पटना में केंद्रीय मंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर साधा निशाना, बोले- बच्चों को रटने के बजाय नए विचारों और कल्पनाशक्ति के लिए करें प्रोत्साहित
पटना। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था और नई शिक्षा नीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। पटना के बापू सभागार में आयोजित राज्यस्तरीय सेवा, चित्र एवं भाषण प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह में उन्होंने कहा कि बिहार में एक दौर ऐसा रहा, जब जातिवाद और 'डिवाइड एंड रूल' की राजनीति ने शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा। साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में हुए प्रयासों का भी उल्लेख किया।
पटना। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था और नई शिक्षा नीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। पटना के बापू सभागार में आयोजित राज्यस्तरीय सेवा, चित्र एवं भाषण प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह में उन्होंने कहा कि बिहार में एक दौर ऐसा रहा, जब जातिवाद और 'डिवाइड एंड रूल' की राजनीति ने शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा। साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में हुए प्रयासों का भी उल्लेख किया।
रटने की बजाय रचनात्मकता पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रटकर परीक्षा पास करना या नौकरी हासिल करना नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों में सोचने-समझने की क्षमता, रचनात्मकता और कल्पनाशक्ति विकसित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज का दौर ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का है, जहां एक नया विचार भी बड़े उद्योग की नींव बन सकता है। इसलिए बच्चों को सवाल पूछने, प्रयोग करने और अपनी प्रतिभा निखारने के अवसर मिलने चाहिए।
95,195 स्कूलों की भागीदारी का जिक्र
समारोह में बिहार के सभी 38 जिलों के 95,195 स्कूलों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए प्रह्लाद जोशी ने खुशी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और आत्मविश्वास बढ़ाने का अवसर देती हैं। पढ़ाई के साथ रचनात्मक गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास में अहम भूमिका निभाती हैं।
2047 के विकसित भारत में युवाओं की अहम भूमिका
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 में भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होंगे। उस समय देश को विकसित बनाने में आज के युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए विद्यार्थियों को बेहतर ज्ञान, कौशल और नए विचारों से लैस करना जरूरी है।
अभिभावकों से बच्चों की रुचि समझने की अपील
प्रह्लाद जोशी ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों पर अपनी पसंद का करियर थोपने से बचें। हर बच्चे की रुचि और प्रतिभा अलग होती है, इसलिए उन्हें अपनी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने शिक्षा को केवल डिग्री और नौकरी तक सीमित रखने के बजाय बच्चों में स्वतंत्र सोच और अपनी पहचान बनाने की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया।
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