गणपति को क्यों कहा जाता है प्रथम पूज्य? जानिए भगवान शिव के वरदान और गणेश जी की अद्भुत पौराणिक कथा
धर्म डेस्क: हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य, पूजा या धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने की परंपरा है। यही वजह है कि गणेश जी को ‘प्रथम पूज्य’ और ‘विघ्नहर्ता’ कहा जाता है। मान्यता है कि गणपति का स्मरण करने से शुभ कार्यों में आने वाले विघ्न दूर होते हैं और कार्य की सफलता का आशीर्वाद मिलता है।
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य, पूजा या धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने की परंपरा है। यही वजह है कि गणेश जी को ‘प्रथम पूज्य’ और ‘विघ्नहर्ता’ कहा जाता है। मान्यता है कि गणपति का स्मरण करने से शुभ कार्यों में आने वाले विघ्न दूर होते हैं और कार्य की सफलता का आशीर्वाद मिलता है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान गणेश को सबसे पहले क्यों पूजा जाता है? इसके पीछे एक बेहद रोचक पौराणिक कथा बताई जाती है।
माता-पिता की परिक्रमा बनी सबसे बड़ी परीक्षा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव और माता पार्वती के दोनों पुत्रों गणेश और कार्तिकेय के बीच इस बात को लेकर चर्चा हुई कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है। तब दोनों के बीच एक प्रतियोगिता रखी गई।
कहा गया कि जो सबसे पहले पूरे संसार की परिक्रमा करके वापस आएगा, उसे विजेता माना जाएगा। प्रतियोगिता शुरू होते ही कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर सवार होकर संसार की परिक्रमा के लिए निकल पड़े।
भगवान गणेश का वाहन मूषक था और उनका शरीर भी भारी था। इसलिए उनके लिए संसार की परिक्रमा करना आसान नहीं था। गणेश जी ने अपनी बुद्धि का प्रयोग किया और भगवान शिव तथा माता पार्वती की सात परिक्रमा कर उनके सामने हाथ जोड़कर खड़े हो गए।
गणेश जी ने माता-पिता को माना पूरा संसार
जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने संसार की परिक्रमा किए बिना प्रतियोगिता कैसे पूरी कर ली, तो गणेश जी ने कहा कि माता-पिता के चरणों में ही संपूर्ण संसार का वास माना जाता है। इसलिए उन्होंने अपने माता-पिता की परिक्रमा करके पूरे संसार की परिक्रमा के समान पुण्य प्राप्त किया।
गणेश जी की बुद्धिमत्ता और माता-पिता के प्रति उनकी श्रद्धा देखकर भगवान शिव और माता पार्वती अत्यंत प्रसन्न हुए।
भगवान शिव ने दिया प्रथम पूज्य होने का वरदान
मान्यता के अनुसार, भगवान शिव ने गणेश जी को वरदान दिया कि किसी भी शुभ कार्य, पूजा, यज्ञ या धार्मिक अनुष्ठान से पहले गणेश जी की पूजा की जाएगी। इसी वरदान के कारण भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना गया।
धार्मिक मान्यता में गणेश जी को बुद्धि, विवेक, शुभता और सफलता का देवता भी माना जाता है। इसलिए किसी नए कार्य की शुरुआत से पहले ‘श्री गणेश’ करने की परंपरा आज भी चली आ रही है।
गणेश पूजा का धार्मिक महत्व
गणपति की पूजा केवल विघ्न दूर करने के लिए ही नहीं, बल्कि बुद्धि और विवेक की प्राप्ति के लिए भी की जाती है। भक्त मानते हैं कि सच्चे मन से गणेश जी का स्मरण करने से मन में सकारात्मकता आती है और व्यक्ति को अपने कार्य में सफलता प्राप्त करने की प्रेरणा मिलती है।
यही कारण है कि चाहे नया घर हो, विवाह हो, व्यापार की शुरुआत हो या कोई धार्मिक अनुष्ठान—सबसे पहले भगवान गणेश का नाम लिया जाता है।
धार्मिक मान्यता: पौराणिक कथाएं और उनसे जुड़ी मान्यताएं आस्था एवं धार्मिक परंपराओं पर आधारित हैं।
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