रांची में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न, मतदाता सूची की शुचिता और समावेशन पर विशेषज्ञों ने किया मंथन
रांची, 3 सितंबर 2026: मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, पारदर्शी, सुलभ और समावेशी बनाने को लेकर रांची में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का गुरुवार को समापन हो गया। “मतदाता पंजीकरण एवं मतदाता सूची 2026” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में निर्वाचन विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, निर्वाचन पदाधिकारियों और विद्यार्थियों ने विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
रांची, 3 सितंबर 2026:- मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, पारदर्शी, सुलभ और समावेशी बनाने को लेकर रांची में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का गुरुवार को समापन हो गया। “मतदाता पंजीकरण एवं मतदाता सूची 2026” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में निर्वाचन विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, निर्वाचन पदाधिकारियों और विद्यार्थियों ने विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, झारखंड के कार्यालय की ओर से केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (CUJ) के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन का समापन नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची में हुआ। आईआईएम रांची, NUSRL रांची और सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची सम्मेलन के नॉलेज पार्टनर रहे।
निर्वाचकीय शुचिता के साथ समावेशन जरूरी
समापन समारोह को संबोधित करते हुए NUSRL के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल ने कहा कि मतदाता पंजीकरण और शुद्ध मतदाता सूची लोकतांत्रिक सहभागिता की बुनियादी आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची महज एक प्रशासनिक दस्तावेज नहीं, बल्कि नागरिकों को औपचारिक निर्वाचन प्रक्रिया से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने कहा कि निर्वाचकीय शुचिता और समावेशन को एक-दूसरे के विरोधी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। जहां अपात्र लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल होने से रोकना जरूरी है, वहीं यह भी सुनिश्चित करना आवश्यक है कि कोई पात्र नागरिक गलती या अनुचित प्रक्रिया के कारण मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।
प्रो. पाटिल ने कहा कि निर्वाचन व्यवस्था में शुद्धता के साथ सुगम्यता, दक्षता के साथ निष्पक्षता और सत्यापन के साथ उचित प्रक्रिया का पालन जरूरी है। उन्होंने प्रौद्योगिकी और डिजिटलीकरण के इस्तेमाल को नागरिक-केंद्रित बनाने पर जोर दिया।
AI और तकनीक के इस्तेमाल पर भी चर्चा
सम्मेलन में मतदाता सूची प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग और डिजिटल तकनीक के संभावित इस्तेमाल पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने कहा कि तकनीक के जरिए मतदाता सूची को अपडेट करने, विसंगतियों और दोहराव की पहचान करने तथा निर्वाचन संबंधी कार्यों की दक्षता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इसके साथ डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा, पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवीय निगरानी जैसे मुद्दों पर भी पर्याप्त सुरक्षा उपायों की जरूरत बताई गई।
प्रवासी श्रमिकों और वंचित समूहों पर विशेष चर्चा
दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), क्षेत्र-स्तरीय सत्यापन, मतदाता सूची की शुद्धता एवं समावेशिता, प्रवासन, लैंगिक मुद्दे, वंचित समुदायों, युवा सहभागिता और निर्वाचन साक्षरता जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
प्रवासी श्रमिकों, जनजातीय और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाली आबादी तथा निर्वाचन प्रक्रिया से वंचित होने की आशंका वाले अन्य समूहों के सामने आने वाली चुनौतियों को लेकर भी विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
ऑस्ट्रेलिया से लेकर दक्षिण अफ्रीका तक की निर्वाचन प्रणालियों पर मंथन
सम्मेलन में विभिन्न देशों की मतदाता पंजीकरण व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय अनुभवों को भी सामने रखा गया। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, एस्टोनिया, स्वीडन, घाना और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों की निर्वाचन प्रणालियों और प्रथाओं पर चर्चा की गई।
विशेषज्ञों ने माना कि मतदाता पंजीकरण के लिए कोई एक सार्वभौमिक मॉडल नहीं हो सकता। प्रत्येक देश की निर्वाचन व्यवस्था वहां की संवैधानिक, प्रशासनिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप विकसित होनी चाहिए।
ECINET के इस्तेमाल के लिए किया प्रेरित
समापन समारोह में सेवानिवृत्त उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी-सह-राज्य प्रशिक्षण नोडल पदाधिकारी देवदास दत्ता ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने सम्मेलन के दौरान हुए विचार-विमर्श को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची प्रबंधन से जुड़े ज्ञान, अनुभव और बेहतर प्रथाओं को साझा करने का अवसर मिला।
उन्होंने प्रतिनिधियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को ECINET एप्लिकेशन इंस्टॉल कर इस्तेमाल करने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों के जरिए नागरिकों को निर्वाचन सेवाओं तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने में ऐसे प्लेटफॉर्म महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
शोध और नीतिगत सुझावों को आगे बढ़ाने पर जोर
सम्मेलन की रैपोर्टियर रिपोर्ट केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड की सोलिका रानी और ऋतुपर्णा पालेई ने प्रस्तुत की। रिपोर्ट में सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में हुई चर्चाओं और प्रमुख निष्कर्षों को सामने रखा गया।
सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि शुद्ध, सुलभ और समावेशी मतदाता सूची लोकतांत्रिक सहभागिता और निर्वाचकीय शुचिता का मूलभूत आधार है। साथ ही निर्वाचन संस्थाओं, सरकार, न्यायपालिका, शिक्षण एवं शोध संस्थानों, नागरिक समाज, तकनीकी विशेषज्ञों और आम नागरिकों के बीच लगातार सहयोग की आवश्यकता बताई गई।
समापन समारोह में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार, अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार, उप निर्वाचन पदाधिकारी डॉ. धीरज कुमार ठाकुर समेत कई वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद, शोधकर्ता, विद्यार्थी, स्वयंसेवक और निर्वाचन विभाग के अधिकारी-कर्मी मौजूद रहे।
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