झारखंड में महिला किसानों के लिए नई पहल, ‘महिला किसान खुशहाली योजना’ से बढ़ेगी आय और मिलेगा बेहतर बाजार
रांची, 3 सितंबर 2026: झारखंड सरकार ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और महिला किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में नई पहल शुरू की है। कृषि विभाग की ओर से तैयार ‘महिला किसान खुशहाली योजना’ को प्रभावी और लाभकारी बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को होटल रेडिसन ब्लू में राज्यस्तरीय स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राज्यभर से महिला किसान, कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ, स्टेकहोल्डर्स और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
रांची, 3 सितंबर 2026:- झारखंड सरकार ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और महिला किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में नई पहल शुरू की है। कृषि विभाग की ओर से तैयार ‘महिला किसान खुशहाली योजना’ को प्रभावी और लाभकारी बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को होटल रेडिसन ब्लू में राज्यस्तरीय स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राज्यभर से महिला किसान, कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ, स्टेकहोल्डर्स और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कृषि मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि महिला किसान खुशहाली योजना का उद्देश्य राज्य की महिला किसानों को पहचान दिलाने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि योजना को केवल औपचारिकता के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए, बल्कि इसके वास्तविक परिणामों पर ध्यान केंद्रित करना जरूरी है।
महिला किसानों को मिलेगा बेहतर बाजार
कृषि मंत्री ने कहा कि योजना के जरिए महिला किसानों की क्षमता को विकसित करने, उनकी आजीविका को बेहतर बनाने और उन्हें उचित बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा। महिलाओं को कृषि से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने और उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक भागीदारी देने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि झारखंड में आज भी बड़ी संख्या में किसान पारंपरिक तरीके से खेती करते हैं। ‘महिला किसान खुशहाली योजना’ आने वाले समय में पारंपरिक खेती की सोच और कार्यप्रणाली में बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। योजना के माध्यम से कृषि को अधिक व्यावहारिक, लाभकारी और बाजार से जोड़ने की कोशिश की जाएगी।
महिलाओं की भागीदारी से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता दे रही है। विभिन्न सरकारी योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। कृषि क्षेत्र में भी महिलाओं की सीधी भागीदारी बढ़ने से उनकी आय, आजीविका और आर्थिक निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने का सीधा असर राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इसलिए महिला किसानों को कृषि के साथ-साथ उससे जुड़े अन्य आर्थिक अवसरों से जोड़ना जरूरी है।
स्टेकहोल्डर्स और महिला किसानों से लिए गए सुझाव
कृषि विभाग के विशेष सचिव गोपाल जी तिवारी ने बताया कि योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में महिला किसानों की क्षमता का विकास करना, निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी सहभागिता बढ़ाना, उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन के जरिए उनकी आय बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि योजना को अंतिम रूप देने में कृषि क्षेत्र से जुड़े स्टेकहोल्डर्स और स्वयं महिला किसानों के सुझाव बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसी उद्देश्य से यह कंसल्टेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें प्राप्त सुझावों को योजना के स्वरूप में शामिल कर इसे अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा।
3.2 लाख SHG से जुड़ी हैं 32 लाख महिलाएं
जेएसएलपीएस के सीईओ अनन्य मित्तल ने कहा कि महिला किसान खुशहाली योजना राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने बताया कि जेएसएलपीएस के तहत करीब 3.2 लाख स्वयं सहायता समूहों (SHG) से 32 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो विभिन्न गतिविधियों और व्यवसायों के माध्यम से अपनी आजीविका को मजबूत कर रही हैं।
वहीं, पशुपालन निदेशक रोबिन टोप्पो ने कहा कि सरकार महिलाओं को पशुपालन से जुड़ी योजनाओं का लाभ भी दे रही है। मुर्गी, सूअर और बत्तख पालन जैसी गतिविधियों से जुड़कर राज्य की महिलाएं अपनी आय बढ़ा रही हैं।
योजना के ड्राफ्ट पर हुआ ओपन हाउस डिस्कशन
कार्यक्रम में प्रेजेंटेशन के माध्यम से महिला किसान खुशहाली योजना के कॉन्सेप्ट और ड्राफ्ट की जानकारी दी गई। इसके बाद योजना के उद्देश्य, दायरा, इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम (IFS) मॉडल समेत विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
स्टेकहोल्डर्स और महिला किसानों के लिए ओपन हाउस डिस्कशन आयोजित किया गया, जिसमें योजना को ज्यादा व्यावहारिक और लाभकारी बनाने के लिए सुझाव लिए गए। कार्यक्रम में नाबार्ड, लीड बैंक, आईसीएआर, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र और एफपीओ के प्रतिनिधियों के साथ राज्यभर से आईं महिला किसान और कृषि विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य महिला किसानों को सिर्फ खेती तक सीमित रखने के बजाय उन्हें उत्पादन से लेकर बाजार और वैल्यू एडिशन तक की पूरी प्रक्रिया से जोड़ना है, ताकि वे कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकें और उनकी आय में स्थायी बढ़ोतरी हो।
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