राहत शिविर में 400 बाढ़ पीड़ित भोजन के लिए तरसे, दोपहर 2 बजे तक नहीं मिला खाना

भागलपुर: जिले में बाढ़ के कारण कई पंचायतों के ग्रामीण मुश्किल हालात से गुजर रहे हैं। बाढ़ का पानी गांवों में घुसने के बाद बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बनाए गए राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। इसी बीच गोराडीह प्रखंड के उस्तु पंचायत स्थित बाढ़ राहत शिविर में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए।

Sep 13, 2026 - 16:37
राहत शिविर में 400 बाढ़ पीड़ित भोजन के लिए तरसे, दोपहर 2 बजे तक नहीं मिला खाना

भागलपुर:- जिले में बाढ़ के कारण कई पंचायतों के ग्रामीण मुश्किल हालात से गुजर रहे हैं। बाढ़ का पानी गांवों में घुसने के बाद बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बनाए गए राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। इसी बीच गोराडीह प्रखंड के उस्तु पंचायत स्थित बाढ़ राहत शिविर में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए।

राहत शिविर में रहने वाले करीब 400 बाढ़ पीड़ितों को दोपहर दो बजे तक भोजन नहीं मिल सका। ग्रामीणों के अनुसार शिविर में भोजन बनाने के लिए राशन तो उपलब्ध था, लेकिन खाना पकाने के लिए जलावन की व्यवस्था नहीं की गई थी। जलावन के अभाव में समय पर भोजन तैयार नहीं हो सका और बाढ़ पीड़ितों को काफी देर तक खाने का इंतजार करना पड़ा।

राशन था, लेकिन खाना बनाने की व्यवस्था नहीं

राहत शिविर में मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन की ओर से भोजन तैयार करने के लिए आवश्यक राशन उपलब्ध कराया गया था। इसके बावजूद खाना बनाने की मूलभूत व्यवस्था पूरी नहीं होने के कारण परेशानी खड़ी हो गई। सुबह से भोजन का इंतजार कर रहे लोगों को दोपहर तक खाना नहीं मिल पाया।

बताया गया कि शिविर में बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी मौजूद हैं। ऐसे में समय पर भोजन नहीं मिलने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने राहत शिविरों में भोजन, पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था को लेकर प्रशासन से गंभीरता बरतने की मांग की।

समाजसेवी ने उपलब्ध कराया गैस सिलेंडर

मामले की जानकारी मिलने के बाद समाजसेवी छोटू यादव राहत शिविर पहुंचे और वहां की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं। मौके पर खाना बनाने के लिए जलावन की व्यवस्था नहीं होने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने अपने निजी कोष से घरेलू गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया।

गैस सिलेंडर मिलने के बाद राहत शिविर में भोजन बनाने की व्यवस्था शुरू की गई। इसके बाद बाढ़ पीड़ितों के लिए खाना तैयार किया गया। इस घटना ने राहत शिविरों में भोजन की व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कई बाढ़ प्रभावित गांवों का किया निरीक्षण

राहत शिविर का जायजा लेने के बाद छोटू यादव ने गोराडीह प्रखंड के कई बाढ़ प्रभावित गांवों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित इलाकों में जाकर ग्रामीणों से उनकी समस्याओं की जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने बताया कि कई गांवों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है। हालांकि पानी घटने के बाद अब ग्रामीणों के सामने दूसरी तरह की समस्याएं सामने आने लगी हैं। कई इलाकों में पानी कम होने के बाद गंदगी और बदबू फैलने लगी है।

बीमारी फैलने का बढ़ा खतरा

छोटू यादव ने कहा कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद जगह-जगह गंदगी और जलजमाव की स्थिति बनी हुई है। इससे दुर्गंध फैल रही है और विभिन्न प्रकार की बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर लोगों के स्वास्थ्य पर इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि बाढ़ प्रभावित सभी गांवों में मेडिकल कैंप लगाए जाएं, ताकि ग्रामीणों को समय पर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। इसके साथ ही प्रभावित इलाकों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराने की भी मांग की गई है।

बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रशासन के सामने नई चुनौती

बाढ़ का पानी कम होने के साथ ही अब प्रभावित क्षेत्रों में संक्रमण और बीमारियों से बचाव प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। राहत शिविरों में भोजन की नियमित व्यवस्था के साथ-साथ साफ-सफाई, पेयजल, दवा और स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

गोराडीह के उस्तु पंचायत स्थित राहत शिविर में करीब 400 लोगों को समय पर भोजन नहीं मिलने की घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि यदि राशन उपलब्ध था तो खाना पकाने के लिए जरूरी व्यवस्था पहले से क्यों नहीं की गई। बाढ़ जैसी आपदा की स्थिति में राहत शिविरों में भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं की निर्बाध व्यवस्था बेहद जरूरी है।

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