एलन मस्क का मुकेश अंबानी पर तंज, बोले- ‘डियर प्राइम मिनिस्टर अंबानी’, स्टारलिंक को भारत में मौका देने की मांग
नई दिल्ली: दुनिया के प्रमुख उद्योगपतियों में शामिल एलन मस्क ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी पर एक बार फिर तंज कसा है। भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक की लॉन्चिंग में हो रही देरी को लेकर मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अंबानी को ‘डियर प्राइम मिनिस्टर अंबानी’ कहकर संबोधित किया। उनकी इस टिप्पणी के बाद भारत के दूरसंचार बाजार में प्रतिस्पर्धा और नियामकीय मंजूरी को लेकर बहस तेज हो गई है।
नई दिल्ली: दुनिया के प्रमुख उद्योगपतियों में शामिल एलन मस्क ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी पर एक बार फिर तंज कसा है। भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक की लॉन्चिंग में हो रही देरी को लेकर मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अंबानी को ‘डियर प्राइम मिनिस्टर अंबानी’ कहकर संबोधित किया। उनकी इस टिप्पणी के बाद भारत के दूरसंचार बाजार में प्रतिस्पर्धा और नियामकीय मंजूरी को लेकर बहस तेज हो गई है।
मस्क ने क्या कहा?
एलन मस्क ने 9 अक्टूबर को एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि उन्हें यह समझने में देर हुई कि मुकेश अंबानी ही भारत के असली बॉस हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में अंबानी से माफी मांगने की बात कही और सवाल उठाया कि क्या स्टारलिंक को भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने का अवसर दिया जाएगा।
मस्क का आरोप है कि भारत में कुछ कारोबारी समूहों के प्रभाव के कारण स्टारलिंक की एंट्री में बाधाएं आ रही हैं। हालांकि, अंबानी द्वारा स्टारलिंक की लॉन्चिंग रोकने के आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी पर विवाद
एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक उन क्षेत्रों में इंटरनेट उपलब्ध कराने की क्षमता रखती है, जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क और ब्रॉडबैंड की पहुंच सीमित है। मस्क का कहना है कि इस सेवा से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों, विद्यार्थियों और छोटे कारोबारियों को फायदा मिल सकता है।
भारत में रिलायंस जियो और एयरटेल जैसे बड़े दूरसंचार सेवा प्रदाता पहले से सक्रिय हैं। ऐसे में स्टारलिंक की संभावित एंट्री से सैटेलाइट इंटरनेट क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार ने क्या कहा?
स्टारलिंक को मंजूरी मिलने में देरी और बाजार में एकाधिकार के आरोपों के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में दूरसंचार क्षेत्र के लिए नियामकीय व्यवस्था निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी कहा है कि देश किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता।
सरकार के अनुसार, सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को शुरू करने के लिए सुरक्षा संबंधी शर्तों और अन्य जरूरी नियामकीय प्रक्रियाओं को पूरा करना अनिवार्य है।
क्यों चर्चा में है यह बयान?
एलन मस्क की टिप्पणी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत में नियामकीय मंजूरी की क्या भूमिका है और नई कंपनियों को बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए कितने अवसर मिलते हैं। फिलहाल, इस पूरे विवाद में मस्क के आरोप और सरकार का पक्ष सामने है, जबकि मुकेश अंबानी की ओर से इस विशेष टिप्पणी पर प्रतिक्रिया की पुष्टि नहीं हुई है।
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