिंदी, पारदर्शी व्यवस्था और सुगम प्रशासनिक प्रक्रियाओं की भूमिका पर जोर दिया।
रांची:- हिंदी दिवस के अवसर पर कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखंड सरकार की ओर से एटीआई सभागार, रांची में व्याख्यान एवं काव्यपाठ समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभागीय सचिव प्रवीण टोप्पो ने सुशासन में सरल हिंदी, पारदर्शी व्यवस्था और सुगम प्रशासनिक प्रक्रियाओं की भूमिका पर जोर दिया।
सचिव प्रवीण टोप्पो ने कहा कि “सुशासन की असली पहचान सरल हिंदी, सुगम प्रक्रियाएं और पारदर्शी व्यवस्था से होती है।” उन्होंने कहा कि जब सरकारी भाषा आम लोगों की समझ में आती है, तो सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ सही तरीके से जनता तक पहुंचाना आसान होता है।
सरकारी कामकाज में सरल भाषा पर जोर
सचिव ने अधिकारियों और कर्मचारियों से कार्यालयीन कामकाज में अनावश्यक जटिल शब्दों और कठिन प्रक्रियाओं को कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं और प्रक्रियाओं को जितना सरल बनाया जाएगा, शासन और जनता के बीच विश्वास उतना ही मजबूत होगा।
उन्होंने कहा कि सरल और स्पष्ट भाषा प्रशासन को आम नागरिकों के करीब लाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। सरकारी आदेश, योजनाओं की जानकारी और नागरिक सेवाओं से जुड़े निर्देश ऐसी भाषा में होने चाहिए जिन्हें आम लोग आसानी से समझ सकें।
तकनीक से बढ़ रही पारदर्शिता
प्रवीण टोप्पो ने प्रशासन में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन सेवाओं, समयबद्ध कार्यों के निस्तारण और शिकायतों की निगरानी के माध्यम से प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि तकनीक के जरिए प्रत्येक निर्णय और प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट बनाया जा सकता है। इससे आम लोगों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा बढ़ता है।
सचिव ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सरल भाषा, स्पष्ट कार्यशैली और जवाबदेह प्रशासन अपनाने की अपील की।
कवियों और साहित्यकारों ने प्रस्तुत की रचनाएं
कार्यक्रम में हिंदी पट्टी के कई प्रख्यात कवियों और विद्वानों ने अपनी रचनाओं और विचारों के माध्यम से हिंदी की समृद्धि, संवेदनशीलता और व्यापकता को रेखांकित किया। समारोह में साहित्यकारों, अधिकारियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
वक्ताओं ने कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि जनसरोकार और सांस्कृतिक एकता का सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि हिंदी देश की विभिन्न लोकभाषाओं और बोलियों को अपने भीतर समाहित करते हुए लगातार समृद्ध हुई है। यही विशेषता हिंदी को व्यापक जनसमुदाय से जोड़ती है।
काव्यपाठ में दिखी सामाजिक सरोकारों की झलक
काव्यपाठ के दौरान कवियों ने सामाजिक सरोकार, राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक विविधता और समकालीन मुद्दों पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत कीं। कविताओं को उपस्थित श्रोताओं ने खूब सराहा।
कार्यक्रम में विद्वानों ने हिंदी के ऐतिहासिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हिंदी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आज भी यह देश की विविधता को एक सूत्र में जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
हिंदी दिवस के इस कार्यक्रम में साहित्य और प्रशासन को एक साथ जोड़ते हुए यह संदेश दिया गया कि जनता के लिए शासन को सरल, पारदर्शी और सुगम बनाने में भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका है।
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